तेजस्तेजस्विनामहम्

🙏 सुप्रभात, आज कार्तिकशुक्ल लाभपंचमी दिनांक १२.११.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉 
  
तेजस्तेजस्विनामहम्

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवी संपदा एवं विभूतिदर्शन में प्रभु ने कहा है:

#बीजं_मां_सर्वभूतानां_विद्धि_पार्थ_सनातनम्।
#बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्॥ (भ ग ७/१०)
अर्थात् :  हे पार्थ! मुझे तू सब भूतोंका सनातन पुरातन बीज अर्थात् उनकी उत्पत्तिका मूल कारण जान। तथा मैं ही बुद्धिमानोंकी बुद्धि अर्थात् विवेकशक्ति और तेजस्वियों अर्थात् प्रभावशाली पुरुषोंका तेज प्रभाव हूँ।

भगवद्गीता में भगवान कहते है #तेजस्तेजस्विनामहम्: मैं तेजस्वीओ का तेज हुं।
भगवान सूर्य नारायण प्रत्यक्ष देव हैं।     
       
#यदादित्यगतं_तेजो_जगद्भासयतेऽखिलम्।
#यच्चन्द्रमसि_यच्चाग्नौ_तत्तेजो_विद्धि_मामकम्॥।(भ ग १५/१२)
(अतः जो तेज सूर्य में स्थित होकर सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है तथा जो तेज चन्द्रमा में है और अग्नि में है? उस तेज को तुम मेरा ही जानो।)

सूर्य नारायण का उदय होता है, तो संपूर्ण विश्व प्रकाशित हो जाता है। सूर्य नारायण हम से कुछ भी नहीं मांगते और हमें बिना मांगे ही अपनी ऊष्मा और प्रकाश देते हैं, जिससे समस्त प्राणियों में उत्साह, स्फूर्ति और चैतन्य आ जाता है। प्रभु सवित्र सूर्यनारायण के रूप में हमारे द्वार पर शांति से प्रतिक्षा करते हैं और जैसे ही हम द्वार खोलते हैं, तो बिना किसी आवाज के शांति से प्रवेश करते हैं। कितना अद्भुत प्रेम है सूर्यनारायण का। 

सूर्य एक ऐसा तत्त्व है जिसमें ऊष्मा व तेजस्विता है। वह प्रकाश वाला है। प्रकाश का गुण मनुष्यों में भी आना चाहिए। सूर्य से प्रकाशवान और ज्ञानवान बनने की प्रेरणा लेने का प्रयास करना चाहिए। जीवन मे जितनी तेजस्विता की आवश्यकता है उतनी ही शीतलता की भी आवश्यकता है। चन्द्रमा की शीतलता और निर्मलता से भावों में शीतलता और आचारों में निर्मलता लाने का प्रयास करना चाहिए्। जीवन में तेजस्विता और शीतलता का संतुलन बनाए रखना चाहिए।

#जल_देता_है_गर्मी_देता_दुनिया_से_कुछ_कभी_न_लेता।
#समता_का_है_पाठ_पढ़ाए_घर_घर_में_उजियारा_लाए।
#जीव_जंतु_भी_इस_पर_निर्भर_सागर_नदियां_कुएं_निर्झर।
#जग_का_तम_है_दूर_मिटाता_बदरा_में_जा_झट_छुप_जाता।
#जब_निकले_घर_चमके_मेरा_सूरज_करता_नया_सवेरा।

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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