फिर से पूरी दुनिया मे हमारे गांड़ीव की टंकार के साथ पांचजन्य का शंखनाद गूंज रहा है ... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सयुंक्त राष्ट्र संघ के मंच से आज फिर से पूरी दुनिया मे हमारे गांड़ीव की टंकार के साथ पांचजन्य का शंखनाद गूंज रहा है ... जिसकी आवाज से हमारा मन, मस्तिष्क ही नही हमारा रोम रोम तक पुलकित हो रहा है ... सदियों से मानसिक, वैचारिक आक्रमण और संस्कृति पर निरंतर आघात सहते हमारे तप्त ह्रदय पर पिछले पांच वर्षों से जो गर्व और अभिमान की फुहारे पड़ रही है ना ... उसका कारण केवल जनमानस का जागरण है ... मेरा मानना है कि जन जागरण के लिये परमात्मा ने मोदीजी को मानो निमित्त बनाकर भेजा है। भगवद्गीता में भगवान के अधर्म को नाश करने के लिये समयसमय पर अपने अवतरण का उद्देश्य और काल परिस्थितियों का वर्णन किया है ... यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ भावार्थ: जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्...