विभूति दर्शन ' स्मृति '
आज अश्विन शुक्ल चतुर्दशी दिनांक २३.१०.२०१८ मंगलवार
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
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श्रीमद् भगवद्गीता के विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)
कीर्ति, श्री और वाणी का चिंतन हमने कीया, तत्पश्चात हम प्रभु के अद्भुत उपहार स्मृति का चिंतन करने का प्रयास करेंगे।
#स्मृति #Memory : याद, यादगार, स्मरणशक्ति, धारणा, चेतना। यह स्मरण शक्ति मस्तिष्क में स्थित दिमाग Brain में संग्रहित रहती है।
सामान्यत: मानव दिमाग का वजन 1.3 से 1.4 किलो ग्राम होता है। इतने छोटे मस्तिष्क में असंख्य शब्द याद रहते हैं। अनेक प्रकार की सुगन्ध, अनेक प्रकार के स्वाद, अनेक घटनाएं याद रहतीं है। स्मृति यह कितनी अद्भुत और सुन्दर उपहार हैं प्रभु की !
#सर्वस्य_चाहं_हृदि_सन्निविष्टो_मत्तः_स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं_च।
#वेदैश्च_सर्वैरहमेव_वेद्यो_वेदान्तकृद्वेदविदेव_चाहम्॥ (भ ग १५/१५)
अर्थात् : मैं सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें स्थित हूँ। मेरे से ही स्मृति, ज्ञान और अपोहन (संशय आदि दोषोंका नाश) होता है। सम्पूर्ण वेदोंके द्वारा मैं ही जाननेयोग्य हूँ। वेदोंके तत्त्वका निर्णय करनेवाला और वेदोंको जाननेवाला भी मैं ही हूँ।
#वेदैश्च_सर्वैरहमेव_वेद्यो_वेदान्तकृद्वेदविदेव_चाहम्॥ (भ ग १५/१५)
अर्थात् : मैं सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें स्थित हूँ। मेरे से ही स्मृति, ज्ञान और अपोहन (संशय आदि दोषोंका नाश) होता है। सम्पूर्ण वेदोंके द्वारा मैं ही जाननेयोग्य हूँ। वेदोंके तत्त्वका निर्णय करनेवाला और वेदोंको जाननेवाला भी मैं ही हूँ।
जब हम रात को सोते हैं तो भगवान हमें सबकुछ भूला देते हैं, जिससे हमें अच्छी नींद आती हैं और सुबह जब हम जागते हैं तो सभी थकान दूर होती हैं और पुनः स्फूर्ति और ताजगी का अनुभव करते हैं। जागते ही प्रभु हमें हमारी स्मृति वापस दे देते हैं, जिससे जीवन के प्रत्येक व्यवहार सुचारू रूप से हो। कितना प्रेम है प्रभु का हमारे ऊपर!
मानलो सुबह स्मृति वापस न मिले तो ? पास सोई हुई पत्नी को पूछेंगे कि आप कौन हैं ? संसार के समस्त व्यवहार नष्ट हो जाएंगे। कई बार लोग शिकायत करते हैं " मुझे कुछ याद नहीं रहता। " यह शिकायत गलत होती है क्योंकि यदि कुछ याद नहीं रहता तो बाजार भाव कैसे याद रहते हैं ? किससे कितना पैसा लेना है और कितना देना है, यह हिसाब किताब कैसे याद रहता है ? दरअसल आपको जिस विषय में रुचि नहीं होगी वह आपको याद नहीं रहता।
स्मृति, याद शक्ति तेज बनाने के पांच घटक है। #रुचि, #एकाग्रता, #आत्मविश्वास, #अध्ययन #पुनरावर्तन और योग्य वातावरण। जब यह पांच घटक योग्य प्रमाण में उपलब्ध हो, तो हम जो भी याद रखना चाहते हैं, वह अवश्य सरलता से याद कर सकते हैं।
#विस्मृति भी प्रभु का वरदान है। भगवान भूला देते हैं, जिसके कारण हमारे शरीर पर, मन पर पडे अनेक घाव भर जाते हैं। संसार में अनेक लोग हमारी प्रशंसा करते हैं तो अनेक लोग निंदा भी करते हैं, यह सब कुछ भगवान भूला देते हैं। हमारी अनेक इच्छाएँ होती हैं, जिसे पूरा करने में हम असमर्थ होतें हैं। प्रभु ने सपनों की सुंदर व्यवस्था की है। जो भी इच्छा अधूरी रह जाए, वह सपनों में पूरी हो जाती है। कितनी सुंदर और अद्भुत व्यवस्था है परमेश्वर की!
' स्मृति ' यह शब्द भारतिय सनातन वैदिक #धर्मग्रंथों के संदर्भ में भी प्रयुक्त होता है।
स्मृति हिन्दू धर्म के उन धर्मग्रन्थों का समूह है जिनकी मान्यता श्रुति से नीची श्रेणी की हैं और जो मानवों द्वारा उत्पन्न थे। इनमें वेद नहीं आते।स्मृति का शाब्दिक अर्थ है - "याद किया हुआ"। यद्यपि स्मृति को वेदों से निम्न दर्ज़ा हासिल है लेकिन वे (रामायण, महाभारत, गीता, पुराण) अधिकांश हिन्दुओं द्वारा पढ़ी जाती हैं, क्योंकि वेदों को समझना बहुत कठिन है और स्मृतियों में आसान कहानियाँ और नैतिक उपदेश हैं। इसकी सीमा में विभिन्न धार्मिक ग्रन्थो गीता, महाभारत, विष्णुसहस्रनाम की भी गणना की जाने लगी। शंकराचार्य ने इन सभी ग्रन्थों को स्मृति ही माना है।
(क्रमशः)
जय श्री कृष्ण
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