Deep State अदृश्य राज्य
"आज फिर से हिंदुओं के असंख्य टुकड़े टुकड़े करने का समय आ गया है। उसके सिवाय, भाजपा को हराना असंभव है, क्योंकि वे सभी जातियों और धर्मो को साथ लेकर भारत को प्रगतिपथ पर ले आए है, और भारत प्रगति करे, सारे हिंदू एकजुट रहे, सारे धर्म शांतिपूर्ण रहे, ये हमे, बिल्कुल भी पसंद नही है।"
"इस भारत को तोड़ने के लिए, हमने हर राज्य में दुर्बल सरकार लाकर, उसे आर्थिक रूप से दिवालिया करने की पॉलिसी अपनानी चालू कर दी है।"
"अब जब राज्य बर्बाद होंगे, तो देश भी कितने दिन टिकेगा, उसे भी जल्द दिवालिया घोषित करना ही होगा।"
"हम जानते है, हमे अब ज्यादा इंतजार नही करना पड़ेगा, हम अब अनेक नेताओं को खरीद चुके है, अनेक विदेशियों को, घुसपैठियों को भारत का वोटिंग कार्ड भी दिलवा चुके है, उन्हें हथियार भी दिए जा चुके है।"
"अब भारतीय जनता अपनेआप को ज्यादा दिन नही बचा पाएगी।"
यह सब समजने के लिए सबसे पहले आपको DEEP STATE (अदृश्य राज्य) समझना होगा।
- यह DEEP STATE क्या है?
- कैसे काम करता है?
- इसके पीछे कौनसी ताकते काम करती है?
- इनका उद्देश्य क्या है?
- इसका प्रभाव ओर परिणाम कहां कहां दिखाई पड़ता है?
आखिर आपके दिमाग मे भी आता होगा कि अमरीका-यूरोप शरणार्थी के नाम क्यो इतने Elegal लोगों को अपने देश मे भर रहे है ???
26 सितंबर 2015 को George Soros (Hungarian American businessman) एक प्लान EU में सामने रखता है जिसका नाम होता है The Project syndicate Publication!
इसके तहत EU (European Union) में ये घोषणा होती है कि EU को अब से हर साल 10 लाख Elegal लोगों को अपने यूनियन में शरण देनी होगी।
2015 से 2024 के 10 साल ही मान लिए तो अब तक 1 करोड़ Elegal तो EU में ऑफिसियल आ चुके है जिसपर प्लान बना था। इसके अलावा कितने और आये होंगे ये आप यूरोप के हालत देख समझ सकते हैं।
ये बातें और कोई नही बल्कि हंगरी के प्रधानमंत्री बता रहे थे जो इस मीटिंग में मौजूद थे जहां ये प्लान पब्लिश किया जा रहा था। इसे उन्होंने एम्पायर ऑफ जॉर्ज चर्च एंड NGOs नाम दिया जिसके तहत पूरे यूरोप के लीगल सिस्टम को ध्वस्त करते हुए कई करोड़ Elegal को यूरोप में फैला दिया गया। इसके लिए यूरोप के देशों के नेता, सांसद, NGO, पॉलिसी मेकर्स को खरीदा गया जो इस प्लान में उनका साथ दें।
लेकिन ये सब हो क्यों रहा था?
इसका कारण सिर्फ एक था कि ऐसे Elegal लोगों की फौज तैयार कर दो जो यूरोप-अमरीका के ईसाइयों से ज्यादा हो जाएं। ऐसा होने पर यूरोपियन और अमरीकी देशों में अब सत्ता हमेशा के लिए इनके पास आ गयी। ये लोग पहले से ही इन देशों में ईसाइयों की बड़ी तादाद को सेक्युलर/लिबरल बना चुके थे जो अब अपनी ही पहचान से नफरत करती है ... लेकिन कल को यदि कुछ ऐसा घट जाए कि इन्हें अपनी पहचान पर गर्व होने लगे अर्थात इनके अंदर राष्ट्रवाद पनपने लगे तो भी इनकी संख्या इतनी न हो कि चुनावो में ये अदृश्य राज्य की पसंदीदा सरकारों को हरा सकें। आपको वो बात तो Soros की याद ही होगी कि मैं दुनिया भर से राष्ट्रवादी सरकारें हटाना चाहता हूँ और इसके लिए 1 बिलियन डॉलर खर्च करने को तैयार हूं।
आज ब्रिटेन में भी सत्ता इन लोगों के पास है। पहले तो इन्होंने ब्रिटेन को EU से हटने से रोकने की कोशिश भी की लेकिन जब वहां सफल न हो सके तो इन्होंने आज ऐसी सरकार ब्रिटेन में बना दी है जहां राजा से लेकर प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री से लेकर विपक्ष सब जगह इनके लोग हैं। ये सब लोग WEF [World Economic Forum] के नुमाइंदे हैं जो अदृश्य राज्य का ही संगठन है।
इसी तरह फ्रांस के हाल भी हैं। मरीन ले पेन नामक राष्ट्रवादी महिला को हराने को मैक्रो जैसों ने 200 जगह अपने केंडिडेट वापिस ले लिए और खुद का समर्थन न्यू पॉपुलर फ्रंट नामक घोर वामपन्थी पार्टी को दे दिया। इस वजह से राष्ट्रवादी पार्टी जिसकी नेता मरीन ले पेन थी वो पार्टी तीसरे नम्बर पर चले गयी और बाद में मैक्रो ने दूसरों से गठजोड़ कर वापिस राष्ट्रपति की कुर्सी पर कब्जा कर दिया।
मैक्रो को खुद सीआईए ने 2017 में समर्थन दिया था और इसके लिए वोट मांग रहा था ओबामा जो खुद अदृश्य राज्य के कबाल का आदमी है जिसे हिलेरी-ओबामा कबाल कहा जाता है जो अदृश्य राज्य के लिए काम करता है और इनका अंबेसडर आप Soros को समझ सकते हो जैसे अमरीका या किसी सरकार का दूसरे देशों में होता है जो बेसिकली उस देश मे उन देशों की सरकार ही होती है।
इसी तरह का चुनावी दखल Barack Hussein Obama ने 5 नवम्बर 2020 को भी किया था जब अमरीकी चुनाव में रिगिंग कर ट्रम्प को चुनाव हरवाया था जिस वजह से ही एक महीने तक ट्रम्प समर्थकों ने हंगामा करकर रखा था। और वर्तमान छद्म रूप से Joe Biden को मोहरा बनाकर अदृश्य राज्य चला रहा है यह Geo Politics जानने वालों के लिए आश्चर्यजनक नहीं है।
और इस बार फिर अमरीकी चुनावो में भयंकर दखल हो रही है। जितने भी Elegal वहां घुस चुके, उन्हें वोट देने का अधिकार दे दिया है।
अमरीका जिसे कथित ओल्डेस्ट डेमोक्रेसी कहते हैं उधर आपको पहचान पत्र ले जाकर वोट देने की जरूरत नही होती। आप या तो ईमेल से या डायरेक्ट बिना पहचान बताए वोट डालकर आ सकते हैं। और इसी का विरोध वहां रिपब्लिकन कर रहे हैं कि वोटिंग के दौरान पहचान पत्र अनिवार्य हो। एलन मस्क तो बकायदा X (ट्विटर) पर अभियान चला रहा है कि जब दुनिया भर (भारत सहित) में पहचान पत्र चेक होता है कि आप देश के नागरिक हैं या नहीं, तो अमरीका में कोई भी कैसे वोट दे देगा?
और इसी वजह से मुझे ट्रम्प के जीतने के चांस कम लग रहे क्योंकि ईमानदारी से तो ट्रम्प 2020 में भी जीत रहा था।
तो इस तरह अदृश्य राज्य का प्लान यूरोप अमरीका में चल रहा है जहां Elegal इतने बसा दो कि आप उस देश मे अल्पसंख्यक हो जाएं। फिर आप कितनी ही एकता की बात करें लेकिन आपके पास संख्या बल ही न होगा कि आप सरकार बना सकें। और जब सरकार आपकी नही रहेगी तो आपके हित के काम न होकर वो सब होगा जो अदृश्य राज्य चाहेगा। और फिर वो कुछ भी चाह सकते हैं।
पहले ये काम NATO के नाम पर अमरीका द्वारा यूरोप को "गुलाम" बनाकर होता था लेकिन अब यूरोप के देश कहने लगे हैं कि हम क्यों अमरीका की लड़ाई लड़ें? इसी तरह जब अमरीका में रिपब्लिकन आते हैं तो वो इनके प्लान खराब कर देते हैं जैसे जब ट्रम्प सत्ता में था तो उसने एक भी देश पर युद्ध नही थोपा, उल्टा अफगानिस्तान जैसे देश से सेना वापिस बुला ली। इसी तरह वो कह रहा कि मैं जीतते ही रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवा दूंगा जब यूक्रेन को कोई भी मदद बन्द कर दूंगा।
और यही सब अदृश्य राज्य नही चाहता क्योंकि दुनिया की बर्बादी से ही उसका सिक्का दुनिया मे फिर चलता है।
अब जरा भारत की बात कर लें तो भारत मे भी घुसपैठ पुरानी है। इनके तो वोटर कार्ड तक बन गए। करोड़ो में इनकी संख्या बताई जाती है लेकिन फिर भी इनकी इतनी ताकत नही कि ये चुनाव अपने हिसाब से मोड़ सकें।
इसलिए वही अदृश्य राज्य वालों ने यहां के विपक्ष को फार्मूला दिया है कि हिन्दू को जातियों में तोड़ दो। उसके लिए जो करना है करो। पैसा Sorrows जैसों से पहुंच जाएगा और मीडिया से लेकर सोशल मीडिया हम खरीदकर दे देंगे और जिन्हें न भी खरीद सकें, उन्हें कंट्रोल करना हमें आता है।
इसके अलावा, भारत इन अमरीका यूरोप वालों की तरह बंधा नही है जिन्होंने UN चार्टर में हस्ताक्षर किए हों कि हम कथित शरणार्थियों के लिए अपनी सीमा खोलेंगे तो इस वजह से भी यहां वो मनमर्जी की घुसपैठ नही करा सकते लेकिन मुझे यकीन है कि गलती से भी मुस्लिम लीग उर्फ कांग्रेस की सरकार आ गयी तो सबसे पहले इस चार्टर में भारत हस्ताक्षर करेगा और उसका सबसे पहला काम घुसपैठियों को यहां की नागरिकता देना होगा और साथ ही जितने चाहे उतने बुल्ले भारत मे घुसेड़ने की मंजूरी मिल जाएगी।
हम समझते नहीं या इतना गौर नही कर पाते कि जब CAA आया तो उसके विरोध में ये क्यों कहा कि मुस्लिम को भी नागरिकता दो। या CAA आते ही ये लोग डर क्यों गए कि NRC भी आएगा जिसमें जो भारत का नागरिक न होगा उसे अलग कर सबसे पहले उससे नागरिकता छीनी जाएगी फिर भले ही उसे देश से बाहर न निकाल किसी अंडमान में भेज दिया जाए।
और ये प्लान फिलहाल हमारा पाइपलाइन में है क्योंकि 2026 में पहले नया परिसीमन होने जा रहा है लोकसभा सीटों का। इसके साथ ही उस समय भारत की जनगणना होगी। हो सकता है कि जनगणना की आड़ में चुप चाप NRC भी हो जाये। साथ ही उसी समय वोटर ID को आधार से जोड़ने का काम भी हो सकता है।
इस तरह जो यहां घुसपैठिये हैं उन्हें अलग थलग कर बाकियों को एक नेशनल सिटीजन कार्ड दे दिया जाए जैसा अन्य देशों में होता है। इस एक कार्ड में ही आपकी आधार/पैन आदि डिटेल होंगी जिससे आपको अलग अलग कार्ड कैरी करने की जरूरत न होगी।
हालांकि इसका विरोध भी बहुत होगा और सिर्फ सड़को पर नही बल्कि सुप्रीम कोर्ट से भी इसे रोकने की कोशिश होगी और अपना कोर्ट कितना बड़ा "मानवीय" एवम "माननीय" है वो तो आप जब अवैध निर्माण तोड़ा जाता है, तब ही देख सकते हैं। और मैं ये आरोप नही लगा रहा कि कोर्ट में भी अदृश्य राज्य वालों के एजेंट ही बैठे हैं।
अदृश्य राज्य CIA या ऐसी ही संस्थानो के माध्यम से अपनी शत्रु सरकार को खत्म करने को पांच तरीके पर काम करती है।
- उनकी विपक्षी पार्टी को फंड करकर
- उस सरकार के मुखिया की हत्या कराकर
- उस देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाकर
- उस देश की मीडिया को खरीदकर
- उस देश मे अराजकता फैलाकर
(हमारे पड़ोस में श्रीलंका, बांग्लादेश इनके ताजा शिकार है)
अब आप यदि वाकई पॉलिटिक्स समझते हैं तो आपको पता है कि भारत में विपक्ष को लगातार फंडिंग हो रही है।
मोदी की हत्या का प्रयास 2002 से लगातार चल रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर अडानी के माध्यम से LIC-SBI डूबाकर बाजार को नुकसान कराने का प्रयास हो चुका है और सोरॉसनंदन तक के मुंह से ये कहलवाना कि भारत का बाजार सुरक्षित नही है, यहां निवेश न करो ... आप सुन चुके हैं।
मीडिया के बारे में क्या कहना, अब तो सोशल मीडिया भी उन्होंने खरीदा हुआ है।
और अब जब चारो करकर देखने के बाद भी जब सरकार नही गिरा पा रहे तो लगातार इस देश मे बंग्लादेश जैसे हालात दोहराने की धमकी आप सुन रहे हैं।
न सिर्फ सुन रहे बल्कि आपको जातियों में लड़ाया जा रहा है, अमीरी-गरीबी के नाम पर भड़काया जा रहा है, उत्तर-दक्षिण से लेकर सनातन को खत्म करने की बात आप सुन चुके हैं, किसान - महिला एथलीट के नाम पर आंदोलन देख चुके हैं, संविधान से लेकर अल्पसंख्यक खतरे में हैं के नाम पर प्रयास लगातार हो रहा है, और भी आप जोड़ सकते हैं।
बांग्लादेश में अचानक भारत की मित्र शेख हसीना की चुनी हुई बहुमत सरकार को छात्र आंदोलन के नाम गिराकर वहां की जिहादी शक्तियों के माध्यम से अल्प संख्यक हिंदुओं पर अत्याचार प्रताड़ना यह अदृश्य राज्य की गहरी साजिश हैं।
पश्चिम बंगाल में महिला अत्याचार के बाद पुरे देश में अचानक सिलसिलेवार बलात्कार की घटनाएं, यह हिंदु जनमानस को आक्रोशित कर धार्मिक उन्माद फैलाकर देश को गृहयुद्ध में जोकने की शाजिस है। इतना कुछ होने पर केंद्र सरकार केंद्र सरकार की कठोर कार्यवाही न होते देख बहुसंख्यक हिंदुओ को BJP के विरुद्ध जनमानस बनाने का षड्यंत्र है।
हमारी न्यायपालिका और कार्यपालिका आज भी "सिस्टम" की कटपुतली बनी बैठी है। केंद्र सरकार यदि राष्ट्रपति शासन जैसा संवैधानिक अधिकार अपनाए तो हमारे "माननीय" स्वत संज्ञान लेकर अडंगा लगाए बैठे है।
ये आखरी तरीके है, जिससे रिजीम चेंज हो सकता है जिसे वह अलग अलग रूप से अपना रहे हैं।
इसलिए आपको तय करना है कि जो आप अभी तक भ्रमित न हुए या जो थोड़े बहुत हुए भी है, तो आपको आगे इस्तेमाल होना है या फिर इन लोगों के इस आखरी प्लान को भी ध्वस्त कर देना है।
क्योंकि अब ये लोग आपके दिमाग से खेल रहे हैं। मोदी को तो ये पिछले 23 साल से न हरा पाए, न इनकी औकात है कि ये मोदी को शारीरिक या मानसिक तौर पर "खत्म" कर सकें लेकिन जो इनका प्लान है कि मोदी को नहीं, उनकी छवि, उनकी विश्वसनीयता को खत्म करना है ... ये उसी चक्कर मे लगे हैं।
इनके ऐसे बयान जानबुझ कर होते हैं ताकि आपके अंदर निराशा भरे।
आजकल जैसे ये आपके अंदर निराशा डाल रहे हैं कि "सरकार तुम्हारी है पर सिस्टम इनका है।"
आपको तो इतना सोचना है कि अचानक इन्होंने ये सब कहना शुरू क्यों किया?
सिस्टम तो इनका 2014 से भी था और 2024 तक भी था लेकिन अब क्यों ये ऐसी बात कर रहे हैं?
इसे ही साइक्लोजिकल वारफेयर कहते हैं और सोरॉसनंदन मोदी को इसमें नही हरा सकता, इसलिए उसके समर्थकों के दिमाग मे ये बातें भर रहा है।
खैर, वापिस बात करें अमरीका और यूरोप की तो इस तरह के प्लान की वजह से ही आज यूरोप जल रहा है और अमरीका भी आने वाले दिनों में जलेगा। ट्रम्प इसी लिए मेक्सिकन बॉर्डर को सील करना चाहता है लेकिन ट्रम्प को ये लोग किसी भी तरह आने देना नही चाहते। उसे रोकने को तो उसकी हत्या तक करने वाले थे लेकिन किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था। सोचिए अगर ये अपने पूर्व राष्ट्रपति को तक मरवाने की सुपारी दे सकते हैं तो इनका प्लान कितना खतरनाक होगा।
और ऐसा ही प्लान इनका हर राष्ट्रवादी सरकार और राष्ट्रवादी नेता के खिलाफ है।
कल पुतिन पर इसी Soros का प्लान बताया था कि वो पुतिन की "सल्तनत" खत्म करना चाहता है। जिनपिंग का माओ बनना उसे पसन्द नही आ रहा है। और मोदी का तो खैर आप सबको पता ही है।
इसी तरह यूरोप, साउथ अमरीका, एशिया के अन्य देशों के राष्ट्रवादी नेता हैं। कुछ मर चुके, कुछ पर गोलियां चल चुकी, कुछ को किसी कोर्ट या अन्य माध्यम से सत्ता से हटा चुके, तो कुछ को युद्ध के नाम पर हटाने में लगे हुए हैं।
मोदी 3.0 में सरकार को बैकफुट या कमजोर समझने वाले को अदृश्य राज्य के काले कारनामे और इनका प्रभाव समजकर उनके कार्यों का मूल्यांकन करना होगा। अन्यथा हम जाने अनजाने एक राष्ट्रवादी नेतृत्व में चल रही अल्पमत सरकार को आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों में हराकर केंद्र सरकार को और बैकफुट में धकेलने के अदृश्य राज्य के एजेंडे को सफल बनाने में मददगार साबित होंगे यह निर्णय हमारे हाथों में है।
एक देशभक्त
संकलन साभार

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