दैवी संपदा ' शक्ति '


आज अश्विन शुक्ल द्वितिया दिनांक 11.10.2018 गुरुवार
#नमो_देव्यै_महादेव्यै_शिवायै_सततं_नम:।
#नमः_प्रकृत्यै_भद्रायै_नियताः_प्रणताः_स्मताम्॥
🕉 #शक्ति_की_उपासना_का_महापर्व_नवरात्र_महोत्सव 🕉
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#या_देवी_सर्वभूतेषु_शक्ति_रूपेण_संस्थिता।
#नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमो_नमः॥
जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित है, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

#दैवीशक्ति : ईश्वर की वह माया है जो उसकी आज्ञा से सब काम करनेवाली और  सृष्टिरचना करनेवाली मानी जाती है। यह अनंतरूपा और अनंत सामर्थ्यसंपन्ना कही गई है। यही शक्ति जगत् रूप में व्यक्त होती है और प्रलयकाल में समग्र चराचर जगत् को अपने में विलीन करके अव्यक्तरूपेण स्थित रहती है। यह जगत् वस्तुत: उसकी व्यवस्था का ही नाम है।

गीता में वर्णित योगमाया यही शक्ति है जो व्यक्त और अव्यक्त रूप में हैं। #कृष्ण_योगमायामुवाश्रित: होकर ही अपनी लीला करते हैं। #राधा उनकी #आह्वादिनी शक्ति है। #शिव शक्तिहीन होकर कुछ नहीं कर सकते। #शक्तियुक्त शिव ही सब कुछ करने में, न करने में, अन्यथा करने में समर्थ होते हैं। इस तरह भारतीय दर्शनों में किसी न किसी नाम रूप से इसकी चर्चा है।

पुराणों में विभिन्न देवताओं  की विभिन्न शक्तियों का वर्णन किया है। इन शक्तियों को बहुधा देवी के रूप में मूर्तिमंत माना गया है। जैसे,  की कीर्ति, कांति, तुष्टि, पुष्टि आदि; रुद्र की गुणोदरी, गोमुखी, दीर्घजिह्वा, ज्वालामुखी आदि।

मार्कण्डेय पुराण  के अनुसार समस्त देवताओं की तेजोराशि देवी शक्ति के रूप में कही गई है जिसकी शक्ति वैष्णवी, माहेश्वरी, ब्रह्माणी, कौमारी, नारसिंही, इंद्राणी, वाराही आदि हैं। उन देवों के स्वरूप और गुणादि से युक्त इनका वर्णन प्राप्त होता है।

#शारीरिक_शक्ति :  शारिरिक शक्ति, शारीरिक फिटनेस  युक्त आहार, व्यायाम और पर्याप्त आराम के द्वारा हासिल होती है। यह हम सब जानते है। यह जीवन  का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

#पञ्चभूतं सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है। सृष्टि में इन पंचतत्वों का संतुलन बना हुआ है। यदि यह संतुलन बिगड़ गया तो यह प्रलयकारी हो सकता है। #आकाश (Space), #वायु (Wind), #अग्नि (Energy), #जल (Force), और #पृथ्वी (Matter)। यही सृष्टी के ऊर्जा के शक्तिस्तोत्र है। मानव शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से मिलकर बना है। वास्तविकता में यह पंचतत्व मानव की पांच इन्द्रियों से संबंधित है। जीभ, नाक, कान, त्वचा और आँखें हमारी पांच इन्द्रियों का काम करती है।

लेकिन हम कभी सोचते है क्या भोजन का #शक्ति #ऊर्जा, #Energy में रूपांतरण कैसे होता है किसी भी रंग का, कैसा भी, शाकाहारी या मांसाहारी भोजन, किसी भी देश प्रांत का, किसी भी धर्मजाति का व्यक्ति खाये फिर भी उससे #लाल_रंगका_रक्त ही निर्माण होता है ! यह रक्त निर्माण कौन करता है ? यह रक्त संपूर्ण शरीर मे अविरत प्रवाहित होकर प्रत्येक अव्यव, इंद्रियों तक पहुंचाकर उसे शक्ति प्रदान कर शारिरीक क्रिया कौन करता है ?

" कौन सुलाये ? मुजको कौन उठाये ?
कौन मेरा खाया हुआ भोजन पचाये ?
बारबार यह सवाल मुझको सताये। "

क्या हम करते है यह सब क्रियाएं ? यदि हम अंतःमुख होकर विचार करे तो ऐसे अनगिनत प्रश्न उठ सकते है ! इसका एक ही उत्तर मिलेंगा हम नही करते ! तो कोई तो होंगा जो रातदिन अविरत जीवन पर्यंत हमें शक्तिमान बनाकर हमारा जीवन चला रहा है।

यह #शक्ति_इर्श्वरदत्त है, यह #शक्ति_ही_ईश्वर_का_स्वरूप है और यह #शक्ति_ही_स्वयं_ईश्वर है। इस दैवीशक्ति को पहचान कर उसकी आराधना करने के लिये नव नव दिनों तक अखंड दिप प्रागट्य कर माँ जगदंबा की पूजा कर उनसे शक्ति पाने के दिन ही #नवरात्र_महोत्सव है।
नवरात्रि पर्व सभी मित्रों एवं माँ के भक्तों को हार्दिक अभिनंदन के साथ ढेरों शुभकामनाएं।
            
जय श्री कृष्ण               
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