तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा।

यह नारा बुलंद करने वाले आझाद हिंद फौज के सेनापति, महामना नेताजी सुभाषचंद्र बोस के 121 वे जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेरों बधाइयां।

आओ आज हम सब साथ मिलकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिन पर उनके जीवनकी प्रसिद्धि से दूर कुछ अनसुनी झलकियां जान - समजकर उनके कर्मयोग को याद कर उनके जन्मदिन पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पण करें। 

महापुरुषों के जन्मदिन पर उन्हें याद कर केवल फोटो और शाब्दिक श्रद्धांजलि से आगे उनका जीवनकवन ही उन्के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस :
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, आज़ाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनानी

सुभाष चन्द्र बोस (बांग्ला: সুভাষ চন্দ্র বসু उच्चारण: शुभाष चॉन्द्रो बोशु, जन्म: 23 जनवरी 1897, मृत्यु: 18 अगस्त 1945 【अनसुलझी पहेली】) जो नेताजी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया।


नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जीवनकवन :

नीचे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के फ़ोटो के साथ उनके हस्ताक्षर वाली फ़ोटो।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सही

नेताजी सुभाषचंद्र बोस

जन्म : 23 जनवरी 1897
जन्मस्थान : कटक, ओडिशा
मृत्यु : 18 अगस्त 1945【अनसुलझी पहेली】
धार्मिक मान्यता : हिन्दू
जातीयता : बंगाली 
शिक्षा : बी०ए० (आनर्स)
शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय
राजनीति : अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1938)
राजनैतिक पार्टी : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1921–1940, फॉरवर्ड ब्लॉक 1939–1940
सुप्रीम कमाण्डर आज़ाद हिन्द फ़ौज
जीवनसाथी : एमिली शेंकल (1937 में विवाह किन्तु जनता को 1993 में पता चला)
संतान : अनिता बोस फाफ
माता-पिता : जानकीनाथ बोस, प्रभावती देवी
भाई : शरतचन्द्र बोस 
भतीजा : शिशिर कुमार बोस


नेताजी के क्रांतिकारी विचार :
1- ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आजादी मिले, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।
2- आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके ! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके !
3- तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा (नेताजी ने यह नारा 4 July, 1944  को बर्मा में भारतीयों के सामने दिए भाषण में दिया था।)
4- याद रखिये सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है।
5- एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की जरुरत होती है।
6- भारत में राष्ट्रवाद ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया है जो लोगों के अन्दर सदियों से निष्क्रिय पड़ी थी।
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था।
नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।
21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। नेताजी सुभाषचंद्र बोस उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया।
1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।
6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनायें माँगीं।
नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है और यह एक अनसुलझी गुत्थी बनकर रह गई है। जहाँ जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका जन्म दिन धूमधाम से मनाया जाता है वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे। यदि ऐसा नहीं है तो भारत सरकार ने उनकी मृत्यु से सम्बंधित दस्तावेज़ अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किये ?
16 जनवरी 2014 (गुरुवार) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने नेताजी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये स्पेशल बेंच के गठन का आदेश दिया है।
वर्तमान मोदी सरकार ने इस अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने का प्रयत्न भी शरू कर।दिया।है। लेकिन राजनीतिक दांवपेंच के चलते न जाने क्यों और कहाँ यह खोजबीन अटक कर रह गई है ???
हमारा मानना है कि राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले दल सुपिमकोर्ट पर दबाव बनाकर जस्टिस लोया के मौत की फाइल पुनः विचारणा के लिए खुलवा सकते है तो भारतमाता के महान सपूत  नेताजी सुभाषचंद्र बोस, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री, वैज्ञानिक डॉ होमी जहाँगीर भाभा, डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी, संजयगांधी जैसे कई महान व्यक्तिओ के मौत की अनसुलझी गुत्थियां सुलझना चाहिए।
यह पोस्ट और माहितीकी त्रुटियां के लिए क्षमापार्थी हूं। मेरे व्यकिगत अध्ययन एवं अन्य स्त्रोत से संकलित कर जनहित में प्रकाशित की है।


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