विभूति दर्शन ' कीर्ति '

आज अश्विन शुक्ल एकादशी दिनांक २०.१०.२०१८ शनिवार
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   
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श्रीमद् भगवद्गीता के विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#मृत्युः_सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च_भविष्यताम्।
#कीर्तिः_श्रीर्वाक्च_नारीणां_स्मृतिर्मेधा_धृतिः_क्षमा॥ (भ ग १०/३४)
(अर्थात् : मैं सर्वभक्षक मृत्यु और भविष्य में होने वालों की उत्पत्ति का कारण हूँ स्त्रियों में कीर्ति,श्री, वाक (वाणी), स्मृति, मेधा, धृति, और क्षमा हूँ।)

#कीर्ति का अर्थ है : #यशस्वी, #ख्याति, #प्रतिष्ठा, #प्रशंसा #कुछ_कहने_जैसा         
कोई बालक पाठशाला से घर आकर अपने पिता से कहता है कि आज मैंने किसी को नहीं मारा, किसी के साथ झगड़ा नहीं किया, मैं झुठ नहीं बोला। तब पिता उससे कहते हैं कि तुझे यह सब तो नहीं करना है, लेकिन तु क्या करके आया, यह मुझे समझा। क्या तूने ठीक से पढ़ाई की ? क्या तूने होमवर्क पूरा कीया ? क्या शिक्षक के प्रश्नों के उत्तर ठीक से दीए ? तूने क्या नहीं किया, यह मुझे नहीं जानना। तू क्या करके आया यह जानना है।                   

हमारे पास प्रभु को कहने जैसा क्या है ? मैंने यह नहीं किया, वह नहीं किया यह जानने की प्रभु की कोई इच्छा नहीं है। हम क्या करके आए हैं जिससे प्रभु प्रसन्न हो! #यो_मद्भक्त_समे_प्रीयः" ऐसा मेरा भक्त मुझे प्रिय हैं। ऐसा #CERTIFICATE प्रभु से मिलता है तब संपूर्ण विश्व उसकी जय जयकार करता है। यह कीर्ति है।

भक्त कवि नरसिंह मेहता, मीरा बाई, तुलसीदासजी, तुकाराम महाराज इन्ह सबके पास कहने जैसा था, जिससे प्रभु गौरवान्वित हो।             

जब कोई विद्यार्थी सबसे अधिक अंक लेकर शीर्ष स्थान हासिल करता है तो उसके माता-पिता, शिक्षक, पाठशाला, समाज, मित्र समुदाय सभी गौरवान्वित महसूस करते हैं। जन्म मरण, हानि लाभ, यश अपयश सब विधि के अधीन है। सबकुछ ईश्वर की कृपा से होता है, परंतु भगवान हमे निमित्त बनाकर यश हमें दे देते है।       

#तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ_यशो_लभस्व_जित्वा_शत्रून्_भुङ्क्ष्व_राज्यं_समृद्धम्।
#मयैवैते_निहताः_पूर्वमेव_निमित्तमात्रं_भव_सव्यसाचिन्॥ (भ ग ११/३३)
(अर्थात् : तुम युद्धके लिये खड़े हो जाओ और यशको प्राप्त करो तथा शत्रुओंको जीतकर धनधान्यसे सम्पन्न राज्यको भोगो। ये सभी मेरे द्वारा पहलेसे ही मारे हुए हैं। हे सव्यसाचिन् तुम निमित्तमात्र बन जाओ।)

"मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है,
करतें हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है।"       
(क्रमशः)       

जय श्री कृष्ण                 
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