दैवी संपदा ' बुद्धि '

आज अश्विन शुक्ल तृतिया दिनांक 12.10.2018 शुक्रवार

#नमो_देव्यै_महादेव्यै_शिवायै_सततं_नम:।
#नमः_प्रकृत्यै_भद्रायै_नियताः_प्रणताः_स्मताम्॥ 

🕉 #शक्ति_की_उपासना_का_महापर्व_नवरात्र_महोत्स 🕉

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#या_देवी_सर्वभूतेषु_बुद्धिरूपेण_संस्थिता। 
#नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमो_नमः॥
जो देवी सब प्राणियों में बुद्धिरूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार है।

भगवद्गीता में भगवान ने बुद्धि की श्रेष्ठता के विषय मे कहा है :
#इन्द्रियाणि_पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः_परं_मनः ।
#मनसस्तु_परा_बुद्धिर्यो_बुद्धेः_परतस्तु_सः॥ (भ ग ४/४२)
(अर्थात् : इन्द्रियोंको स्थूल शरीरसे पर (श्रेष्ठ) कहते हैं; इन्द्रियोंसे श्रेष्ठ मन है, मनसे भी पर बुद्धि है और जो बुद्धिसे भी पर है वह (आत्मा) है।)

परमात्मा के अंश आत्मा के बाद सर्वश्रेष्ठ कोई है तो वह बुद्धि ही है। हम नवरात्र में शक्ति स्वरूपा माँ की उनकी ही दी हुई शक्ति से विविध शक्तियों का भावपूजन कर रहे है।

बुद्धि (Intelligence) वह मानसिक शक्ति है जो वस्तुओं एवं तथ्यों को समझने, उनमें आपसी सम्बन्ध खोजने तथा तर्कपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होती है। यह 'भावना' और अन्तःप्रज्ञा  (Intuition/इंट्युसन) से अलग है। बुद्धि ही मनुष्य को नवीन परिस्थितियों को ठीक से समझने और उसके साथ अनुकूलित (adapt) होने में सहायता करती है। बुद्धि को 'सूचना के प्रसंस्करण (Processing) की योग्यता' की तरह भी समझा जा सकता है।

 #बुद्धि #Intelligence के स्वरूप को समझना बहोत कठिन है यह गहन विषय है। हम ज्यादा गहरे पानी मे नही जायेंगे। बुद्धि के स्वरूप पर प्राचीन काल से ही विभ्भिन्न मत चले आ रहे हैं तथा आज भी मनोवैज्ञानिकों तथा शिक्षाविदों के लिए भी बुद्धि वाद-विवाद का विषय बना हुआ है। 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध से बुद्धि के स्वरूप को समझने हेतु मनोवैज्ञानिकों ने प्रयास प्रारम्भ किए परन्तु वे भी इसमें सर्वसम्मत परिभाषा न दे सके। वर्तमान में भी बुद्धि के स्वरूप के सम्बंध में मनोवैज्ञानिकों के विचारों में असमानता है।

बुद्धि को सरल भाषा मे समजने का प्रयास करेंगे सामान्यतः समाज मे ४ प्रकार के वर्ग होते है।
१. बुद्धिमान, बुद्धिशाली
२. बुद्धिजीवी
३. बुद्धिवादी
४. बुद्धिनिष्ठ

#बुद्धिमान #बुद्धिशाली :
नीतियों के निर्माता एवं भारत के महान #पंडित_चाणक्य की नीति अनुसार बुद्धिमान व्यक्ति में निम्नगुण अपेक्षित है।

अ) बुद्धिमान व्यक्ति अपनी प्रशंसा स्वयं कभी नहीं करते, उन्हें किसी व्यक्ति से खुद के बारे में मीठी बातें सुनने के बजाय, अपनी ग़लतियाँ सुनना पसंद है जिससे वे खुद के अंदर बदलाव कर सकें। वह कभी बुरे लोगों का संग नहीं करता, ज्ञानी व्यक्ति के लिए उसका सम्मान ही सबकुछ होता है।

ब) समझदार व्यक्ति अपने पारिवारिक कलेश की बातें सार्वजनिक तौर पर नहीं बताते, वे अपनी पत्नी से संबंध के बारे में तथा परिवार कमज़ोरी अन्य व्यक्ति को नहीं बताते।

क) बुद्धिशाली व्यक्ति जहरीले साँप, चापलूस नौकर, अवगुणी स्त्री और मुर्ख व्यक्ति से विवाद कभी नहीं करते।

ड़) बुद्धिमान व्यक्ति अपनी विद्या के बल से धन एवं सम्मान भी कमा लेते है लेकिन उनके पास कितना धन है इस बात की जानकारी वे अपने भाइयों को भी नहीं देते क्योंकि वे जानते है कि उन्हें कब-कौन धोखा दे जाए इसका कोई भरोसा नहीं।

ई) समझदार व्यक्ति ईमानदारी की कमाई पर अधिक विश्वास रखते है क्योंकि ईमानदारी से कमाया धन अधिक समय तक टीका रहता है।

#बुद्धिजीवी :
बुद्धिजीवी किसे कहते है ? वैसे तो एक अर्थ में हर व्यक्ति बुद्धिजीवी है। फिर भी #आर्थिक एवं #मनोवैज्ञानिक दृष्टि से प्रायः सभी समाज मे ' श्रमजीवी ' और ' बुद्धिजीवी ' का विभाजन मान्य हो गया है। श्रमजीवी वर्ग अपने श्रम के सहारे जीवनयापन करता है। बुद्धिजीवी वर्ग जिसके जीवन और जीविका में बुद्धि की प्रधानता है। इस वर्ग में डॉक्टर, अध्यापक, वकील, इंजीनियर वगेरे को बुद्धिजीवी कहा जाता है। लेकिन असली बुद्धिजीवी जरूर नही केवल इसी वर्ग से आते है।

बुद्धिजीवियों का मुख्यकार्य है सोचना, संशोधन करना, सूचनाओं का संकलन कर उसका विश्लेषण कर देश समाज और विश्व की समस्याओं का समाधान निकाल कर समष्टि के कल्याण की दिशा में मौलिक विचार प्रस्तुत करना। वह सत्य का उपासक हो। जिसकी जीवन मे बुद्धि का प्रयोग केवल पैसा कमाने के लिये नही, पर उसका हेतु निष्पक्षता से #सर्वजन_हिताय_सर्वजन_सुखाय हो वही सच्चा बुद्धिजीवी है।

#बुद्धिवादी
आज समाज जिसे ' बुद्धिजीवी ' वर्ग मानता है कि उन लोग का काम बस सवाल पूछना है, वह समजता है कि जवाब देना किसी और का काम है। वास्तवमे यह ' बुद्धिवादी ' वर्ग है। इससे तथाकथित बुद्धिजीवीके बुद्धि का स्तर का भी पता चलता है। वो सवाल तो पूछ लेता है, पर संतोषजनक उत्तर हासिल नहीं कर पाता। अगर आपको जवाब हासिल करने का तरीका नहीं मालूम तो फिर सवाल पूछने का फायदा ही क्या है ? कई बहस देख कर तो लगता है कि बुद्धिजीवी केवल सवाल पूछने का खातिर सवाल पूछता है, जवाब खुद उसको भी मालूम नहीं होता।

#बुद्धिनिष्ठ :
अपनी विवेक बुद्धि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उसके आधार से निकले निष्कर्ष पर सिद्ध हुए विचार या सिद्धांत पर निष्ठापूर्वक टीके रहना यह ' बुद्धिनिष्ठ ' व्यक्ति का लक्षण है। कोई भी व्यक्ति जन्मजात बुद्धिनिष्ठ नही हो सकता। अर्जुन ने गीता सुनकर अंत में सब शंकाओं से समाधान पाकर भगवान को कहा था :

#नष्टो_मोहः_स्मृतिर्लब्धा_त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।
#स्थितोऽस्मि_गतसन्देहः_करिष्ये_वचनं_तव॥ (भ ग १८/७३)
(अर्थात् : अर्जुन बोले - हे अच्युत ! आपकी कृपासे मेरा मोह नष्ट हो गया है और स्मृति प्राप्त हो गयी है। मैं सन्देह रहित होकर स्थित हूँ। अब मैं आपकी आज्ञाका पालन करूँगा।) फिर युद्ध लड़कर विजय श्री को प्राप्त किया यह बुद्धिनिष्ठता श्रेष्ठ द्रष्टांत है।

यह बुद्धि इर्श्वरदत्त है, अब हमें निश्चय करना है कि प्रभुदत्त बुद्धि का हम कैसे उपयोग करते है ???

इस बुद्धिशक्ति से भगवद शक्ति को पहचान कर ' बुद्धिनिष्ठ ' बनकर उन्की आराधना करने के लिये नव नव दिनों तक अखंड दिप प्रागट्य कर माँ जगदंबा की पूजा कर उनसे शक्ति पाने के दिन ही #नवरात्र_महोत्सव है।

नवरात्रि पर्व सभी मित्रों एवं माँ के भक्तों को हार्दिक अभिनंदन के साथ ढेरों शुभकामनाएं।
(क्रमशः)                 

जय श्री कृष्ण             
🙏🙏🙏🙏🙏

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