विभूति दर्शन ' गायत्री छन्दसामहम्‌ '

आज अश्विन कृष्ण पक्ष पंचमी दिनांक २९.१०.२०१८ सोमवार
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉 
 🙏 सुप्रभात  🙏
वेदमाता गायत्रि
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#बृहत्साम_तथा_साम्नां_गायत्री_छन्दसामहम्‌।
#मासानां_मार्गशीर्षोऽहमृतूनां_कुसुमाकर:॥ (भ ग १०/३५)
भावार्थ :  गाई जानेवाली श्रुतियों में सामवेद के प्रकरणों में जो बृहत्साम नामक प्रधान प्रकरण है वह मैं हूँ। छन्दोंमें मैं गायत्री छन्द हूँ अर्थात् जो गायत्री आदि छन्दोबद्ध ऋचाएँ हैं उनमें गायत्री नामक ऋचा मैं हूँ। महीनोंमें मार्गशीर्ष नामक महीना और ऋतुओंमें बसन्त ऋतु मैं हूँ।)

#बृहत्साम_तथा_साम्नां का चिंतन हमने कीया, तत्पश्चात हम प्रभु की विभूति #गायत्री_छन्दसामहम्‌ का चिंतन करने का प्रयास करेंगे।             #गायत्रीमंत्र
#ॐ_भूर्भूवः_स्वः।
#तत्सवितुर्वरेण्यम्।
#भर्गो_देवस्य_धीमही।
#धियो_योनः_प्रचोदयात्।
(भावार्थ : उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।)

#गायत्री_छन्दसामहम्‌
सभी छंदों में मैं गायत्री हुं। जब वेद के पद्यबद्ध (POETRY) काव्यमय मंत्रों को गान विद्या से अनुप्राणित किया गया, तो 'सामवेद' बन गया। भगवद्गीता को गीत क्यों कहा जाता है ? क्योंकि यह #अनुष्टुप_छंद और #त्रिष्टुप_छंद में है।
               
#छंद शब्द का अर्थ है प्रसन्न करना। #गद्य ज्ञानसभर रहता है, जबकि #पद्य (काव्य) भावनासभर रहती हैं। इसलिए कर्णप्रिय लगती हैं। जो मन को प्रसन्न करे ऐसी पद्य रचना छंद कहलाती हैं। जिस विषय को समझाने के लिए ' गद्य ' में लंबा वर्णन करना पड़ता है, ' पद्य ' में वह कम से कम शब्दों में कहा जाता है। पद्य सुनने में मधुर लगता है। मां अपने बालक को लोरी सुनाती हैं तो बालक मधुर गीत के प्रभाव से प्रसन्न होकर मीठी नींद में सो जाता है। गायत्री मंत्र, छंद है।     
 
#वेद_माता_गायत्री को वेदों की जननी मानी जाती है।       
#गायत्री_महामंत्र  : वेदों  का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र  है। जिसकी महत्ता ॐ  के बराबर मानी जाती है। यह यजुर्वेद  के मन्त्र  ' ॐ भूर्भुवः स्वः ' और  ऋग्वेद  ' तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गोदेवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्। ' (ऋग्वेद ३,६२,१०) के छन्द के मेल से बना है। इस मंत्र में सवितृ  देव की उपासना है इसलिए इसे सावित्री भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। इसे श्री गायत्री देवी  के रुप मे भी पुजा जाता है।

ईश्वर प्राणाधार, दुःखनाशक तथा सुख स्वरूप है। हम प्रेरक देव के उत्तम तेज का ध्यान करें। जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर बढ़ाने के लिए पवित्र प्रेरणा दें।

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆  इदं न मम  🔆
🙏🙏🙏🙏🙏

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