देव प्रबोधिनी एकादशी

🙏 सुप्रभात, आज कार्तिक शुक्ल प्रबोधिनी एकादशी सोमवार दिनांक १९.११.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   

प्रबोधिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन।

#देव_प्रबोधिनी_एकादशी :
देवोत्थान एकादशी कार्तिक, शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। दीपावली के बाद आने वाली एकादशी को ही देवोत्थान एकादशी अथवा देवउठान एकादशी या 'प्रबोधिनी एकादशी' कहा जाता है। आषाढ़, शुक्ल पक्ष की एकादशी की तिथि को देव शयन करते हैं और इस कार्तिक, शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं। इसीलिए इसे देवोत्थान (देव-उठनी) एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, जो क्षीरसागर में सोए हुए थे, चार माह उपरान्त जागे थे। विष्णु जी के शयन काल के चार मासों में विवाहादि मांगलिक कार्यों का आयोजन करना निषेध है। हरि के जागने के बाद ही इस एकादशी से सभी शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं।

भगवान विष्णु को चार मास की योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा, शंख, मृदंग आदि वाद्यों की मांगलिक ध्वनि के बीचये श्लोक पढकर जगाते हैं :
#उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द_त्यजनिद्रांजगत्पते।
#त्वयिसुप्तेजगन्नाथ_जगत्_सुप्तमिदंभवेत्॥
#उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह_दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
#हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमङ्गलम्कुरु॥

#तुलसी_विवाह
इस एकादशी के दिन तुलसी विवाहोत्सव भी मानाया जाता है। चातुर्मास के बाद आज के शुभ दिन से विवाहादिशुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं। इसके संदर्भ में कथा यह है कि जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा पतिव्रता स्त्री थी। इसे आशीर्वाद प्राप्त था कि जब तक उसका पतिव्रत भंग नहीं होगा उसका पति जीवित रहेगा। जलंधर पत्नी के पतिव्रत के प्रभाव से विष्णु से कई वर्षों तक युद्ध करता रहा लेकिन पराजित नहीं हुआ तब भगवान विष्णु जलंधर का वेश धारण कर वृंदा के पास गये जिसे वृंदा पहचान न सकी और उसका पतिव्रत भंग हो गया। वृंदा के पतिव्रत भंग होने पर जलंधर मारा गया। वृंदा को जब सत्य का पता चल गया कि विष्णु ने उनके साथ धोखा किया है तो उन्होंने विष्णु को श्राप दिया कि आप पत्थर का बन जाओ।

वृंदा के श्राप से विष्णु शालिग्राम के रूप में परिवर्तित हो गये। उसी समय भगवान श्री हरि वहां प्रकट हुए और कहा आपका शरीर गंडक नदी के रूप में होगा व केश तुलसी के रूप में पूजा जाएगा। आप सदा मेरे सिर पर शोभायमान रहेंगी व लक्ष्मी की भांति मेरे लिए प्रिय रहेंगी आपको #विष्णुप्रिया के नाम से भी जाना जाएगा. उस दिन से मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी का विवाह करवाने से कन्यादान का फल मिलता है और व्यक्ति को विष्णु भगवान की प्रसन्नता प्राप्त होती है. पद्म पुराण में तुलसी विवाह के विषय में काफी विस्तार से बताया गया है।

#पौराणिक_मान्यता
चातुर्मास के दिनों में एक ही जगह रुकना जरुरी है, जैसा कि साधु संन्यासी इन दिनों किसी एक नगर या बस्ती में ठहरकर धर्म प्रचार का काम करते हैं। देवोत्थान एकादशी को यह चातुर्मास पूरा होता है और पौराणिक आख्यान के अनुसार इस दिन देवता भी जाग उठते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन सभी देवता और उनके अधिपति विष्णु सो जाते हैं। फिर चार माह बाद देवोत्थान एकादशी को जागते हैं। देवताओं का शयन काल मानकर ही इन चार महीनों में कोई विवाह, नया निर्माण या कारोबार आदि बड़ा शुभ कार्य आरंभ नहीं होता। इस प्रतीक को चुनौती देते या उपहास उड़ाते हुए युक्ति और तर्क पर निर्भर रहने वाले लोग कह उठते हैं कि देवता भी कभी सोते हैं क्या श्रद्धालु जनों के मन में भी यह सवाल उठता होगा कि देवता भी क्या सचमुच सोते हैं और उन्हें जगाने के लिए उत्सव आयोजन करने होते हैं पर वे एकादशी के दिन सुबह तड़के ही विष्णु औए उनके सहयोगी देवताओं का पूजन करने के बाद शंख- घंटा घड़ियाल बजाने लगते हैं।

पौराणिक कथाए एवं त्योहार लक्षणात्मक है प्रबोधन अर्थात् जागृत करना इसलिये इसे #प्रबोधिनी_एकादशी नाम दिया है। हमारे अंतस्थ राम जागृत हो, हमे अपने उत्तरदायित्व का भान हो इसलिये लक्षणात्मक रूप से हमारे ऋषियों ने भगवान को सुला दिया। वास्तव में देखा जाय तो भगवान को जगाना यानी स्वयं अपने आपको जागृत करना।

शास्त्रकार भी हमे झकजोर के जगाते है वेदों की गर्जना है कि :
#उत्तिष्ठत_जाग्रत_प्राप्य_वरान्निबोधत।
#क्षुरस्य_धारा_निशिता_दुरत्यया_दुर्गं_पथस्तत्कवयो_वदन्ति॥ (कठोपनिषद्)
अर्थात् : उठो, जागो, और जानकार श्रेष्ठ पुरुषों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करो । विद्वान् मनीषी जनों का कहना है कि ज्ञान प्राप्ति का मार्ग उसी प्रकार दुर्गम है जिस प्रकार छुरे के पैना किये गये धार पर चलना।

#स्वामी_विवेकानंद ने कठोपनिषद के मंत्र के आरंभिक अंश ‘#उत्तिष्ठत_जाग्रत …’को लौकिक अर्थ में प्रयोग कर लोकजाग्ररूति महान कार्य किया है।

दिवाली के दिन अंनत दीपक प्रज्वलित किये जाते है, वैसे ही भगवान के विवाह #तुलसिविवाह के आनंद में भी असंख्य दिप प्रज्वलित किये जाते है। देवताओं के लिये प्रज्वलित किये गये इन दीपकों के कारण ही प्रबोधिनी एकादशी #देव_दिवाली के नाम से प्रसिद्ध हुई।

संक्षेप में, प्रबोधिनी एकादशी अर्थात्
•#जीवनकी_घोर_निंद्रा_से_जागने_जगाने_के_दिन।
•#आलस्य_छोड़ने_का_प्रमाद_त्यागने_का_दिन।
•#प्रभुकार्य_के_लिये_कटिबद्ध_बनने_का_दिन,
•#सच्ची_संघनिष्ठा_और_सत्वयुक्त_तत्वपूजा_समजने_का_दिन,
•#जीवन_समर्पित_कर_प्रभु_से_परिणित_होने_का_दिन।
इस प्रकार की जागृत समझ से हम यह त्योहार मनायेंगे तभी इसका भाव (प्रबोधन) सार्थक होंगा।

अयोध्या में #राम_जन्मभूमि पर भव्यदिव्य राममंदिर निर्माण के लिये कटिबद्ध होने के लिये :
#स्वयं_अब_जागकर_हमको_जगाना_देश_है_अपना ....

#संघे_शक्ति_कलियुगे

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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