विभूति दर्शन ' क्षमा '
आज अश्विन कृष्ण पक्ष तृतिया दिनांक २७.१०.२०१८ शनिवार
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
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श्रीमद् भगवद्गीता के विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेधा और धृति धैर्य का चिंतन हमने कीया, तत्पश्चात हम प्रभु के अद्भुत उपहार क्षमा का चिंतन करने का प्रयास करेंगे।
#क्षमा अर्थात् #FORGIVENESS बहुत बड़ी बात है।
क्षमा कौन कर सकता है ? जिसमें क्षमता CAPACITY हो। कोई भी कमजोर व्यक्ति किसी पहलवान को कहता है कि मैं तूझे क्षमा करता हूं तो यह हास्यास्पद लगता है।
क्षमा कौन कर सकता है ? जिसमें क्षमता CAPACITY हो। कोई भी कमजोर व्यक्ति किसी पहलवान को कहता है कि मैं तूझे क्षमा करता हूं तो यह हास्यास्पद लगता है।
#क्षमा_वीरस्य_भूषणं
एक सुन्दर पंक्ति जो बचपन से हमारे संस्कारों में है, ' क्षमा वीरस्य भूषणं ' यानि क्षमा वीरों का आभूषण है। इसका अर्थ हम निकालते आए हैं कि क्षमा करने वाला वीर होता है। इसी अर्थ ने क्षमा को बदनाम कर रखा है। क्षमा को उच्चतम आदर्श और सुंदरतम भाव मानते हुए भी अंतस में कहीं न कहीं हम इसे कायरता और अकर्मण्यता से जोड़ कर देखते है। इस विरोधाभास की वजह यह अर्थ है जो कहता है, क्षमा करने वाला वीर होता है।
एक सुन्दर पंक्ति जो बचपन से हमारे संस्कारों में है, ' क्षमा वीरस्य भूषणं ' यानि क्षमा वीरों का आभूषण है। इसका अर्थ हम निकालते आए हैं कि क्षमा करने वाला वीर होता है। इसी अर्थ ने क्षमा को बदनाम कर रखा है। क्षमा को उच्चतम आदर्श और सुंदरतम भाव मानते हुए भी अंतस में कहीं न कहीं हम इसे कायरता और अकर्मण्यता से जोड़ कर देखते है। इस विरोधाभास की वजह यह अर्थ है जो कहता है, क्षमा करने वाला वीर होता है।
क्षमा वीरस्य भूषणम का सही अर्थ है, क्षमा उसे ही शोभा देती है जो वीर है। आपका वीर होना आपको क्षमा कर सकने के लायक बनाता है। यदि आप प्रतिरोध इसलिए नहीं करते क्योंकि आप प्रतिरोध कर ही नहीं सकते तो यह कायरता है लेकिन चूँकि आप प्रेम को जीवन का आधार मानते है इसलिए प्रतिरोध नहीं करते, तो यह क्षमा है।
महाराष्ट्र के महान संत एकनाथ महाराज के जीवन का एक प्रसंग है। एक दिन प्रातः काल में एकनाथ महाराज गोदावरी नदी में स्नान करने गए। स्नान करके बाहर निकले तो एक दुष्ट व्यक्ति ने उन पर कुल्ला कर दिया। महाराज पुनः स्नान करने गए। उसने फिर से कुल्ला कर दिया। महाराज फिर से स्नान करने गए। इस प्रकार उसने 108 बार कुल्ला किया और उतनी बार महाराज ने शांतिपूर्वक स्नान किया। अंत में उस व्यक्ति को पछतावा हुआ। उसने महाराज के चरणों में गिर कर, उनसे क्षमा मांगी तब महाराज ने कहा कि तुम्हारे कारण आज मुझे 108 बार स्नान करने का पुण्य प्राप्त हुआ।
जैसे #क्षमा_करना यह सद्गुण और वीरतापूर्ण कार्य है ऐसे ही #क्षमा_मांगना भी वीरता का कार्य है, क्योंकि अपनी भूल का स्वीकार कोई भी व्यक्ति आसानी से नहीं करता। क्योंकि इसमें उसका अहंकार आडा आता है। क्षमा मांगना याने स्वयं का अहंकार छोडना।
जैन धर्म में क्षमापना की सुंदर व्यवस्था है। पवित्र पर्युषण पर्व के अंतिम दिन
#मिच्छामी_दुक्कडम कह कर सभी भाई बहन क्षमा प्रार्थना करते हैं। बिते हुए वर्ष में मुझसे मन, कर्म, वचन से जाने-अनजाने में, भूल से आपका दिल दुखाया हो, आपको हानि पहुंचाई हो उसके लिए मुझे क्षमा करें।
#मिच्छामी_दुक्कडम कह कर सभी भाई बहन क्षमा प्रार्थना करते हैं। बिते हुए वर्ष में मुझसे मन, कर्म, वचन से जाने-अनजाने में, भूल से आपका दिल दुखाया हो, आपको हानि पहुंचाई हो उसके लिए मुझे क्षमा करें।
#कर_चरण_कृतं_वाक्कायजं_कर्मजं_वा
#श्रवणनयनजं_वा_मानसं_वापराधम्।
#विहितमविहितं_वा_सर्वमेतत्क्षमस्वं
#जय_जय_करूणाब्धे_श्री_महादेव_शम्भो॥
हे परमेश्वर! मैंने हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण, नेत्र अथवा मन से अभी तक जो भी अपराध किए हैं। वे विहित हों अथवा अविहित, उन सब पर आपकी क्षमापूर्ण दृष्टि प्रदान कीजिए। हे करुणा के सागर भोले भंडारी नम: शिवाय आपकी जय हो। जय हो।
#श्रवणनयनजं_वा_मानसं_वापराधम्।
#विहितमविहितं_वा_सर्वमेतत्क्षमस्वं
#जय_जय_करूणाब्धे_श्री_महादेव_शम्भो॥
हे परमेश्वर! मैंने हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण, नेत्र अथवा मन से अभी तक जो भी अपराध किए हैं। वे विहित हों अथवा अविहित, उन सब पर आपकी क्षमापूर्ण दृष्टि प्रदान कीजिए। हे करुणा के सागर भोले भंडारी नम: शिवाय आपकी जय हो। जय हो।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
🎆 सुप्रभात 🎆
🙏🙏🙏🙏🙏
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🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
🎆 सुप्रभात 🎆
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