विभूति दर्शन मेधा-बुद्धि
आज अश्विन कृष्ण पक्ष प्रथमा दिनांक २५.१०.२०१८ गुरुवार
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
कीर्ति, श्री, वाणी और स्मृति का चिंतन हमने कीया, तत्पश्चात हम प्रभु के अद्भुत उपहार मेधा यानी बुद्धि का चिंतन करने का प्रयास करेंगे।
#मेधा : बातें समझने और स्मरण रखने की शक्ति - #बुद्धि, #मेधावी #Brilliance, #Intelligence
प्रभु का श्रेष्ठ और अनपुम उपहार ' मेधा - बुध्दि ' जो केवल मानव को ही मिली हुई है। बाकी प्राणियों को तो भगवान से केवल #सहज_प्रेरणा #Insting - सहज वृति ही मिली हुई है। भगवान ने केवल मानव को ही यह श्रेष्ठतम उपहार ' बुद्धि ' क्यों दी ? उनकी हमसे क्या आशा अपेक्षाएं होंगी ? क्या यह प्रश्न हमारे दिमाग मे कभी उठता है ? क्या केवल EAT, DRINK & BE MARRY क्या इसके लिये हमें बुद्धि प्रदान की होंगी ? वह कार्य तो प्रत्येक प्राणी मात्र करतें है। तो इस विषय मे उनकी ही दी हुई बुद्धिशक्ति से आज कुछ चिंतन करने का प्रयास करतें है।
श्रीमद्भगवगिता में भगवान ने बुद्धि की श्रेष्ठता के विषय मे कहा है :
#इन्द्रियाणि_पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः_परं_मनः।
#मनसस्तु_परा_बुद्धिर्यो_बुद्धेः_परतस्तु_सः॥ (भ ग ४/४२)
(अर्थात् : इन्द्रियोंको स्थूल शरीरसे पर (श्रेष्ठ) कहते हैं; इन्द्रियोंसे श्रेष्ठ मन है, मनसे भी पर बुद्धि है और जो बुद्धिसे भी पर है वह (आत्मा) है।) परमात्मा के अंश आत्मा के बाद सर्वश्रेष्ठ कोई है तो वह बुद्धि ही है।
शेर, चित्ते बाघ, भालू मानव से अधिक शक्तिशाली है। हाथी विशालकाय प्राणी है। मछली जन्म लेते ही तैरने लगती है। गाय का बछडा़ जन्म लेते ही अपने पैरों पर उछलने लगता है। एक मात्र मानव ही इन्ह सबसे कमजोर है। लेकिन मानव प्रभुदत्त बुद्धि का उपयोग कर, इन सबको अपने वश में कर सकता है।
वेदों ने कहा है #धीयो_विश्वा_विराजते। इस सृष्टि पर बुद्धि का राज है। बुद्धिमान व्यक्ति ही सृष्टि पर राज कर सकता है।
ऎसे सुन्दर और श्रेष्ठ उपहार का हम क्या उपयोग करते हैं ? भगवत् कार्य या भगवत् चिंतन को छोड़कर बाकी सभी कार्यों में लगाते हैं।
प्रभु ने कहा है "
#मय्येव_मन_आधत्स्व_मयि_बुद्धिं_निवेशय।
#निवसिष्यसि_मय्येव_अत_ऊर्ध्वं_न_संशयः॥ (भ ग १२/८)
(अर्थात् : तुम अपने मन और बुद्धि को मुझमें ही स्थिर करो, तदुपरान्त तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संशय नहीं है।)
विडंबना यह है कि हम भगवान को छोड़कर बाकी सभी जगह अपना मन और बुद्धि लगाने को तैयार हैं। तो यदि कोई हमें सुंदर उपहार देता है और हम उस उपहार का दुरुपयोग करते हैं, तो उसे कैसा लगेंगा ? स्वाभाविक है दुख ही होगा।
प्रभु #SUPREME_INTELLIGENCE है। मानवको उनकी दी हुई मन-बुद्धि रूपी बक्षिस को भगवत् कार्य, - भगवत् चिंतन मे नही वापरेंगे तो वे अगले जन्म में उसे वापस ले लेंगें, क्योंकि हमने उसका योग्य उपियोग ही नही किया था। यह भगवान का श्राप नही अपितु Evolution Theory उत्क्रांति के सिद्धांत तहत न्याय है।
इसीलिए श्रीमद्भगवगिता में भगवान ने कहा है : #माम्_अनुस्मर_युद्धय_च - अर्थात मेरा स्मरण करो, संसार में संघर्ष करो, युद्ध करो, और सफलता प्राप्त करो।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
❇ इदं न मम ❇
🙏🙏🙏🙏🙏
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🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉
श्रीमद् भगवद्गीता के विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
कीर्ति, श्री, वाणी और स्मृति का चिंतन हमने कीया, तत्पश्चात हम प्रभु के अद्भुत उपहार मेधा यानी बुद्धि का चिंतन करने का प्रयास करेंगे।
#मेधा : बातें समझने और स्मरण रखने की शक्ति - #बुद्धि, #मेधावी #Brilliance, #Intelligence
प्रभु का श्रेष्ठ और अनपुम उपहार ' मेधा - बुध्दि ' जो केवल मानव को ही मिली हुई है। बाकी प्राणियों को तो भगवान से केवल #सहज_प्रेरणा #Insting - सहज वृति ही मिली हुई है। भगवान ने केवल मानव को ही यह श्रेष्ठतम उपहार ' बुद्धि ' क्यों दी ? उनकी हमसे क्या आशा अपेक्षाएं होंगी ? क्या यह प्रश्न हमारे दिमाग मे कभी उठता है ? क्या केवल EAT, DRINK & BE MARRY क्या इसके लिये हमें बुद्धि प्रदान की होंगी ? वह कार्य तो प्रत्येक प्राणी मात्र करतें है। तो इस विषय मे उनकी ही दी हुई बुद्धिशक्ति से आज कुछ चिंतन करने का प्रयास करतें है।
श्रीमद्भगवगिता में भगवान ने बुद्धि की श्रेष्ठता के विषय मे कहा है :
#इन्द्रियाणि_पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः_परं_मनः।
#मनसस्तु_परा_बुद्धिर्यो_बुद्धेः_परतस्तु_सः॥ (भ ग ४/४२)
(अर्थात् : इन्द्रियोंको स्थूल शरीरसे पर (श्रेष्ठ) कहते हैं; इन्द्रियोंसे श्रेष्ठ मन है, मनसे भी पर बुद्धि है और जो बुद्धिसे भी पर है वह (आत्मा) है।) परमात्मा के अंश आत्मा के बाद सर्वश्रेष्ठ कोई है तो वह बुद्धि ही है।
शेर, चित्ते बाघ, भालू मानव से अधिक शक्तिशाली है। हाथी विशालकाय प्राणी है। मछली जन्म लेते ही तैरने लगती है। गाय का बछडा़ जन्म लेते ही अपने पैरों पर उछलने लगता है। एक मात्र मानव ही इन्ह सबसे कमजोर है। लेकिन मानव प्रभुदत्त बुद्धि का उपयोग कर, इन सबको अपने वश में कर सकता है।
वेदों ने कहा है #धीयो_विश्वा_विराजते। इस सृष्टि पर बुद्धि का राज है। बुद्धिमान व्यक्ति ही सृष्टि पर राज कर सकता है।
ऎसे सुन्दर और श्रेष्ठ उपहार का हम क्या उपयोग करते हैं ? भगवत् कार्य या भगवत् चिंतन को छोड़कर बाकी सभी कार्यों में लगाते हैं।
प्रभु ने कहा है "
#मय्येव_मन_आधत्स्व_मयि_बुद्धिं_निवेशय।
#निवसिष्यसि_मय्येव_अत_ऊर्ध्वं_न_संशयः॥ (भ ग १२/८)
(अर्थात् : तुम अपने मन और बुद्धि को मुझमें ही स्थिर करो, तदुपरान्त तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संशय नहीं है।)
विडंबना यह है कि हम भगवान को छोड़कर बाकी सभी जगह अपना मन और बुद्धि लगाने को तैयार हैं। तो यदि कोई हमें सुंदर उपहार देता है और हम उस उपहार का दुरुपयोग करते हैं, तो उसे कैसा लगेंगा ? स्वाभाविक है दुख ही होगा।
प्रभु #SUPREME_INTELLIGENCE है। मानवको उनकी दी हुई मन-बुद्धि रूपी बक्षिस को भगवत् कार्य, - भगवत् चिंतन मे नही वापरेंगे तो वे अगले जन्म में उसे वापस ले लेंगें, क्योंकि हमने उसका योग्य उपियोग ही नही किया था। यह भगवान का श्राप नही अपितु Evolution Theory उत्क्रांति के सिद्धांत तहत न्याय है।
इसीलिए श्रीमद्भगवगिता में भगवान ने कहा है : #माम्_अनुस्मर_युद्धय_च - अर्थात मेरा स्मरण करो, संसार में संघर्ष करो, युद्ध करो, और सफलता प्राप्त करो।
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