विभूति दर्शन ' द्यूतं छलयतामस्मि '

🙏 सुप्रभात, आज अश्विन कृष्णपक्ष अष्टमी दिनांक १.११.२०१८ गुरुवार
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   


श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूतिदर्शन में प्रभु ने कहा है :
#द्यूतं_छलयतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्।
#जयोऽस्मि_व्यवसायोऽस्मि_सत्त्वं_सत्त्ववतामहम्॥ (भ ग १०/३६)
भावार्थ :  छल करनेवालोंमें जो पासोंसे खेलना आदि द्यूत और तेजस्वियोंका मैं तेज हूँ। जीतनेवालोंका मैं विजय हूँ। निश्चय करनेवालोंका निश्चय (उद्यमशीलोंका उद्यम) हूँ और सत्त्वयुक्त पुरुषोंका अर्थात् सात्त्विक पुरुषोंका मैं सत्त्वगुण हूँ।

श्रीमद् भगवद्गीता मे प्रभु ने कहा है #द्यूतं_छलयतामस्मि मैं छल करने वालों में द्यूत हुं।     

छल, कपट, धोखा निकृष्ट-निंदनीय व्यवहार में आते हैं। इनमें निकृष्टतम जुए #धृत को माना गया। प्रभु मानव कल्याण के लिए दुष्टों से #छल_प्रपञ्च भी करते हैं। कूटनीति में दुश्मन को मात देने के लिए यह एक मान्य सिद्धान्त है।

भगवान के गूढ़ कथन को न समझते हुए। सामान्य जन यहां पर ऐसा अर्थघटन कर सकते हैं। की भगवान ने द्युत खेलने को कहा है। क्या भगवान को द्युत (जुए) के कारण महाभारत का युद्ध का भयानक परिणाम मालूम नही है ?

भक्त कवि नरसिंह मेहता ने अपने भजन में कहा है :
काणो ससरो सणगठ वहु;
कथा सुणवा चाल्या सहु। 
किधु कशु अने सांभल्यु कशु;
आंख नु काजल गाले घस्युं।
             
गूढार्थ में कहने वालों का तात्पर्य कुछ और रहता है और जन सामान्य उसका अर्थघटन कुछ और निकाल लेते हैं।     

' एक बार तीव्र अनावृष्टि हुई। इस भयानक अकाल में खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा था। उस समय भगवान गौतम बुद्ध ने लोगों से कहा कि यदि भुख के कारण प्राणों का संकट आ जाए तो ऐसी विकट स्थिति में प्राणों की रक्षा के लिए ' मांस भी खाना पडे तो खा सकते हैं। ' लोगों ने सिर्फ इतना ही सुना कि भगवान ने मांस खाने को कहा है और कुछ लोगों ने इसे भगवान की अनुमति समझ कर हमेशा के लिए मांसभक्षण शुरू कर दिया। '

' छल ' मैं हुं ऐसा भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है। भगवान श्रीकृष्ण को हम प्रेम से छलिया कहतें हैं। बचपन की मधुर बाल लीलाओं में वो छल से गोपीओं का माखन चुरा लेते थे; तो महाभारत के युद्ध के समय भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन इत्यादि सभी को छल से मरवाया। मगध नरेश जरासंध को सीधे, आमने सामने के युद्ध में हराने की बजाय उन्होंने छद्मयुद्ध छापेमारी का सहारा लिया छल से मरवाया। बाहुबली का सर्वस्व, वृन्दा का सतीत्व छीनने की लिए उन्होंने छल का सहारा लिया। बालीवध में ओट में आकर तीर चलाया। उनकी माया का अंग होने के कारण जुआ परमात्मा की विभूति है।

किसी को लग सकता है कि भगवान स्वयं छल करते हैं तो हम क्यों न करें ? परंतु यदि हम ध्यान से समझने का प्रयास करे तो समझ में आएगा की यह सब प्रभु के दिव्य अवतार का हेतु था। #विनाशायच_च_दुष्कृताम्। दुष्टों के विनाश के लिए यह सब कुछ आवश्यक था। उनका अपना कोई निजी स्वार्थ नहीं था।   
 
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆  इदं न मम  🔆

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