नेहरु खानदान का घिनौना चरित्र

एक सच्चाई

क्या नहेरुवंश हिंदू ???
नेहरू खानदान यानी गयासुद्दीन गाजी का वंश !!!
  • भारत मे और कोई नेहरू क्यूँ नहीं हुआ ?
  • नेहरू ने ऐसा क्यूँ कहा “I AM HINDU BY AN ACCIDENT”
  • कभी फ़िरोज़ H/o इंदिरा गाँधी उर्फ़ मेमुना बेगम का जन्म या मृत्यु दिवस मनाते नहीं देखा है, क्यों?
भारत देश मे पैसठ सालो से कांग्रेस  का राज रहा ... फिर भी ये नेहरु का कश्मीर का घर क्यों नही खोज पाए ? खोज तो लिए फिर उसे जाहिर क्यों नही किया ? असल मे ये  खानदान मुस्लिम मूल का है।

नेहरू से पहले … नेहरू कीपीढ़ी इस प्रकार है ...

गयासुद्दीन उर्फ गंगाधर नहेरु की वंशावली

गंगाधर नेहरु (Nehru) उर्फ़  ग्यास-उद-दीन शाह GAYAS-UD-DIN SHAH  जिसे GAZI की उपाधि दी गई थी ...

GAZI जिसका मतलब होता है (KAFIR–KILLER)  इस गयासुद्दीन गाजी ने ही मुसलमानों को खबर (मुखबिरी) दी थी की गुरु गोबिंद सिंह जी नांदेड में आये हुए हैं, इसकी मुखबिरी और पक्की खबर के कारण ही सिखों के दशम गुरु गोबिंद सिंह जी के ऊपर हमला बोला गया, जिसमे उन्हें चोट पहुंची और कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। और आज नांदेड में सिक्खों का बहुत बड़ा तीर्थ-स्थान बना हुआ है।

जब गयासुद्दीन को हिन्दू और सिक्ख मिलकर चारों और ढूँढने लगे तो उसने अपना नाम बदल लिया और गंगाधर राव बन गया। और उसे इससे पहले मुसलमानों ने पुरस्कार के रूप में अलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में इशरत मंजिल नामक महल/हवेली दिया, जिसका नाम आज आनंद भवन है। आनंद भवन को आज अलाहाबाद में कांग्रेस का मुख्यालय बनाया हुआ है। इशरत मंजिल के बगल से एक नहर गुजरा करती थी, जिसके कारण लोग गंगाधर को नहर के पास वाला, नहर किनारे वाला, नहर वाला, Neharua,आदि बोलते थे जो बाद में गंगाधर नेहरु अपना लिखने लगा इस प्रकार से एक नया उपनाम अस्तित्व में आया नेहरु और आज समय ऐसा है की एक मात्र अरुण नेहरु को छोड़कर कोई नेहरु नहीं बचा ...

अपने आप को कश्मीरी पंडित कहला रहा था गंगाधर, क्यूंकि अफगानी था और लोग आसानी से विश्वास कर लेतेथे क्यूंकि कश्मीरी पंडितभी ऐसे ही लगते थे।

अपने आप को पंडित साबित करने के लिए सबने नाम के आगे पंडित लगाना शुरू कर दिया
  1. गंगाधर नेहरु
  2. राज कुमार नेहरु
  3. विद्याधर नेहरु
  4. मोतीलाल नेहरु
  5. जवाहर लाल नेहरु लिखा ... और यही नाम व्यवहार में लाते गए ...
  • पंडित जवाहर लाल नेहरु अगर कश्मीर का था तो आज कहाँ गया कश्मीर में वो घर आज तो वो कश्मीरमें कांग्रेस का मुख्यालय होना चाहिए जिस प्रकार आनंदभवन कांग्रेस का मुख्यालय बना हुआ है इलाहाबाद में ...
  • आज तो वो घर हर कांग्रेसीयों के लिए तीर्थ स्थान घोषित हो जाना चाहिए था।
  • ये कहानी इतनी पुरानी भी नहीं है की इसके तथ्य कश्मीर में मिल न सकें ..., आज हर पुरानी चीज़ मिल रही है ..., चित्रकूट में भगवन श्री राम के पैरों के निशान मिले, लंका में रावन की लंका मिली, उसके हवाई अड्डे, अशोक वाटिका, संजीवनी बूटी वाले पहाड़ आदि बहुत कुछ ... समुद्र में भगवान श्री कृष्ण भगवान् द्वारा बसाई गई द्वारिका नगरी मिली, करोड़ों वर्ष पूर्व की DINOSAUR के अवशेष मिले तो 150 वर्ष पुराने कश्मीर में नकली नेहरू का अस्तित्व ढूंढना क्या कठिन है ??? दुश्मन बहुत होशिआर है हमें आजादी के धोखे में रखा हुआ है।
  • तो क्या सोचा हम नेहरू को कौनसे नाम से पुकारे ? जवाहरुद्दीन या चाचा नेहरू ?
  • जो नेहरू नेहरू कहते है उनसे पूछिये की इस खानदानके अलावा भारत मे और कोई नेहरू क्यूँ नहीं हुआ ? अगर यह वास्तव मे ब्राह्मण था तो ब्राह्मनों मे नेहरू नाम की गोत्र अवश्य होनी चाहिए थी ? क्यूँ नहीं ? क्यों देश मे और कोई नेहरू नहीं मिलता ?क्या ये जवाहर लाल के परिवार वाले आसमान से टपके थे ?
  • जो लोग नेहरू गांधी परिवार को मुस्लिम मानने से इंकार करते है उनके लिए प्रश्न
  • देश मे सोलंकी, अग्रवाल, माथुर, सिंह, कुशवाहा, शर्मा, चौहान, शिंदे, कुलकर्णी, व्यास, ठाकरे आदि उपनाम हजारो, लाखो करोड़ो की संख्या मे मिलेंगे लेकिन “नेहरू” सेकड़ों भी नहीं है क्यूँ ?
  • कश्मीरी हमेशा अपने नाम के पीछे पंडित लगाते है लेकिन जवाहर लाल के नाम के आगे पंडित कैसे ? गंगाधर के पहले का इतिहास क्यूँ नहीं है?
  • नेहरू ने ऐसा क्यूँ कहा “I AM HINDU BY AN ACCIDENT”
इस परिवार ने देश के अन्य वीर शहीदो की शहीदी को भूला दिया उनका बलिदानी इतिहास फीका कर दिया अपने महिमा मंडित इतिहास से हर पन्ने पर इनका नाम नजर आता है ... हमें तो अब चाहिए पूर्ण आजादी ... राम कृष्ण राणा शिवाजी के देश मे नकली गाँधी नेहरू नाम के पिशाच नहीं चाहिए।

नेहरु खानदान का घिनौना चरित्र नहेरु से लेकर इंदिरागांधी के अवैध संबंध किसका बाप कौन ??? इस लिंक पर click कर youtube vdo clip देखे 👇👇👇
https://youtu.be/qHA-9kw9y-o

किस का बाप कौन ??? 👇👇👇

नेहरु खानदान का इतिहास इतना भयावह एवं धिनौना है की जान कर आप भी नेहरु से नफरत करने लगेंगे ...

मोती लाल नेहरु की एक धर्म पत्नी और चार अन्य अवैध पत्नियाँ थीं

क्या आप जानते हैं मोती लाल नेहरु की एक धर्म पत्नी और चार अन्य अवैध पत्नियाँ थीं !!!

1) श्रीमती स्वरुप कुमारी बक्शी :- (विवाहिता पत्नी) से दो संतानें थीं|

2) थुस्सू रहमान बाई :- से जवाहरलाल नेहरु और शैयद हुसैन (अपने मालिक मुबारक अली से पैदा हुए थे। मालिक को निपटा दिया उसके बाद उसकी धन संपत्ति और बीबी बच्चे हथिया लिए थे)

3) श्रीमती मंजरी :- से श्री मेहरअली सोख्ता (आर्य समाजी नेता)

4) ईरान की वेश्या :- से मुहम्मद अली जिन्ना 

5) नौकरानी (रसोइन) :- से शेख अब्दुल्ला (कश्मीर के मुख्यमंत्री)

(क) श्रीमती स्वरुप कुमारी बक्शी (विवाहिता पत्नी) से दो संतानें थीं | A. श्रीमती कृष्णा w/o श्री जय सुख लाल हाथी (पूर्व राज्यपाल) B. श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित w/o श्री आर.एस.पंडित (पूर्व. राजदूत रूस), पहले विजय लक्ष्मी पंडित ने अपने आधे भाई शैयद हुसैन से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये थे जिससे संतान हुई चंद्रलेखा जिसको श्री आर.एस.पंडित ने अपनी बेटी के रूप में स्वीकार किया।

(ख.) थुस्सू रहमान बाई - से जवाहरलाल नेहरु और शैयद हुसैन - शैयद हुसैन इनके मालिक मुबारिक अली की संतान थी जिनको इन्होने मुबारिक की मौत के बाद अपना लिया था। मुबारक अली की एक और संतान थी मंज़ूर अली जो कि इंदिरा की खुनी पिता थे।

जवाहर लाल नेहरु ने कमला कोल को कभी अपनी पत्नी नहीं माना था और सुहागरात भी नहीं मनाई थी। कमला कश्मीरी पंडित थी यह जवाहर को एकदम पसंद नहीं थी, वैसे वो सिर्फ मुल्ले या अँग्रेज़ को ही ऊँची Race का घोडा मानते थे।

कमला नहेरू की जिंदगी एक दासी के जैसी थी जिस अबला नारी पर मंजूर अली ने ही हाथ थाम लिया था। वास्तव में इंदिरागांधी मंजूर अली की संतान है। कमला के सम्बन्ध हुए मंजूर अली से जो की मुबारक अली की संतान था (मुबारक अली को आप अभी भूले नहीं होंगे, या वही हैं जो की मोतीलाल के बॉस और शायद जवाहरलाल के कथित रूप से पिता भी थे। कमला कौल और मुबारक अली से उत्पन्न हुई ' इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरु ' और कमला नहेरु का फ़िरोज़ खान।(जूनागढ़ वाले नबाब खान का बेटा, उनका होनेेे वाला जंवाई) से भी नजायज सम्बन्ध रहे। किन्तु सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य कोई संतान नहीं हुई। ये वही फ़िरोज़ खान है जिसका बाद में इंदिरा से निकाह हुआ और उसे मैमुना बेगम बनना पड़ा। शायद यही वो वजह रही होगी जिसके कारण फ़िरोज़ से इंदिरा की शादी का उसने पुरजोर विरोध किया था। रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब ए लैम्प फॉर इंडिया – द स्टोरी ऑफ मदाम पंडित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान था। 

इन्ही कारणवश नेहरु को इंदिरा जरा भी नही सुहाती थी। अब जब क़ानूनी तौर पर इंदिरा ही उसकी बेटी थी इसलिए न चाहते हुए भी उसको इंदिरा को आगे बढ़ाना पड़ा हलाकि उसके जीते जी इंदिरा कोई खेल नहीं कर पाए थी। वो तो बेचारे शास्त्री जी इसकी बातों में आकर ताशकंद चले गए थे पाकिस्तान से समझौता करने वहाँ इंदिरा ने याह्याखान की मदद से शास्त्री जी को जहर दिलवा कर मरवा डाला था और बताया की मौत ह्रदय की गति रुकने से हो गया। कोई पोस्टमार्टम नहीं कोई रिपोर्ट नहीं। इंदिरा ने मौका पाते ही झट से कुर्सी हड़प ली थी।

प्रियदर्शिनी नेहरु उर्फ़ मैमूना बेगम उर्फ़ श्रीमती इंदिरा खान w/o श्री फिरोज जहाँगीर खान (पर्शियन मुस्लमान) जो कि बाद में गाँधी बन गए थे। से दो पुत्र एक राजीव खान (पिता फ़िरोज़ जहाँगीर खान) और संजय खान (पिता मोहम्मद युनुस), तीसरा बच्चा जो M O मथाई (जवाहरलाल का पी ऐ) से हुआ था जिसको गिरा दिया गया क्योंकि वो आशंका थी की कही रंग दबा हुआ (काला) निकला तब कैसे मुह छुपाएगी ???

(ग.)  श्रीमती मंजरी - से एक पुत्र श्री मेहर अली सोख्ता (आर्य समाजी नेता)

(घ.)  ईरान की वेश्या - से मुहम्मद अली जिन्ना

(ङ.)  नौकरानी (रसोइन) से शेख अब्दुल्ला (कश्मीर के मुख्यमंत्री). शेख अब्दुल्लाह के दो पुत्र फारूक अब्दुल्ला, पुत्र उमर अब्दुल्ला

नेहरु ने देश के तीन टुकड़े किये थे। इंडिया (इंदिरा के लिए, पाकिस्तान। अपने आधे भाई जिन्ना के लिए, और कश्मीर (अपने आधे भाई शेख अब्दुल्लाह के लिए)। अरे वाह एक ही परिवार तीनो जगह सियासत भाई मानना पड़ेगा नेहरु के दिमाग को !!!

यह वही नेहरु है जिनके मुह बोले पिता मोतीलाल के दादा गयासुद्दीन गाजी जमुना नहर वाले जो बाद में चम्पत हो गए थे 1857 की म्युटिनी में और जाकर छुप गए कश्मीर में। जहाँ अपना नाम परिवर्तित किया था गयासुद्दीन गाजी से पंडित गंगाधर नेहरु नया नाम और सर पर गाँधी टोपी लगाये पहुच लिए इलाहबाद। लड़के को वकील बनाया और लगा दिया मुबारक अली की लॉ कंपनी में।

एम के सिंह कि पुस्तक “Encyclopedia of Indian War of Independence” (ISBN:81-261-3745-9) के 13वे संस्करण में लेखक ने इसका विस्तार से उल्लेख किया है , लेकिन भारत सरकार हमेशा से इस तथ्य को छिपती रही है !

जवाहरलाल नेहरु का चरित्र।
टीवी चैनेलो पर कांग्रेस पार्टी के नेताओ को अक्सर ये आरोप लगते हुए सुना जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया ... लेकिन आज हम कांग्रेस के सबसे बड़े नेता कि वो सच्चाई बतायेंगे जिसे जान कर आपको इस नेता से नफरत होने लगेगा ... जवाहर लाल नेहरु की पत्नी कमला नेहरु को टीबी हो गया था ... उस जमाने में टीबी का दहशत ठीक ऐसा ही था जैसा आज एड्स का है ... क्योकि तब टीबी का इलाज नही था और इन्सान तिल तिल तडप तडपकर पूरी तरह गलकर हड्डी का ढांचा बनकर मरता था ... और कोई भी टीबी मरीज में पास भी नही जाता था क्योकि टीबी सांस से फैलती थी ... लोग पहाड़ी इलाके में बने टीबी सेनिटोरियम में भर्ती कर देते थे ...

नेहरु में अपनी पत्नी को युगोस्लाविया (आज चेक रिपब्लिक) के प्राग शहर में दुसरे इन्सान के साथ सेनिटोरियम में भर्ती कर दिया ... कमला नेहरु पुरे दस सालो तक अकेले टीबी सेनिटोरियम में पल पल मौत का इंतजार करती रही ... लेकिन नेहरु दिल्ली में एडविना बेंटन के साथ इश्क करते थे ... 

सबसे शर्मनाक बात तो ये है की इस दौरान नेहरु कई बार ब्रिटेन गये लेकिन एक बार भी वो प्राग जाकर अपनी धर्मपत्नी का हालचाल नही लिया ... नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को जब पता चला तब वो प्राग गये ... और डाक्टरों से और अच्छे इलाज के बारे में बातचीत की ... प्राग के डाक्टरों ने बोला की स्विट्जरलैंड के बुसान शहर में एक आधुनिक टीबी होस्पिटल है जहाँ इनका अच्छा इलाज हो सकता है ...

तुरंत ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने उस जमाने में 70 हजार रूपये इकट्ठे किये और उन्हें विमान से स्विटजरलैंड के बुसान शहर में होस्पिटल में भर्ती किये ... लेकिन कमला नेहरु असल में मन से बेहद टूट चुकी थी ... उन्हें इस बात का दुःख था की उनका पति उनके पास पिछले दस सालो से हालचाल लेने तक नही आया और गैर लोग उनकी देखभाल कर रहे है ... दो महीनों तक बुसान में भर्ती रहने के बाद 28 February 1936 को बुसान में ही कमला नेहरु की मौत हो गयी ... उनके मौत के दस दिन पहले ही नेताजी सुभाषचन्द्र ने नेहरु को तार भेजकर तुरंत बुसान आने को कहा था ... लेकिन नेहरु नही आया ... फिर नेहरु को उनकी पत्नी के मौत का खबर भेजा गया ... फिर भी नेहरु अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में भी नही आया ... अंत में स्विटजरलैंड के बुसान शहर में ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नेहरु की पत्नी कमला नेहरु का अंतिम संस्कार करवाया।

Love story:  आखिर क्या थी जवाहरलाल नेहरू और दिनेश नंदिनी डालमिया, मृदुला साराभाई, पद्मजा नायडू युवा संन्यासिन श्रद्धा देवी,  एडविना माउंटबेटन, औऱ कमला नेहरू के रिश्ते की सच्चाई ? जिनके लिए जवाहरलाल नेहरू ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था !!! 
नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर संदर्भ पढे 👇👇👇
https://rspngp.blogspot.com/2019/08/blog-post_30.html
http://www.newsgroundtv.com/detailsnews.php?n_id=4610

पुत्री इंदिरा प्रियदर्शिनी की रंगरेलियां:
पिछली नालायक सरकार ने इंदिरा गाँधी को एक बहुत ही जिम्मेदार, ताकतवर और राष्ट्रभक्त महिला बताया है कोंग्रेस जिसे भारत की माँ मानते है और INDIRA IS INDIA & INDIA IS INDIRA के नारे से चुनाव जीते गये है इतनाही ही नही इतिहास से अनिभिज्ञ आप हम भी इंदिरा को आयरन लेडी समझते हैं ... चलिए इसकी कुछ कडवी हकीकत से मैं भी आज आपको रूबरू करवातें है !!!

इंदिरा प्रियदर्शिनी ने नेहरू राजवंश को अनैतिकता की नयी ऊँचाई पर पहुचाया. बौद्धिक इंदिरा को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहाँ से जल्दी ही पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर निकाल दी गयी। उसके बाद उनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था। लेकिन गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें उसके दुराचरण के लिए बाहर कर दिया।

शान्ति निकेतन से बाहर निकाल जाने के बाद इंदिरा अकेली हो गयी। राजनीतिज्ञ के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और मां तपेदिक के कारण स्विट्जरलैंड में मर रही थी। उसके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया. फ़िरोज़ खान।मोतीलाल नेहरु के घर पर मेहेंगी विदेशी शराब की आपूर्ति किया करता था. फ़िरोज़ खान और इंदिरा के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए।

महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्री प्रकाश ने नेहरू को चेतावनी दी, कि फिरोज खान इंदिरा के साथ अवैध संबंध बना रहा था। फिरोज खान इंग्लैंड में था और इंदिरा के प्रति उसकी बहुत सहानुभूति थी। जल्द ही इंदिरा अपने धर्म का त्याग कर,एक मुस्लिम महिला बनी और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से उसकी शादी हो गयी। इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ने नया नाम ‪' मैमुना बेगम‬  ' रख लिया। उनकी मां कमला नेहरू इस शादी से काफी नाराज़ थी जिसके कारण उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी। नेहरू भी इस धर्म रूपांतरण से खुश नहीं था क्योंकि इससे इंदिरा के प्रधानमंत्री बनने की सम्भावना खतरे में आ गयी। तो, नेहरू ने युवा फिरोज खान से कहा कि अपना उपनाम खान से गांधी कर लो। परन्तु इसका इस्लाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन के साथ कोई लेना - देना नहीं था। वैसे फिरोज खान का सरनेम ' घांदी ' था जिसे नहेरु ने राजनीतिक फायद के चलते घांदी का गांधी बना दिया। यह सिर्फ एक शपथ पत्र द्वारा नाम परिवर्तन का एक मामला था, और फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया, हालांकि यह बिस्मिल्लाह शर्मा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों ने ही भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए नाम बदला था।

जब दोंनो भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह जनता को गुमराह करने के लिए रचा गया था। इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश को काल्पनिक नाम गांधी मिला। नेहरू और गांधी दोनों ‪‎फैंसी‬ नाम हैं। जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही इन लोगों ने अपनी असली पहचान छुपाने के लिए नाम बदले ...

के.एन. राव की पुस्तक नेहरू राजवंश (10:8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों को सामने रखा गया है। उसमें यह साफ़ तौर पर लिखा हुआ है कि संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक मुस्लिम का बेटा था। मोहम्मद युनूस जिसका जिक्र हाल ही मैं सुषमाजी ने संसद मैं किया था जो नेहरू को शराब और सुन्दरिया सप्लाई करता था।

एकदम दाएँ मोहम्मद युनूस  बीचमें Nicholas Roerich
दिलचस्प बात यह है कि एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजयगाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घर में ही हुआ था। मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था। संजय गांधी कि मौत आज भी रहस्यमय घटना है !  मोहम्मद यूनुस की पुस्तक व्यक्ति जुनून और राजनीति (Persons Passions and Politics) (ISBN-10: 0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है कि संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था।कक

बेटा संजय माँ इंदिरागांधी के सारे राज जानता था इसलिये प्लेनक्रेश करवा कर अपने ही कोख से जन्मे पुत्र को अपने रास्ते का कांटा समज कर हटवा दिया।

मोहमद युनुस - इंदिरागांधी

मोहम्मद युनुस की संतान, आदिल शहरयार,  (राजीव की माँ मैमुना उर्फ़ इंदिरा के बेटे संजय का असली बाप) का बेटा था, आदिल शहरयार इंदिरा गांधी के निजी सहायक मोहम्मद युनुस का बेटा था उसका लालन - पालन इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे की तरह ही हुआ था। शहरयार अमेरिका गया लेकिन वहां जाकर वह अपराध जगत का हिस्सा बन गया।

आदिल शहरयार

30 अगस्त 1981 को आदिल मियामी के एक होटल में पकड़ा गया था। उसके ऊपर आगजनी में शामिल होने का आरोप था। पकड़े जाने पर जब अमेरिकी प्रशासन ने आदिल के बारे में छानबीन शुरू की तो पता चला कि वह ड्रग रैकेट का हिस्सा भी है। उसके कई और अपराध सामने आये और अमेरिका न्यायालय ने उसे ' खतरनाक मुजरिम ' की श्रेणी में रखा और उसे 35 साल की सजा सुनाई गयी। आदिल शहरयार को 1981 में अमरीकी अदालतों ने जलयान में फायरबोम्ब लगाने के अपराध में 35 वर्ष कैद की सजा सुनाई थी ... जिसमें 10 वर्ष की कैद भुगतने से पहले पैरोल मिलने की भी सुविधा नहीं थी। 
https://www.indiaspeaksdaily.com/rajiv-gandhi-allowed-warren-anderson-to-flee-in-a-quid-pro-quo-pact/

1985 में अपनी अमरीका यात्रा में राष्ट्रपति रोनाल्ड रिगन से भेंट के दौरान राजीव गांधी ने आदिल शहरयार (सच्चाई में सगे सौतेले भाई) की रिहाई के बदले एंडरसन (भोपाल गैस कांड के समय यूनियन कार्बाइड का अध्यक्ष) https://www.bbc.com/hindi/india-42208300 को सेफ पैसेज देने की अनैतिक डील की थी। इसके बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति ने आदिल शहरयार की 35 साल की सज़ा को माफ़ कर दिया था।

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA द्वारा ये स्वीकारा जा चूका है की राजीव गांधी ने अपने दोस्त (सच्चाई में सौतेले भाई) आदिल शहरयार को अमेरिका की जेल से छुड़ाने के लिए एंडरसन को भारत से जाने देने का सौदा किया था।

CIA की एक रिपोर्ट से उजागर हुआ है कि भारत सरकार ने एंडरसन के बदले में आदिल शहरयार को वापस मांगा था। यह रिपोर्ट 2002 में डिक्लासीफाईड की जा चुकी है। CIA की ही रिपोर्ट में यह खुलासा भी होता है कि मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह दिल्ली के आदेशों का पालन कर रहे थे। अर्जुनसिंह ने अपनी आत्मकथा ‘ए ग्रेन ऑफ सैंड इन दि आवरग्लास ऑफ टाइम ' इस बात की पुष्टि कर एंडरसन को भगाने की स्वीकृति दी है। https://www.bhaskar.com/news/nat-nan-story-of-bhopal-gas-tragedys-accused-warren-anderson-left-india-5082019-pho.html

कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक  "The life of Indira Nehru Gandhi (ISBN 9780007259304)" में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है। 
  • यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्ति निकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था। (जो उजागर होने पर इंदिरा गांधी को शान्ति निकेतन से बहार निकला गया था) •बाद में वह एमओ मथाई, 
  • पिता नहेरु के सचिव धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा का योग शिक्षक के साथ 
  • और पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई। 
  • नहेरु के प्राइवेट सेक्टरी M O मथाई ने स्वयं स्वीकार किया था कि ' मेरे और इंदिरा के 12 बर्षों के सेक्स संबंध उसी दिन ख़त्म हो गए, जिस दिन मैंने उसे दूसरे मर्द के साथ देखा http://bhartinews.xyz/news/m-o-mathai-exposed-indira-gandhi-reminiscences-of-the-nehru-age.html 
  • http://bhartinews.xyz/news/m-o-mathai-exposed-indira-gandhi-reminiscences-of-the-nehru-age.html 
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया अपनी पुस्तक " Profiles & Letters " (ISBN: 8129102358) में किया। यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी। नटवरसिंह एक IFS अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे। दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद इंदिरा गांधी को शाम में सैर के लिए बाहर जाना था। कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद, इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया था। अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही। अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी। यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके खड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे। जब इंदिरा ने अपनी इबादत समाप्त कर ली तब वह मुड़कर नटवर से बोली आज मैंने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया ( Today we have had our brush with history)।
यहाँ आपको यह बता दें कि बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ है। इतने सालों से भारतीय जनता इसी धोखे में है कि नेहरु एक कश्मीरी पंडित था ... जो की सरासर गलत तथ्य है ... इस विषय में कंई तथ्यात्मक रहस्योद्घाटन समय समय पर प्रकाशित होते रहे है। इसके चलते इंदिरागांधी को जगन्नाथपुरी समेत कंई हिन्दू मंदिरों में प्रवेश निषेध किया था।

बेटा संजय (संजीव) और राजीव 
संजय गाँधी के कई लड़कियों के साथ सम्बन्ध थे जिनमे एक तत्कालीन मंत्री की पुत्री का नाम प्रमुख था जिसके साथ संजय के सम्बन्ध जग जाहिर थे दोनों सारी सारी रात दिल्ली के होटलों में साथ में दिखाई देते थे पर संजय ने इस लड़की का साथ कुछ दिन मौज मनाई और फिर उसको धुध में पड़ी मक्खी की भांति अपने जीवन से बाहर फेंक दिया उस लड़की ने आत्महत्या कर ली और उस घटना से विचलित हो कर वो मंत्री अपना मानसिक संतुलन ही खो बैठा और पागल हो गया। फिर मेनका नामक लड़की से इसका प्रेम प्रसंग चला जो इंडियन आर्मी के एक बहुत ही वरिष्ठ अधिकारी की पुत्री थी और इसके साथ भी उसने खूब मौज मनाई जब इसने उसे भी छोड़ना चाहा तब बहुत बवाल हुआ और सेना ने बगावत की चेतावनी दी तब मजबूरन उसकी माँ को मेनका और संजय की शादी करनी पड़ी

मेनका जो कि एक सिख लडकी थी, संजय गाँधी की रंगरेलियों की वजह से गर्भवती हो गईं थीं और फिर मेनका के पिता कर्नल आनन्द ने संजय को जान से मारने की धमकी दी थी, फिर उनकी शादी हुई और मेनका का नाम बदलकर मानेका किया गया, क्योंकि इन्दिरा गाँधी को मेनका नाम पसन्द नहीं था (यह इन्द्रसभा की नृत्यांगना टाईप का नाम लगता था), पसन्द तो मेनका, मोहम्मद यूनुस को भी नहीं थी क्योंकि उन्होंने एक मुस्लिम लडकी संजय के लिये देख रखी थी । फिर भी मेनका कोई साधारण लडकी नहीं थीं, क्योंकि उस जमाने में उन्होंने बॉम्बे डाईंग के लिये सिर्फ एक तौलिये में विज्ञापन किया था । आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि संजय गाँधी अपनी माँ को ब्लैकमेल करते थे और जिसके कारण उनके सभी बुरे कृत्यों पर इन्दिरा ने हमेशा परदा डाला और उसे अपनी मनमानी करने की छूट दी । ऐसा प्रतीत होता है कि शायद संजय गाँधी को उसके असली पिता (मोहम्मद यूनुस ) का नाम मालूम हो गया था और यही इन्दिरा की कमजोर नस थी, वरना क्या कारण था कि संजय के विशेष नसबन्दी अभियान (जिसका मुसलमानों ने भारी विरोध किया था) के दौरान उन्होंने चुप्पी साधे रखी, और संजय की मौत के तत्काल बाद काफी समय तक वे एक चाभियों का गुच्छा खोजती रहीं थी, जबकि मोहम्मद यूनुस संजय की लाश पर दहाडें मार कर रोने वाले एकमात्र बाहरी व्यक्ति थे ...


अब कुछ राजिव गाँधी के बारे मैं
उच्च शिक्षा के कितने संस्थानों के नाम इस परिवार और इनके चापलूसों ने राजीव गाँधी के नाम पर रख दिए, इसकी गिनती करना तो बहुत मुश्किल काम है! लेकिन अपने जीवन में राजीव गाँधी खुद एक कम क्षमता और पढ़ाई कमज़ोर था। 1962 से 1965 तक उसने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में एक यांत्रिक अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया था! लेकिन उसने डिग्री के बिना कैम्ब्रिज छोड़ दिया क्योंकि वह परीक्षा पास नहीं कर सका। 1966 में अगले वर्ष, वह इंपीरियल कॉलेज, लंदन में दाखिल हुआ, लेकिन फिर से डिग्री के बिना छोड़ दिया।

के. एन. राव ने अपनी पुस्तक में साफ़ कहा कि राजीव गांधी सानिया मैनो से शादी करने के लिए एक कैथोलिक बन गया और अपना नाम रखा गया रॉबर्टो। उसके बेटे का नाम RAUL है और बेटी का नाम BIANCA है।

काफी चतुराई से ही नाम राहुल और प्रियंका के रूप में भारत के लोगों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।

व्यक्तिगत आचरण में राजीव बहुत ज्यादा एक मुगल की ही तरह था।

15 अगस्त 1988 पर वह लाल किले से अपने भाषण में बोलता है ...
हमारा उद्देश्य इस देश को उन ऊँचाइयों पर ले जाना है जहाँ ये 250-300 साल पहले था।
(ये तब कि बात है जब औरंगजेब का शासन था, नंबर एक मंदिर विध्वंसक)
अब एक और धूर्तता देखिये !

भारत में प्रधानमंत्री बनने के बाद ब्रिटेन में हुई एक प्रेस कोंफ्रेंस में राजीव गाँधी ने दावा किया कि वो हिन्दू नहीं बल्कि पारसी है।

अब फिरोज़ खान के पिता (राजीव के दादा) गुजरात के जुनागड़ के एक मुस्लिम महाशय थे! पंसारी का काम करने वाले इस मुस्लिम से एक पारसी महिला से शादी कि थी उस महिला को इस्लाम कबूल करवा के, शायद यही से ही राजीव ने अपनी ये पारसी होने कि काल्पनिक कहानी घडी थी, वैसे इसके पुरखों में कोई भी पारसी नहीं रहा और राजीव का अन्तिम संस्कार पुरे भारत के सामने हिन्दू विधि विधान से हुआ है।

साला चक्कर क्या है इस परिवार का अब सोनिया गाँधी के चरित्र पर प्रकाश डालते हैं। 

डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी लिखते हैं कि इस सोनिया गाँधी का नाम अन्तोनिया मायनो था और उसका बाप इटली के कुख्यात फासिस्ट शासन का एक कार्यकर्ता था और उसने रूस में पांच साल के कारावास भोगा।

सोनियागाँधी ने हाई स्कूल से ज्यादा शिक्षा तक प्राप्त नहीं की है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय परिसर के बाहर अंग्रेजी का ज्ञान देने वाली एक छोटे से स्कूल लेंनोक्स स्कूल से उसने थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीखी और अब उसे ही कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक हुआ बताती है। थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीखने के बाद उसने कैम्ब्रिज में एक होटल में वेट्रेस का काम किया।

इंग्लैंड में सोनिया गाँधी कि माधव राव सिंधिया के साथ बहुत गहरी दोस्ती थी जोकि उसकी शादी के बाद तक चली। 1982 में एक बार रात को 2 बजे दोनों एक ही कार में साथ साथ पकडे गए थे जब आई.आई.टी. दिल्ली मेन गेट के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी। 

जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, तब प्रधानमंत्री सुरक्षा बल नई दिल्ली और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर आया जाया करते थे जहाँ से भारत के मंदिर की कीमती मूर्तियां, प्राचीन वस्तुएँ, पेंटिंग्स क्रेट में भरकर रोम भेज दी जाती थी। पहले मुख्यमंत्री और बाद में केंद्रीय मंत्री रहे अर्जुन सिंह इस लूट का पूरा आयोजन किया करते थे। सीमा शुल्क से बचते हुए बिना कोई कस्टम ड्यूटी दिए, इटली में पहुंचा दी जाती थी। ये सारा खजाना सोनिया गांधी की बहन अलेस्संद्र माइनो विंची के स्वामित्व वाली दो दुकानों में मुफ्त के भाव बेच दिया जाता था। जिनके नाम क्रमश एत्निका और गणपति थे। 

अब ज़रा इस परिवार के अन्दर के षड्यंत्रकारियों और सत्ता हथ्याने की उनकी चालाकियों के बारे में जान लिया जाये। इंदिरा गाँधी को बेशक गोलिया मरी गयी थी लेकिन उनकी मृत्यु उनके दिल या दिमाग को गोलियां द्वारा बेधने से नहीं हुई, बल्कि बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण हुई थी। जब इंदिरा गाँधी को गोली लग चुकी थी तब सोनिया गाँधी ने अजीब व्यवहार करते हुए बजाय इंदिरा को एम्स ले जाने के (जहाँ इस तरह कि घटनाओ से निपटने के लिए प्रोटोकॉल था), बल्कि उसकी विपरीत दिशा में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में ले जाने पर जोर दिया। और बाद में अपना मन बदलते हुए फिर से फैसला बदला और इंदिरा को एम्स लाया गया। इस बीच करीब 24 मिनट बर्बाद हुए ...

जब एक एक सेकण्ड मौत करीब आ रही हो तब 24 मिनट की कीमत शायद सोनिया अच्छे से जानती थी !!!

अब ये तो भगवान ही जानते होंगे कि ये सोनिया की मुर्खता थी या अपने पति को सत्ता दिलवाने के लिए की गयी चालाकी। अच्छा अब जरा इस पर ध्यान दें।

राजेश पायलट और माधव राव सिंधिया प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार थे और वे सोनिया गांधी की सत्ता के रास्ते में रोड़ा थे. दोनों की ही रहस्यमय दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई! इस बात की और इशारा करने वाले भी पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं कि माइनो परिवार (सोनिया गाँधी का इटालियन परिवार, जिसमे इटालियन माफिया भी शामिल है) ने ही राजीव गांधी की हत्या के लिए लिट्टे समुदाय को अनुबंधित किया।

आजकल, सोनिया गांधी MDMK, PMK और DMK द्रमुक जैसे पार्टियों के साथ राजनीतिक गठबंधन करती है जो राजीव गांधी के हत्यारों की प्रशंशा करने में नहीं शर्माते थे। कम से कम एक भारतीय विधवा तो ऐसा कभी नहीं करेगी।

राजीव की हत्या में सोनिया की भागीदारी के लिए एक जांच की जानी चाहिए !!!


विस्तार से जानने के लिए आप डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुस्तक “Assassination Of Rajiv Gandhi — Unasked Questions and Unanswered Queries” (ISBN : 81-220-0591-8) पढ़ सकते हैं!. यह इस तरह के षड्यंत्र का संकेत करती है।

राजीवगांधी औऱ इटालियन बारबाला एंटोनियो माइनो सोनिया का विवाह और प्रणय संबंध जग जाहिर है। राजीव गाँधी ने, तूरिन (इटली) की महिला सानिया माईनो से विवाह करने के लिये अपना तथाकथित पारसी धर्म छोडकर कैथोलिक ईसाई धर्म अपना लिया था। राजीव गाँधी बन गये थे रोबेर्तो और उनके दो बच्चे हुए जिसमें से लडकी का नाम था “बियेन्का” "BIANCA" और लडके का “रॉल” "ROUL"। बडी ही चालाकी से भारतीय जनता को बेवकूफ़ बनाने के लिये राजीव-सोनिया का हिन्दू रीतिरिवाजों से पुनर्विवाह करवाया गया और बच्चों का नाम “बियेन्का” से बदलकर प्रियंका और “रॉल” से बदलकर राहुल कर दिया गया ... बेचारी भोली-भाली आम जनता !

सोनिया का काला सच्च बहोत कम लोग जानते है : सोनिया गांधी के रहस्योद्घाटन करने वाली Maloy Krishna Dhar की पुस्तक ' Open Secrets: India's Intelligence Unveiled ' की पुस्तक में इस विषय पर सविस्तार सोनियागांधी द्वारा नहेरुवंश के राजकुमार राजीवगांधी को मोहजाल में फसाकर भारतिय राजनीति में घुसकर भारत को बर्बाद करने और धर्मांतरण करने के पीछे वेटिकन के पॉप ओर रशियन जासूसी संस्था KGB का पर्दाफाश किया है। इस विषय मे कुछ अंश नीचे दी गई लिंक से पढ़ सकते है।

Sonia Gandhi is a plant of KGB, ISI and POPE in India Maloy Krishna Dhar his book Open Secrets and other public secrets. "We know nothin ...
unknownpossible.blogspot.com

जिसे पढ़ने समझने के बाद आप देशभक्त समज जायेंगे की मोदीजी ने ' कोंग्रेसमुक्त भारत ' बनाने का अभियान के क्यों उठाया है !!!

राजीवगांधी की हत्या मानव बम RDX विस्फोट के पश्चात क्षतविक्षत मानव अंगों से राजीव गाँधी की बॉडी की पहचान के लिए राहुल गाँधी का DNA टेस्ट के लिए सोनिया ने मना कर दिया था, तब प्रियंका का सैंपल लिया गया था। तो 

रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका की शादी सन 1997  में हुई थी। लेकिन अगर कोई रॉबर्ट को ध्यान से देखे तो यह बात सोचेगा कि सोनिया ने रॉबर्ट जैसे कुरूप और साधारण व्यक्ति से प्रियंका की शादी कैसे करवा दी ?
  • क्या उसे प्रियंका के लिए कोई उपयुक्त वर नहीं मिला ???
  • और यह शादी करवानी ही थी तो जल्दी में और चुप चाप क्यों की गयी ???
वास्तव में सोनिया ने रॉबर्ट वाड्रा से प्रियंका की शादी अपनी पोल खुलने के डर से की थी। क्योंकि जिस समय ‪सोनिया ‬ इंगलैंड में एक कैंटीन में ‪‎बारगर्ल ‬थी ... उसी समय उसी बार में रोबट वाड्रा की माँ ‪मौरीन‬ (Maureen) भी यही कामकरती थी मौरीन को ‪‎सोनिया और माधवराव सिंधिया‬ की रास लीला की बात पता थी, जब वह उसी कैंटीन सोनिया उनको ‪शराब पिलाया करती‬ थी। मौरीन यह भी जानती थी कि किन किन लोगों के साथ सोनिया के अवैध सम्बन्ध थे। जब सोनिया राजीव से शादी करके दिल्ली आ गयी, तो कुछ समय बाद मौरीन भी दिल्ली में बस गयी। मौरीन जानती थी कि सोनिया सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है, क्योंकि जो भी व्यक्ति उसके खतरा बन सकता था सोनिया ने उसका पत्ता साफ कर दिया, जैसे संजयगांधी , माधवराव सिंधिया, राजेश पायलेट, जितेन्द्र प्रसाद, योगी, यहाँ तक लोगों को यह भी शक है कि राजीव की हत्या में सोनिया का भी हाथ है, वर्ना वह अपने पति के हत्यारों को माफ़ क्यों कर देती ???

चूँकि मौरीन का पति और रॉबर्ट का पिता राजेंदर वाड्रा पुराना जनसंघी था, और सोनिया को डर था कि अगर अपने पति के दवाब ने मौरीन अपना मुंह खोल देगी तो मुझे भारत पर हुकूमत करने और अपने ‪‎नालायकु-कुपुत्र राहुल‬ को प्रधानमंत्री बनाने में सफलता नहीं मिलेगी इसीलिए ‪‎सोनिया ने मौरीन के लडके रॉबर्ट की शादी प्रियंका से करवा कर अपना रास्ता साफ कर दिया।

शादी के बाद-की कहानी :
राजेंद्र वाड्रा के दो पुत्र, रिचार्ड और रॉबर्ट और एक पुत्री मिशेल थे। और प्रियंका की शादी के बाद सभी एक एक कर मर गए या मार दिए गए। 
  • जैसे ‎मिशेल‬  (Michelle) सन 2001 में ‪‎कार दुर्घटना‬ में मारी गयी।
  • ‎रिचार्ड ‬ (Richard) ने सन 2003 में ‪‎आत्महत्या‬ कर ली।
  • और प्रियंका के ‪ससुर‬  सन 2009 में एक ‪मोटेल‬ में मरे हुए पाए गए थे। लेकिन इनकी मौत के कारणों की कोई जाँच नहीं कराई गयी।
  • और इसके बाद सोनिया ने रॉबर्ट को राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के बराबर का दर्जा SPG इनाम के तौर पर दे दिया।
मित्रो इस रॉबर्ट को कोई पडोसी भी नहीं जानता था। उसने ‪‎मात्र तीन वर्षों‬ में करोड़ों की संपत्ति ‬ कैसे बना ली ??? और कई कंपनियों का मालिक बन गया। साथ ही सैकड़ों एकड़ कीमती जमीनें भी हथिया ली

यहाँ आपको यह बता दे की बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ. इतने सालो से भारतीय जनता इसी धोखे मेंहै की नेहरु एक कश्मीरी पंडित था ...
जो की सरासर गलत तथ्य है ...

इस तरह इन नीचों ने भारत में अपनी जड़ें जमाई जो आज एक बहुत बड़े वृक्ष में तब्दील हो गया है जिसकी महत्वाकांक्षी शाखाओं ने माँ भारती को आज बहुत जख्मी कर दिया हैं यह हमारा एक प्रयास है कि आज इस सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही मगर हकीकत से रूबरू करवा सकें !!! बाकी देश के प्रति यदि आपकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती हो, तो अब आप लोग निःशब्द ना बनियेगा इसे फैला दीजिए हर घर में !!!

साथीयों हमने यह ब्लॉग पोस्ट मृत या जीवंत व्यक्तियों के चरित्रहनन या द्वेष भावना से नही लिखी है। उपरोक्त जानकारी पहले से सार्वजनिक हुई है, इसमें नया कुछ नही है। इसी जानकारी को संकलित कर यहाँ प्रस्तुत किया है। इसके पीछे एकमात्र उद्देश्य वांचको के समक्ष भारत की गौरवशाली संस्कृति ओर संसाधनों को अपनी जागीर समज कर दोहन करनेवाले गद्दारों के काले करतूतों को उजागर करना है। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो ‪‎कृप्या शेयर करना न भूलें‬।

संकलित साभार
🙏🙏🙏

वंदे मातरम्!

Comments

Unknown said…
Hllo ab pata chala conggress ka itiyas yeh ek mouslmano ko badnamm karne ki sajish me yeh chat;s likhte same tumhare hath nahi dukhe
अति सूंदर.नंगा कर दिए पूरे के पूरे
Pooja said…
Very useful blog on Life Story Of Rajiv Gandhi In Hindi Keep share more information on it
sameer said…
Jo Log khud fake hote hain, unko har koi fake hi lagta hai.
Unknown said…
100 percent fake hai
Ajay Soni said…
अगली बार कुछ और मसालेदार जायके में पेश करना शायद मजा जाये। कोई शक नहीं प्रयास बेहतर था। सारा कुछ इंटरनेट पर ही पड़ा है। थोड़ा सा अपना दिमाग भी लगाओ।
Gandhi family has betrayed India for 50 years n more. All Gandhi family should be thrown out of India



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