नीतिरस्मि जिगीषताम्
🙏सुप्रभात, कार्तिक शुक्ल दसमी रविवार दिनांक १८.११.२०१८🙏
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#दण्डो_दमयतामस्मि_नीतिरस्मि_जिगीषताम्।
#मौनं_चैवास्मि_गुह्यानां_ज्ञानं_ज्ञानवतामहम्॥ (भ ग १०/३८)
अर्थात् : मैं दमन करनेवालोंका दण्ड (दमन करनेकी शक्ति) हूँ, जीतनेकी इच्छावालोंकी नीति हूँ, गुप्त रखनेयोग्य बातोंमें मौन हूँ और तत्त्वज्ञानीयों का ज्ञान हूँ।
#दण्डो_दमयतामस्मि_नीतिरस्मि_जिगीषताम्।
#मौनं_चैवास्मि_गुह्यानां_ज्ञानं_ज्ञानवतामहम्॥ (भ ग १०/३८)
अर्थात् : मैं दमन करनेवालोंका दण्ड (दमन करनेकी शक्ति) हूँ, जीतनेकी इच्छावालोंकी नीति हूँ, गुप्त रखनेयोग्य बातोंमें मौन हूँ और तत्त्वज्ञानीयों का ज्ञान हूँ।
भगवद्गीता में भगवान कहते है #नीतिरस्मि_जिगीषताम् जीतनेकी इच्छावालों की नीति हूं।
' नीतिरस्मि जिगीषताम्’- नीति का आश्रय लेने से ही मनुष्य विजय प्राप्त करता है और नीति से ही विजय ठहरती है। इसलिए नीति को भगवान ने अपनी विभूति बताया है। उचित समय और उचित स्थान पर उचित कार्य करने की कला को नीति (Policy) कहते हैं। नीति, सोचसमझकर बनाये गये सिद्धान्तों की प्रणाली है जो उचित निर्णय लेने और सम्यक परिणाम पाने में मदद करती है। नीति में अभिप्राय का स्पष्ट उल्लेख होता है।
#नीति :
1. उचित या ठीक रास्ते पर ले जाने या ले चलने की क्रिया या ढंग; नीतिशास्त्र
2. आचार-व्यवहार; बरताव का ढंग
3. राष्ट्र या समाज की उन्नति या हित के लिए निश्चित आचार-व्यवहार
4. सदाचार के नियम तथा रीतियाँ; अच्छा चाल चलन; नैतिकता Morality
5. राज्य या शासन की रक्षा तथा व्यवस्था के लिए तय किए गए नियम तथा सिद्धांत; राजनीति
6. अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए किया जाने वाला आचरण; चतुराई भरी चाल
7. किसी कार्य को संपन्न करने का ढंग या विधि; (Policy)
8. हिम्मत; तरकीब; युक्ति
9. किसी कार्य की उपलब्धि
10. चाल
11. किसी संस्था या सरकार द्वारा कार्य संचालन के लिए अपनाई जाने वाली कार्य पद्धति
12. उपाय; युक्ति; योजना
13. संबंध; सहारा
14. औचित्य।
2. आचार-व्यवहार; बरताव का ढंग
3. राष्ट्र या समाज की उन्नति या हित के लिए निश्चित आचार-व्यवहार
4. सदाचार के नियम तथा रीतियाँ; अच्छा चाल चलन; नैतिकता Morality
5. राज्य या शासन की रक्षा तथा व्यवस्था के लिए तय किए गए नियम तथा सिद्धांत; राजनीति
6. अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए किया जाने वाला आचरण; चतुराई भरी चाल
7. किसी कार्य को संपन्न करने का ढंग या विधि; (Policy)
8. हिम्मत; तरकीब; युक्ति
9. किसी कार्य की उपलब्धि
10. चाल
11. किसी संस्था या सरकार द्वारा कार्य संचालन के लिए अपनाई जाने वाली कार्य पद्धति
12. उपाय; युक्ति; योजना
13. संबंध; सहारा
14. औचित्य।
#सर्वजन_हिताय_सर्वजन_सुखाय
हमारी भव्यदिव्य भारतिय संस्कृति में ' सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय ' के सिद्धांतों पर शुक्राचार्य, विदुर, कौटिल्य, चाणक्य जैसे विद्वानों ने जीवन के प्रत्येक विषय पर मार्गदर्शन करने वाले नीतिशास्त्रों की रचना की है जिसमे आज की सब समस्याओं का समाधान है।
हमारी भव्यदिव्य भारतिय संस्कृति में ' सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय ' के सिद्धांतों पर शुक्राचार्य, विदुर, कौटिल्य, चाणक्य जैसे विद्वानों ने जीवन के प्रत्येक विषय पर मार्गदर्शन करने वाले नीतिशास्त्रों की रचना की है जिसमे आज की सब समस्याओं का समाधान है।
#नीति_आयोग :
भारत सरकार ने अपनी भविष्य की योजनाओं का नीतिनिर्धारण और क्रियान्वयन के लिये पूर्ववर्ती योजना आयोग के स्थान पर 2015 से नाम बदलकर नीति आयोग (#राष्ट्रीय_भारत_परिवर्तन_संस्थान, #National_Institute_For_Transforming_India #NITI) नामक संस्थान की।स्थापना की गई है।
भारत सरकार ने अपनी भविष्य की योजनाओं का नीतिनिर्धारण और क्रियान्वयन के लिये पूर्ववर्ती योजना आयोग के स्थान पर 2015 से नाम बदलकर नीति आयोग (#राष्ट्रीय_भारत_परिवर्तन_संस्थान, #National_Institute_For_Transforming_India #NITI) नामक संस्थान की।स्थापना की गई है।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
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