दैवी संपदा ' मातृरूपेण '


आज अश्विन शुक्ल प्रथमा दिनांक 10.10.2018 बुधवार

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्मताम्॥

🕉 शक्ति उपासना का महापर्व नवरात्र महोत्सव 🕉
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#या_देवी_सर्वभूतेषु_मातृरूपेण_संस्थिता।
#नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमो_नमः॥

नवरात्र के पीछे की पौराणिक कथा से हम सब विदित है। #महिषासुर नामक असुर ने अपने सामर्थ्य से चारो तरफ #त्राहिमाम् बरता हुआ था। दैवी विचारों पर आसुरी शक्ति के बादल छा गये थे। हिम्मत हारे देवों ने #ब्रह्मा, #विष्णु और #महेश की आराधना किया। देवों की आराधना से प्रसन्न भगवान महिषासुर पर क्रोधित हुए। उनके पुण्यप्रकोप से एक #दैवीशक्ति निर्माण हुई। देवो ने इस दैवी शक्ति का जयजयकार कर उनका पूजन किया। और सबने अपने दिव्य आयुधों से दैवी शक्ति को मंडित किया। इस दैवीशक्ति ने नव नव दिन तक अविरत युद्ध के पश्चात महिषासुर का वध किया। आसुरी वृति का दमन कर दैवी संपत्तिकी पुन:स्थापना किया, देवों को अभयदान दिया यह दैवीशक्ति ही हमारी #माँ_जगद्जननी_जगदंबा।

नवरात्र के दिन याने शक्ति की उपासना के दिन। जगत में कोई भी नैतिक मूल्य केवल अच्छे है इससे टिकते नही है; परंतु उस का अस्तित्व बनाये रखने के लिये इसके पीछे समर्थ लोगों की तपश्चर्या का पीठबल आवश्यक है। जगत में तपश्चर्या को ही यश मिलता है - यह बात सत्य के उपासकों को नही भूलना चाहिए। " तपश्चर्या के बल से ही असत मूल्यों को विजय मिली है। " कमजोरो के सत्य, संस्कार, संस्कृति या नैतिकता को कोई मूल्य नही मिलता। यह कट्टू सत्य है।

इन दिनों में #माँ के पास सामर्थ्य की मांगकर आसुरी वृति पर विजय पाने की उपासना करना चाहिए। आज भी महिषासुर प्रत्येक मानव हर्दय में छुपा हुआ है; और आंतरिक एवं बाह्य दैवी वृति का दमन कर रहा है।
इस आसुरी वृति को पहचान कर उस पर विजय पाने के लिये दैवीशक्ति की आराधना करने के लिये नव नव दिनों तक अखंड दिप प्रागट्य कर माँ जगदंबा की पूजा कर उनसे शक्ति पाने के दिन ही #नवरात्र_महोत्सव है।

वेदों ने भी शक्ति उपासना का बहोत महत्व दिया है। हमारे शास्त्रों में बलोपासना और।शोर्यपूजन को अधिक महत्व दिया है:
#लभ्या_धरित्री_तव_विक्रमेण_ज्यायांश्च_वीर्यास्त्रबलैर्विपक्षः।
#अतः_प्रकर्षाय_विधिर्विधेयः_प्रकर्षतन्त्रा_हि_रणे_जयश्रीः। (किरातार्जुनीयम् ३/१७)
(अर्थात् : तुम्हे सामर्थ्यसे, पराक्रम से पृथ्वी जितना है। शत्रुपक्ष सामर्थ्य और शस्त्रबल में तुम्हारे से अधिक बलवान है। तुम्हे अधिक सामर्थ्यवान बनना है, क्योंकि जो अधिक।सामर्थ्यवान और साधनसम्पन्न रहते है वही युद्ध में विजयश्री को प्राप्त करते है।)
           
नवरात्रि पर्व सभी मित्रों एवं माँ के भक्तों को हार्दिक अभिनंदन के साथ ढेरों शुभकामनाएं।
(क्रमशः)   
जय श्री कृष्ण               
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