दैवी संपदा ' श्रद्धा '

आज अश्विन शुक्ल चतुर्थी दिनांक 13.10.2018 शनिवार

#नमो_देव्यै_महादेव्यै_शिवायै_सततं_नम:।
#नमः_प्रकृत्यै_भद्रायै_नियताः_प्रणताः_स्मताम्॥ 

🕉 #शक्ति_उपासना_का_महापर्व_नवरात्र_महोत्सव 🕉

🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉 🕉  🕉 🕉 🕉 🕉 🕉

#या_देवी_सर्वभूतेषु_श्रद्धारूपेण_संस्थिता। 
#नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमो_नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में श्रद्धा, आदर, सम्मान के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है। मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।

भगवद्गीता में भगवान ने श्रद्धा के लिये संपूर्ण #श्रद्धात्रयविभागयोग नामक १७ वें अध्याय में #त्रिविधा_श्रद्धा सात्विकी, राजसी एवं तामसी को विस्तृत रूप से समजाया है।

#त्रिविधा_भवति_श्रद्धा_देहिनां_सा_स्वभावजा। 
#सात्त्विकी_राजसी_चैव_तामसी_चेति_तां_श्रृणु॥ (भ ग १७/२)
(भावार्थ : श्री भगवान्‌ ने कहा - शरीर धारण करने वाले सभी मनुष्यों की श्रद्धा प्रकृति गुणों के अनुसार सात्विक, राजसी और तामसी तीन प्रकार की ही होती है, अब इसके विषय में मुझसे सुन।)

हम नवरात्र में शक्ति स्वरूपा माँ की उनकी ही दी हुई शक्ति से विविध शक्तियों का भावपूजन कर रहे है। कल हमने बुद्धि का भावपूजन किया था। लेकिन मानव की अनियन्त्रित #बुद्धि_शक्ति मनुष्य जाति की बहुत बड़ी शत्रु है। अनियंत्रित बुद्धिशक्ति ने सृष्टि और मानवता को विनास के कगार पर खड़ा कर दिया है। अत एव बुद्धि के विकास के साथ-साथ उसका नियन्त्रण भी आवश्यक है।

किसी शक्तिशाली का नियन्त्रण तो उससे अधिक शक्ति से ही हो सकता है। तब भला समग्र सृष्टि को अपनी मुट्ठी में कर लेने वाली शक्ति बुद्धि का नियन्त्रण करने के लिये कौन सी दूसरी शक्ति मनुष्य के पास हो सकती है ?

मनुष्य की वह दूसरी शक्ति है - #श्रद्धा! जिससे बुद्धि जैसी उच्छृंखल शक्ति पर अंकुश लगाया जा सकता है, उसका नियन्त्रण किया जा सकता है। ध्वंस की ओर जाने से रोक कर सृजन के मार्ग पर अग्रसर किया जा सकता है। श्रद्धा रहित बुद्धि जिधर भी चलेगी उधर दुःखद परिस्थितियाँ ही उत्पन्न करेगी।

यदि आज की चमत्कारी बुद्धि-शक्ति का ठीक दिशा में उपयोग करना है, संसार से दुःख दर्दों को मार भगाना है, अपनी धरती माता को स्वर्ग बनाना है, मानव सभ्यता की रक्षा के साथ-साथ उसका विकास करना है तो अन्तःकरण में ' श्रद्धा ' की प्रतिस्थापना करनी होगी। बिना श्रद्धा के मनुष्य की बुद्धि-शक्ति उसकी शत्रु बनकर मानवता का विनाश किये बिना नहीं मानेगी। आज अवसर हैं, साधन हैं, मनुष्य चाहे तो #सृजन_का_देवदूत  बन सकता है और चाहे तो #शैतान_का_अनुचर !!!

#बुद्धिशक्ति_को_श्रद्धाशक्ति से ही नियंत्रित की जा सकती है अन्यथा बुद्धिशक्ति विध्वंसक बन सकती है। #विघ्नहर्ता_गणपति का #पूर्ण_दांत_श्रद्धा_का_प्रतीक है, जबकि #अर्ध_दंत_बुद्धि_का_प्रतीक है। बुद्धि एक बार की कम रहेंगी तो चलेंगी, लेकिन श्रद्धा पूर्ण होनी चाहिए यह दर्शाता है।

श्रद्धा याने क्या ? इसे समज ने का प्रयास करेंगे। सामान्यतः श्रद्धा को भक्ति के रूप में देखा जाता है।

लेकिन ' श्रद्धा ' और ' भक्ति ' में बड़ा मामूली अंतर है। कभी-कभी तो यह लगता है कि दोनों आपस में दूध-पानी की तरह इस प्रकार घुल गए हैं कि उन्हें अलग से पहचानना कठिन है। श्रद्धा ' #श्रेष्ठ ' के प्रति होती है और भक्ति ' #आराध्य ' के प्रति, किंतु देखा जाए तो दोनों में अति सूक्ष्म अंतर होते हुए भी अर्थ और भाव की दृष्टि से काफी असमानता है। गुरु के प्रति किसी की श्रद्धा भी रहती है और भक्ति भी, लेकिन आराध्य के प्रति व्यक्ति की मात्र भक्ति ही रहती है। श्रद्धा अनुशासन में बंधी है तो भक्ति दृढ़ता और अनन्यता के साथ अपनेआपको न्योछावर करती रहती है। श्रद्धा में आदर की सरिता बहती है, तो भक्ति में प्रेम का समुद्र लहराता रहता है। दोनों में यही मूल फर्क समझ में आता है।

श्रद्धा स्थिर होती है और भक्ति मचलती रहती है। विनय दोनों में है, किंतु श्रद्धा का भाव तर्क-वितर्क के ताने-बाने बुनता रहता है, तो भक्ति अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पित होकर उसके भाव आदि की समीक्षा न करके, उस पर खुद को उड़ेलती रहती है। शास्त्र कहते भी हैं कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। दरअसल जिस प्रकार बादल के साथ पानी की बूंदे जुड़ी रहती हैं, उसी तरह से भक्ति भी श्रद्धा का एक रूप ही है।

गीता में वर्णित त्रिविधा श्रद्धा के प्रकार का चिंतन आगे भी हुआ है; और भविष्य में होता रहेगा। नवरात्र के पावनपर्व पर हमारे अंदर छुपी माँ भगवती के विविध शक्तियों के स्वरुपों का हम उनकी ही दी हुई शक्ति से पूर्ण ' श्रद्धा ' से भावपूजन कर ' #भक्तिभाव ' से आराधन कर रहे हैं।

नवरात्रि पर्व सभी मित्रों एवं माँ के भक्तों को हार्दिक अभिनंदन के साथ ढेरों शुभकामनाएं।
(क्रमशः)                 

जय श्री कृष्ण             
🙏🙏🙏🙏🙏

कृपया नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर👇👇👇॥भगवत् कृपा॥ page Like & Follow करें : https://www.facebook.com/bhagwatkrupa/

Comments

Popular posts from this blog

नेहरु खानदान का घिनौना चरित्र

षोडश संस्कार एवं विवाह संस्कार

हिमालय दर्शन