विभूति दर्शन ' श्री '
आज अश्विन शुक्ल द्वादशी दिनांक २१.१०.२०१८ रविवार
श्रीमद् भगवद्गीता के विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
#श्री का अर्थ है :
#लक्ष्मी_ऐश्वर्य_समृद्धि_सफलता_कुशल_सौभाग्य_संपन्नता_धन_प्रचुरता_यश_श्रेय_ख्याति_वैभव आदि है। ऐसे वैभव संपन्न व्यक्ति के नाम के आगे इस वैभव के सूचक #श्री_श्रीमंत_श्रीयुत_श्रीमान_श्रीमती जैसे सम्मानवाचक लगाया जाता है।
घर, जमीन, धन, वाहन, साधन संपत्ति, संस्कारी सुपुत्र, आत्यंतिक प्रेम करने वाली पत्नी, वफादार सेवक, सुख दुख में साथ देने वाले मित्र यह सभी ' श्री ' ' लक्ष्मी ' के स्वरूप है। यह यादी बहुत लंबी हो सकती है।
आज लक्ष्मी का अर्थ सिर्फ धन संपदा ही कीया जाता है। लेकिन धन संपदा विपुल मात्रा में हो और उसके उपभोग के लिए योग्य स्वास्थ्य न हो तो वह संपदा किस काम की ? आज संपूर्ण विश्व लक्ष्मी पूजन करता है। लेकिन क्या सभी अर्जित संपदा ' लक्ष्मी ' है ?
वेदों ने #श्रीसूक्तम् गाया है। उसके अनुसार लक्ष्मी के तीन प्रकार समझाए हैं।
#अलक्ष्मी, #लक्ष्मी और #महालक्ष्मी।
★ दुसरो को कष्ट देकर, षड्यंत्र रच कर, कपट से कमाया हुआ धन ' अलक्ष्मी ' हैं।
★ परिश्रम करके निष्ठापूर्वक कार्य करके, परिवार के लिए अर्जित किया गया धन, ' लक्ष्मी ' हैं।
★ निष्ठापूर्वक अर्जित धन का उपयोग प्रभु कार्य में किया जाए तो वह ' महालक्ष्मी ' कहलाता है।
#श्रीसूक्त् में वर्णित :
#अश्वापूर्वां_रथमध्यां_हस्तिनादप्रबोधिनीम्
जिसके आगमन से हाथीओं की चिंघाड से सारी दुनिया को मालूम पडे ऐसी रथ पर सवार होकर, जिसके आगे घोड़े दौडते हो, ऐसी लक्ष्मी मेरे घर पधारे।
लेकिन आज पिछले दरवाजे (Back Door) से चुपचाप लक्ष्मी घर मे आतीं हैं। व्यक्ति सामान्यं रूप से भयभीत रहता है। परंतु प्रभु भक्त निश्चिंत रहता है। गीताकार ने आश्वस्त किया है :
#अनन्याश्चिन्तयन्तो_मां_ये_जनाः_पर्युपासते।
#तेषां_नित्याभियुक्तानां_योगक्षेमं_वहाम्यहम्॥ (भ ग ९/२२)
(अर्थात् : जो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, मेरेमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंका योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूँ।
लक्ष्मी मैया के ऊपर हम कितना भी चिंतन करें, वह कम ही है। लेकिन लक्ष्मी माता पतिव्रता है। नारायण की उपासना करने से ही लक्ष्मी मैया प्रसन्न होतीं हैं। भला! पतिदेव को निमंत्रण दिए बगैर का पत्नी पधार सकतीं हैं ?
#महालक्ष्मी_च_विद्महे
#विष्णुपत्नी_च_धीमहि
#तन्नो_लक्ष्मीः_प्रचोदयात्॥
श्री की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी के चरणों मे यह भावपुष्प अर्पण है।
(क्रमशः)
जय श्री कृष्ण
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
कृपया नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर👇👇👇॥भगवत् कृपा॥ page Like & Follow करें : https://www.facebook.com/bhagwatkrupa/
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉
श्रीमद् भगवद्गीता के विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
#श्री का अर्थ है :
#लक्ष्मी_ऐश्वर्य_समृद्धि_सफलता_कुशल_सौभाग्य_संपन्नता_धन_प्रचुरता_यश_श्रेय_ख्याति_वैभव आदि है। ऐसे वैभव संपन्न व्यक्ति के नाम के आगे इस वैभव के सूचक #श्री_श्रीमंत_श्रीयुत_श्रीमान_श्रीमती जैसे सम्मानवाचक लगाया जाता है।
घर, जमीन, धन, वाहन, साधन संपत्ति, संस्कारी सुपुत्र, आत्यंतिक प्रेम करने वाली पत्नी, वफादार सेवक, सुख दुख में साथ देने वाले मित्र यह सभी ' श्री ' ' लक्ष्मी ' के स्वरूप है। यह यादी बहुत लंबी हो सकती है।
आज लक्ष्मी का अर्थ सिर्फ धन संपदा ही कीया जाता है। लेकिन धन संपदा विपुल मात्रा में हो और उसके उपभोग के लिए योग्य स्वास्थ्य न हो तो वह संपदा किस काम की ? आज संपूर्ण विश्व लक्ष्मी पूजन करता है। लेकिन क्या सभी अर्जित संपदा ' लक्ष्मी ' है ?
वेदों ने #श्रीसूक्तम् गाया है। उसके अनुसार लक्ष्मी के तीन प्रकार समझाए हैं।
#अलक्ष्मी, #लक्ष्मी और #महालक्ष्मी।
★ दुसरो को कष्ट देकर, षड्यंत्र रच कर, कपट से कमाया हुआ धन ' अलक्ष्मी ' हैं।
★ परिश्रम करके निष्ठापूर्वक कार्य करके, परिवार के लिए अर्जित किया गया धन, ' लक्ष्मी ' हैं।
★ निष्ठापूर्वक अर्जित धन का उपयोग प्रभु कार्य में किया जाए तो वह ' महालक्ष्मी ' कहलाता है।
#श्रीसूक्त् में वर्णित :
#अश्वापूर्वां_रथमध्यां_हस्तिनादप्रबोधिनीम्
जिसके आगमन से हाथीओं की चिंघाड से सारी दुनिया को मालूम पडे ऐसी रथ पर सवार होकर, जिसके आगे घोड़े दौडते हो, ऐसी लक्ष्मी मेरे घर पधारे।
लेकिन आज पिछले दरवाजे (Back Door) से चुपचाप लक्ष्मी घर मे आतीं हैं। व्यक्ति सामान्यं रूप से भयभीत रहता है। परंतु प्रभु भक्त निश्चिंत रहता है। गीताकार ने आश्वस्त किया है :
#अनन्याश्चिन्तयन्तो_मां_ये_जनाः_पर्युपासते।
#तेषां_नित्याभियुक्तानां_योगक्षेमं_वहाम्यहम्॥ (भ ग ९/२२)
(अर्थात् : जो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, मेरेमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंका योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूँ।
लक्ष्मी मैया के ऊपर हम कितना भी चिंतन करें, वह कम ही है। लेकिन लक्ष्मी माता पतिव्रता है। नारायण की उपासना करने से ही लक्ष्मी मैया प्रसन्न होतीं हैं। भला! पतिदेव को निमंत्रण दिए बगैर का पत्नी पधार सकतीं हैं ?
#महालक्ष्मी_च_विद्महे
#विष्णुपत्नी_च_धीमहि
#तन्नो_लक्ष्मीः_प्रचोदयात्॥
श्री की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी के चरणों मे यह भावपुष्प अर्पण है।
(क्रमशः)
जय श्री कृष्ण
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
कृपया नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर👇👇👇॥भगवत् कृपा॥ page Like & Follow करें : https://www.facebook.com/bhagwatkrupa/
Comments