विभूति दर्शन बृहत्साम तथा साम्नां

आज अश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी दिनांक २८.१०.२०१८ रविवार
🕉 कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   
🙏  सुप्रभात  🙏

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवी संपदा एवं विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है
#बृहत्साम_तथा_साम्नां_गायत्री_छन्दसामहम्‌।
#मासानां_मार्गशीर्षोऽहमृतूनां_कुसुमाकर:॥ (भ ग १०/३५)
भावार्थ :  गाई जानेवाली श्रुतियों में सामवेद के प्रकरणों में जो बृहत्साम नामक प्रधान प्रकरण है वह मैं हूँ। छन्दोंमें मैं गायत्री छन्द हूँ अर्थात् जो गायत्री आदि छन्दोबद्ध ऋचाएँ हैं उनमें गायत्री नामक ऋचा मैं हूँ। महीनोंमें मार्गशीर्ष नामक महीना और ऋतुओंमें बसन्त ऋतु मैं हूँ।)

#बृहत्साम : सामवेद की प्रतिष्ठा सर्वाधिक है, जिसका एक कारण गीता  में  स्वंय भगवान द्वारा #वेदानां_सामवेदोऽस्मि समस्त वेदोंमें मैं सामवेद हुँ। सामवेद गीत-संगीत प्रधान है। यद्यपि सामवेद छोटा है परन्तु एक तरह से यह सभी वेदों का सार रूप है और सभी वेदों के चुने हुए अंश इसमें शामिल किये गये है। सामवेद विभिन्न देवताओं द्वारा गाये जाने वाले गीतों का संग्रह है। इन गीतों में से एक ' बृहत्साम ' है जिसकी ध्वनि सुमधुर है और यह अर्धरात्रि में गाया जाता है।

वेद का अर्थ है #उद्भूत_ज्ञान ऋषि मुनियों को समाधी अवस्था में दिव्य साक्षात्कार से उद्भूत ज्ञान को वेद कहते हैं। यह कोई पुस्तकिय ज्ञान नहीं है। भावना के बिना ज्ञान दृष्टि अपूर्ण रहतीं हैं।   

#चाणक्यनीति शास्त्र अनुसार :
#न_देवो_विद्यते_काष्ठे_न_पाषणे_न_मृण्मये। 
#भावे_हि_विद्यते_देवः_तस्माद्_भावो_हि_कारणं॥
अर्थात् : न ही लकड़ी, पत्थर या मिट्टी की मूर्ति में भगवान का निवास होता है। अपितु देवों का निवास भावों में यानी ह्रदय में होता है। अतः साक्षात्कार का मुख्य आधार भावना ही है।)

परंतु भावना एक ' उफान ' हैं, उसे भटकने से बचाने के लिए, दिशाबद्ध करने के लिए ज्ञान और विवेक भी आवश्यक है।

उदा : किसी एक प्रभु भक्त जो सिर्फ भावना वश प्रभु की आत्यंतिक पूजा, सेवा करता है। और अकस्मात उसके एकमेव जवान पुत्र की मृत्यु हो जाती है तो होजाती है। शक्य है वह मोहवश इसका दोष भगवान पर डाल दें और मूर्ति को उठाकर फेंक देंगा - तूने ही मेरा बेटा छीन लिया !

लेकिन भावना के साथ ज्ञान और विवेक भी हो तो वह कहेगा "भगवान ने दिया था उसे मुझसे अधिक आवश्यकता होगी इसलिए उसे बुला लिया।
जैसी हरी की इच्छा।"                 
 
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆  इदं न मम  🔆
🙏🙏🙏🙏🙏

कृपया नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर👇👇👇॥भगवत् कृपा॥ page Like & Follow करें : https://www.facebook.com/bhagwatkrupa/
Also read on https://rspngp.blogspot.com

Comments

Popular posts from this blog

नेहरु खानदान का घिनौना चरित्र

षोडश संस्कार एवं विवाह संस्कार

हिमालय दर्शन