कांग्रेस में बौखलाहट की वजह P चिदंबरम नहीं, कुछ और ही है ...

कांग्रेस में बौखलाहट की वजह चिदंबरम नहीं, कुछ और ही है ... अब P चिदंबरम को बचाना कोंग्रेस की क्यों बहोत बड़ी मजबूरी बन गई है !!!

भारत सरकारके पूर्व वित्तमंत्री और गृहमंत्री रहे और वर्तमान राज्यसभा के सांसद कोंग्रेस के कदावर नेता पलानीयप्पन चिदंबरम की गिरफ्तारी एवं उन पर लग रहे आरोपों के विषय में इन दिनों सारे मीडिया पर इतना कुछ लिखा गया और बताया गया है कि जिसे पढ़-सुन-देखकर भारत के जागरूक नागरिकों की इस विषय पर PHD जितनी तैयारी हो गई होंगी! इसलिए इस विषय पर नया कुछ लिखना बोलना पुनरावर्तन साबित होंगा !

लेकिन इस घटनाक्रम में कोंग्रेस विवश होकर उनके बचाव में जो करो या मरो वाली 'मरणतोल' नौटंकी खेल रही है। यह पार्टी के भविष्य और अस्तित्व के लिये आखरी 'मरणतोल' प्रयास है। इतना ही नही अपने नेता राजीवगांधी की बहुप्रतीक्षित 75 जन्मजयंती को एकबाजू कर चिदंबरम कि गिरफ्तारी पर कोंग्रेस में इतना हायतौबा क्यों ?

कोंग्रेस की क्या मजबूरी है ???
वास्तवमें चिदंबरम के CBI के चारजसिटेड यह घोटाले तो समुद्र में तैरते दिखने वाले "हिमशैल बिंदु" "ICEBERG TIP" मात्र है जिसमे 10 प्रतिशत हिस्सा ही बाहर तैरता दिखता है 90 प्रतिशत समुद्र के अंदर डूबा हुआ रहता है। यह सारा हिमशैल जब बहार आयेगा, इन महाघोटालों और इसमें लिप्त राजनैतिक औऱ नौकरशाही के जब नाम उजागर होंगे तब भारतीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थतंत्र में भूचाल मच जायेगा!!!

जहाँ आम जनता न्याय पाने के लिये कोर्ट में अपना आयुष्य खपा देता है। वहाँ राजनीतिक रशूख रखनेवालों के लिए रातोरात कोर्ट खुल जाते है ! डेढ़ वर्ष से चल रहे कोर्ट केश में  चिदंबरम को 20-20 बार जमानत क्यों ? यह प्रश्न न्यायतंत्र पर भी उठना स्वाभाविक है।

घोटालों के इस महाहिमशैल के अंदरूनी भाग जो मीडिया में हाल में बहोत कम चर्चित है ... इसे पुन्ह उजागर करने का यहाँ प्रयास किया है।


चिदंबरम की काली करतूत का भयानक सत्य ये सज्जन एक किताब मे कर रहे है।  चिदंबरम ने नकली नोट Print वहा से करवाया जहा से पकिस्तान करवाता था।  उसे शिप से केरल मे उतरवाया  और Minority Community मे बटवा दिये ।    लगभग 100 कंटेनर था जो की देश की करेंसी का 26% था यानि 4 लाख करोड़ रुपये । यही मुख्य कारन है नोटबंदी का। Book Writer ने विस्तार से खुलासा किया है। इस बन्दे को ध्यान से सुने।

अब जब P चिदंबरम की CBI और ID जैसी जांच एजेंसियां अपने ढंग से पूछताछ करेगी तब काँग्रेस द्वारा किया गया विश्व का सबसे बड़ा घोटाला खुलना अभी बाकी है ... बहुत बड़े काँग्रेसी और ब्यूरोक्रैट्स पकड़े जायेंगे। इसलिये चिदम्बरम को बार -बार जमानत दी जा रही है। दुनिया का अबतक का सबसे बड़ा घोटाला खुलेगा 2019 के बाद जो शायद दुनिया में कहीं नहीं हुआ होगा और इस महाघोटाले का मुख्य अभियुक्त है चिदंबरम है या और कोई ???
  • क्यों किया गया मोदी सरकार द्वारा अचानक नोटबन्दी का फैसला और क्यों टूट गयी पाकिस्तान की अर्थव्यस्था ??? सबूत भी बाहर आयेंगे जाँच हो रही है ...
  • पीएम मोदी ने नोटबंदी करके इस घोटाले को रोक तो दिया, मगर उसके बाद यह बात निकल कर सामने आयी कि देश में बिलकुल असली जैसे दिखने वाले एक ही नंबर के कई नोट चल रहे थे। ये ऐसे नोट थे, जिन्हे पहचानना लगभग नामुमकिन था क्योकि ये उसी कागज़ पर छपे थे जिसपर भारत सरकार नोट छपवाती है।

"De La Rue" जो कि एक यूरोपीय कंपनी है, De La Rue India भारत की उनकी सिस्टर कम्पनी है। दुनिया का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंकनोट प्रिंटर और पासपोर्ट निर्माता और दुनिया भर में सरकारों, केंद्रीय बैंकों और वाणिज्यिक संगठनों की भागीदार है। De La Rue ने 1876 से भारत के साथ काम किया है, और इसने 1962 में होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में भारत की बैंकनोट पेपर मिल के निर्माण में भी सहयोग किया है। इसके साथ मिलकर तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम एक बड़ा खेल खेल रहे थे, जिसमें उनके एडिशनल सचिव अशोक चावला और वित्त सचिव अरविंद मायाराम भी शामिल थे।

अरविंद मायाराम         P चिदंबरम        अशोक चावला 
कैसा खेला गया घोटाले का खेल !!!
  • घोटाले का प्रारम्भ 2005 में तब हुई जब वित्त मंत्रालय में अरविन्द मायाराम वित्त सचिव के पद पर थे और अशोक चावला एडिशनल सचिव के पद पर थे।
  • कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद 2006 में सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) एक कंपनी बनाई गयी, जिसके मैनेजिंग डायरेक्टर अरविंद मायाराम थे और चेयरमैन अशोक चावला थे। यानी दो सरकारी अधिकारी अपने अपने पदों पर रहते हुए अतिरिक्त प्रभार में इस कंपनी को चला रहे थे।
  • इस प्रकार नियुक्तियों के लिए अपॉइंटमेंट्स कमिटी ऑफ़ कैबिनेट (ACC) के सामने विषय को रखकर उसके अनुमोदन की आवश्यकता होती है। किन्तु चिदंबरम ने भला कब नियम-कायदों की परवाह की जो अब करते ???
  • अर्थात् ACC के सामने इन नियुक्तियों का विषय लाया ही नहीं गया और ऐसे ही इनकी नियुक्ति कर दी गयी जो इस दृष्टि से पूरी तरह अवैध थी।
  • इसके बाद असली खेल शुरू हुआ। इस घोटाले में चिदंबरम के दायें व बायें हाथ बताये जाने वाले अशोक चावला व अरविंद मायाराम ने भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL), जो कि नोटों की छपाई का काम देखती है, उससे कहा कि उनकी कंपनी के साथ मिलकर सिक्योरिटी पेपर प्रिंटिंग के सप्लायर को ढूँढो जिसके बाद पहले से ब्लैकलिस्टेड की जा चुकी De La Rue कंपनी से नोटों की छपाई में इस्तमाल होने वाले सिक्योरिटी पेपर को लेना जारी रखा गया।
  • क्या इसके लिये चिदंबरम् को घूस दी गयी थी ? इस ब्रिटिश कंपनी द्वारा या पाकिस्तान के ISI द्वारा चिदंबरम को पैसा दिया जा रहा था ???
  • यह गंभीर जाँच का विषय है।
दरअसल वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान नकली मुद्रा रैकेट का पता लगाने के लिए सीबीआई ने भारत नेपाल सीमा पर विभिन्न बैंकों के करीब 70 शाखाओं पर छापेमारी की तो बैंकों से ही नकली करेंसी पकड़ी गयी।

जब पूछताछ की गयी तो उन बैंक शाखाओं के अधिकारियों ने सीबीआई से कहा कि जो नोट सीबीआई ने छापें में बरामद किये हैं वे तो स्वयं रिजर्व बैंक से ही उन्हें मिले हैं। यह एक बेहद गंभीर खुलासा था क्योंकि इसके अनुसार आरबीआई भी नकली नोटों के खेल में संलिप्त लग रहा था !

हालाँकि इतनी अहम खबर को इस देश की मीडिया ने दिखाना आवश्यक नहीं समझा क्योंकि उस समय कांग्रेस सत्ता में थी।
  • इस खुलासे के बाद CBI ने भारतीय रिजर्व बैंक के तहखानो में भी छापेमारी की और आश्चर्यजनक तरीके से भारी मात्रा में 500 और 1,000 रुपये के जाली नोट पकड़े गये।
  • आश्चर्य की बात यह थी कि लगभग वैसे ही समान जाली मुद्रा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा भारत में तस्करी से पहुँचाया जाता था।
  • अब प्रश्न उठा कि ये जाली नोट आखिर भारतीय रिजर्व बैंक के तहखानों में कैसे पहुँच गये ? आखिर ये सब देश में चल क्या रहा था ??
सुरक्षा अनुबंध
सरकार नकली नोटों को बंद करने के लिए समय-समय पर करंसी नोट पर सुविधाओं को बदलती रहती है। विशिष्ट विशेषताएं जो बदली जाती हैं, वे हैं मेटालिक थ्रेड, इंटेग्लियो इंक, वॉटरमार्क टेक्स्ट आदि। यह नियमित होनेवाली सामान प्रक्रिया है जो किसी भी देश की मुद्रा के साथ होता है। 2009 शैलभद्र बनर्जी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था ताकि यह तय किया जा सके कि क्या बदलाव होने वाले थे।

2010 में De La Rue एक आश्चर्यजनक रहस्योद्घाटन के साथ सामने आया कि सुरक्षा मुद्रण कागज (Security Printing Paper) की गुणवत्ता को कंपनी के कुछ कर्मचारियों द्वारा गलत माना गया था। वे SPP की आपूर्ति पर भारत सरकार के साथ सुरक्षा अनुबंध के उल्लंघन में थे, जिसके बाद भारत सरकार ने De La Rue को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला किया। इसके तुरंत बाद प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री बने। हालांकि, भारत ने तदर्थ (Ad hoc) आधार पर De La Rue से SPP (Security Printing Paper) प्राप्त करना जारी रखा।
  • जाँच के लिये शैलभद्र कमिटी 2010 में उस वक़्त चौंक गयी जब उसे ज्ञात हुआ कि भारत सरकार द्वारा ही समूचे राष्ट्र की आर्थिक संप्रभुता को दाँव पर रख कर कैसे अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी को 1 लाख करोड़ की छपाई का ठेका दिया गया था !!!
  • जाँच हुई तो ज्ञात हुआ कि De La Rue कंपनी में ही घोटाला चल रहा था। एक षड्यंत्र के तहत भारतीय करेंसी छापने में उपयोग होने वाले सिक्योरिटी पेपर की सिक्योरिटी को घटाया जा रहा था ताकि पाकिस्तान सरलता से नकली भारतीय करेंसी छाप सके और इसका उपयोग भारत में आतंकवाद फैलाने में किया जा सके !!!
  • इस समाचार के सामने आते ही भारत सरकार द्वारा De La Rue कंपनी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। मगर अरविन्द मायाराम ने इस ब्लैकलिस्टेड कंपनी से सिक्योरिटी पेपर लेना जारी रखा। इसे लेने के लिये उसने गृह मंत्रालय से अनुमति तक ली।
  • UPA 2 के दरम्यान 2011-12 में सरकार एक नया SPP (Security Printing Paper) आपूर्तिकर्ता खोजने के लिए ई-टेंडर जारी करने के लिए तैयार थी। 1 अगस्त 2012 तक, अरविंद मायाराम चिदंबरम के तहत आर्थिक मामलों के सचिव बन गए थे।
अब षड्यंत्र क्या हुआ !!!
अरविंद मायाराम अच्छी तरह से जानते हैं कि De La Rue को ब्लैकलिस्ट किया गया था, उनसे अभी तक SPP (Security Printing Paper) खरीदना जारी था। De La Rue के पास मुद्रा के लिए आवश्यक सुरक्षा थ्रेड currency thread जो करंसी नोटों में लगती है, इसका पेटेंट रखती है, और इसे भी ब्लैकलिस्टिंग के बावजूद De La Rue से खरीदा गया था। अरविंद मायाराम, शैलभद्र बनर्जी समिति के निष्कर्षों के तहत ई-टेंडर जारी होने के बावजूद De La Rue से SPP का आयात जारी रखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपने दम पर गृह मंत्रालय को लिखने का फैसला किया, गृहमंत्री से तीन साल की अवधि के लिए  से SPP के आयात की अनुमति देने की अनुमति मांगी। इस फाइल को चिदंबरम को इस तथ्य के बावजूद नहीं दिखाया गया था कि जब भी वित्त मंत्रालय ने De La Rue पर गृहमंत्री को लिखा था, गृहमंत्री ने वित्त मंत्री की मंजूरी मांगी थी। चिदंबरम द्वारा कहा गया कि यह फाइल को मुझे दिखाई ही नहीं गयी, ओर टेंडर प्रक्रिया हो गई। क्या बिना वित्तमंत्री PC चिदंबरम की अनुमति De La Rue से पुन्ह टेंडर पास करना शक्य हो सकता है।

जबकि यह बात मानने लायक ही नहीं क्योकि वित्त मंत्रालय से यदि गृहमंत्रालय को कोई भी पत्र भेजा जाता है तो पहले अनुमोदन के लिये वित्तमंत्री के सामने पेश किया जाता है।
  • De La Rue कंपनी से भारत को दिये जाने वाले सिक्योरिटी पेपर के सिक्योरिटी फीचर को कम किया जा रहा था। यह कंपनी पाकिस्तान के लिये भी सिक्योरिटी पेपर छापने का काम करती है। फिर यह आरोप लगा कि इस कंपनी द्वारा भारत का सिक्योरिटी पेपर पाकिस्तान को गुपचुप तरीके से दिया जा रहा था ताकि भारत के नकली नोट छापने में पाक को सरलता हो।
  • यहाँ पाक ISI का नाम सामने आया कि ISI की ओर से कंपनी के कर्मचारियों को घूस दी जाती थी। मगर इस खेल में अरविंद मायाराम क्यों शामिल थे ? क्यों वे ब्लैकलिस्टेड कंपनी से पेपर लेते रहे ??
  • यह भी सामने आया कि इस कंपनी से सिक्योरिटी पेपर काफी महँगे दाम पर खरीदा जा रहा था, यानी यह कंपनी देश को लूट रही थी और देश का वित्तमंत्रालय इस काम में विदेशी कंपनी की मदद कर रहा था !!!
  • 2014 में जब NDA सत्ता में आई तो नए गृह मंत्री राजनाथ सिंह के ध्यान में लाया गया कि भारत De La Rue से SPP खरीदना जारी रखे हुए था। यह निर्णय तुरंत उलट गया और 2015 से भारत ने अन्य स्रोतों से SPP प्राप्त करना शुरू कर दिया। 2015 में 2005 की कीमत से भी काफी कम दाम पर आपूर्ति हुई थी।
  • 2014 के बाद अरविंद मायाराम के आचरण को प्रधान मंत्री कार्यालय के ध्यान में लाया गया, जिसने एक गंभीर दृष्टिकोण लिया और मुख्य सतर्कता आयुक्त (CVC) के कार्यालय द्वारा जांच का आदेश दिया। राजीव उस समय CVC थे और CVC के कार्यालय ने वित्त मंत्रालय / आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) से फाइलें मांगीं। और उस पर कार्यवाही चालू हुई। पीएम मोदी ने जाँच करवाई और मायाराम के खिलाफ मुख्य सतर्कता आयुक्त और CBI द्वारा आरोप तय किये गये।
  • अरविंद मायाराम के इस काले कारनामे की खबर पीएमओ को हुई तो पीएमओ ने गंभीरतापूर्वक इस मामले को उठाया और मुख्य सतर्कता आयुक्त द्वारा इसकी जांच करवाई।*
  • मुख्य सतर्कता आयुक्त द्वारा वित्तमंत्रालय से इससे जुडी फाइल माँगी गयी। इस वक़्त वित्तमंत्री अरुण जेटली बन चुके थे। मगर इसके बावजूद वित्त मंत्रालय द्वारा फाइल देने में देर की गयी।
  • इसके बाद यह मामला पीएमओ से होता हुआ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संज्ञान में आया और फिर मोदी ने खुद एक्शन लिया। तब जाकर मुख्य सतर्कता आयुक्त के पास फाइल पहुँची।*
  • क्या जेटली ने फाइलें देने में देर करवाई या फिर कांग्रेसी चाटुकारों ने जो वित्त मंत्रालय तक में पैठ हैं ? उन्होंने इसमें देर करवाई ?? यह बात साफ़ नहीं हो पायी।*
  • नोटबंदी न करते मोदी तो नकली करेंसी का ये खेल चलता ही रहता। De La Rue से सिक्योरिटी पेपर लेना बंद किया गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने और पीएम मोदी ने की नोटबंदी, जिसके कारण पाकिस्तान द्वारा नकली करेंसी की छपाई बेहद कम हुई और यही कारण है कि कांग्रेस के दस वर्षों में आतंकवादी घटनाएँ जो आम हो गयी थीं, वे मोदी सरकार के काल में नहीं के बराबर हुईं।
  • कश्मीर के अलावा देश के किसी भी राज्य में बम ब्लास्ट नहीं हो पाये। आतंकियों तक पैसा पहुँचना जो बंद हो गया था।
  • जिस मायाराम के खिलाफ चार्ज फ्रेम किये गये हैं, उसी को राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त कर लिया। यानी एक घपलेबाज को अपना आर्थिक सलाहकार बना लिया।
  • वहीँ अशोक चावला का नाम चिदंबरम के एयरसेल-मैक्सिस घोटाले में भी सामने आया।
  • इसके बाद ने नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स के चेयरमैन व पब्लिक इंटरेस्‍ट डायरेक्‍टर पद से अशोक चावला को इस्तीफा देना पड़ा।
  • जुलाई 2018 में CBI ने चिदंबरम को एयरसेल-मैक्सिस मामले में आरोपी बनाया था। सीबीआई ने चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति और 16 अन्‍य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें आर्थिक मामलों के पूर्व केंद्रीय सचिव अशोक कुमार झा, तत्‍कालीन अतिरिक्‍त सचिव अशोक चावला, संयुक्‍त सचिव कुमार संजय कृष्‍णा और डायरेक्‍टर दीपक कुमार सिंह, अंडर सेक्रेटरी राम शरण शामिल हैं।
इस पूरे मामले से यह बात तो साफ़ हो जाती है कि चिदंबरम ने देश में केवल एक या दो नहीं बल्कि जहाँ-जहाँ से हो सका, वहां-वहां से देश को लूटा। चिदम्बरम व उसके बेटे कार्ति चिदंबरम ने मिलकर खूब लूटा और इस खेल में न केवल नौकरशाह शामिल रहे बल्कि न्यायपालिका में भी कई चिदंबरम भक्त बैठे हैं, जो आज भी उसे जेल जाने से बचाते आ रहे हैं।

सभी में लूट का माल मिलकर बँटता था और यदि चिदंबरम जेल गये तो सीबीआई व ईडी की कम्बल कुटाई उनसे एक दिन भी नहीं झेली जायेगी और वो सब उगल देंगे।

यदि ऐसा हुआ तो सभी जेल जायेंगे। यही कारण है कि चिदंबरम को हर बार अग्रिम जमानत दे दी जाती है। मगर यह भी तय माना जा रहा है कि, मोदी जी, इसबार चिदंबरम को जेल में डालना तय है और फिर कई अन्य गड़े मुर्दे भी बाहर आयेंगे। देश को कैसे-कैसे और किस-किस ने लूटा, सबको एक-एक करके सजा होगी। कांग्रेसी चाटुकार नौकरशाहों समेत माँ-बेटे व कई कांग्रेसी नेता सलाखों के पीछे पहुँचेंगे।

मीडिया से संकलन

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Comments

Anonymous said…
आपने कोंग्रेस की काली करतुते उजागर देश के सामने रखने का अति सरानीय कार्य किया है।
धन्यवाद !
कृपया पुस्तक तथा पुस्तक-लेखक का
नाम बतायें

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