विभूति दर्शन ' व्यवसायोऽस्मि '
🙏 सुप्रभात, आज अश्विन कृष्णपक्ष वाक् द्वादशी दिनांक ४.११.२०१८ रविवार 🙏
#वाक्_द्वादशी वाक् याने वाणी, आज का दिन वाणी की देवी सरस्वती का आराधना करने का दिन। दिपावली महोत्सव का प्रारंभ सरस्वती आराधना याने ज्ञान की आराधना से होता है। यदि विवेक रूपी ज्ञान होतो प्रतिकूलता में भी प्रसन्न रह सकते है। यदि समज का अभाव होतो अनुकूलता मे भी आंनद की अनुभूति नही होती।
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूतिदर्शन में प्रभु ने कहा है:
#द्यूतं_छलयतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्।
#जयोऽस्मि_व्यवसायोऽस्मि_सत्त्वं_सत्त्ववतामहम्॥ (भ ग १०/३६)
भावार्थ : छल करनेवालोंमें जो पासोंसे खेलना आदि द्यूत और तेजस्वियोंका मैं तेज हूँ। जीतनेवालोंका मैं विजय हूँ। निश्चय करनेवालोंका निश्चय (उद्यमशीलोंका उद्यम) हूँ और सत्त्वयुक्त पुरुषोंका अर्थात् सात्त्विक पुरुषोंका मैं सत्त्वगुण हूँ।
अभीतक हमने उपरोक्त श्लोक में धृत, तेजस्विता, जय-विजय पर चिंतन किया आगे प्रभु ने कहा है #व्यवसायोऽस्मि मैं उद्यमशीलों का उद्यम हूं।
व्यवसाय, उद्योग का दुसरा नाम ही साहस है। साहसी व्यक्ति ही उद्योग कर सकते हैं। उद्योग में नुकसान सहने की शक्ति जिसमें होती हैं वहीं उसका फायदा उठा सकते हैं। उद्यम को सफलतापूर्वक चलाने के लिए बहुत से गुणों की आवश्यकता पड़ सकती है।
★ व्यवसाय की दुनिया में अवसर आते जाते रहते हैं। एक उद्यमी कार्य करने वाला व्यक्ति होना चाहिए। उसे आगे बढ़ाकर काम शुरू कर अवसर का लाभ उठाना चाहिए। एक बार अवसर खो देने पर दुबारा नहीं आता। अतः उद्यमी के लिए पहल करना आवश्यक है।
★ जोखिम उठाने की इच्छाशक्ति : प्रत्येक व्यवसाय में जोखिम रहता है। इसका अर्थ यह है कि व्यवसायी सफल भी हो सकता है और असफल भी। दूसरे शब्दों में यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक व्यवसाय में लाभ ही हो। यह तत्व व्यक्ति को व्यवसाय करने से रोकता है। तथापि, एक उद्यमी को सदैव जोखिम उठाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए और व्यवसाय चलाकर उसमें सफलता प्राप्त करनी चाहिए।
★ अनुभव से सीखने की योग्यता : एक उद्यमी गलती कर सकता है, किन्तु एक बार गलती हो जाने पर फिर वह दोहराई न जाय। क्योंकि ऐसा होने पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अतः अपनी गलतियों से सबक लेना चाहिए। एक उद्यमी में भी अनुभव से सीखने की योग्यता होनी चाहिए।
★ अभिप्रेरणा : अभिप्रेरणा सफलता की कुंजी है। जीवन के हर कदम पर इसकी आवश्यकता पड़ती है। एक बार जब आप किसी कार्य को करने के लिए अभिप्रेरित हो जाते हैं तो उस कार्य को समाप्त करने के बाद ही दम लेते हैं। उदाहरण के लिए, कभी-कभी आप किसी कहानी अथवा उपन्यास को पढ़ने में इतने खो जाते हैं कि उसे खत्म करने से पहले सो नहीं पाते। इस प्रकार की रूचि अभिप्रेरणा से ही उत्पन्न होती है। एक सफल उद्यमी का यह एक आवश्यक गुण है।
★ आत्मविश्वास : जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने आप में आत्मविश्वास उत्पन्न करना चाहिए। एक व्यक्ति जिसमें आत्मविश्वास की कमी होती है वह न तो अपने आप कोई कार्य कर सकता है और न ही किसी अन्य को कार्य करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
★ निर्णय लेने की योग्यता : व्यवसाय चलाने में उद्यमी को बहुत से निर्णय लेने पड़ते हैं। अतः उसमें समय रहते हुए उपयुक्त निर्णय लेने की योग्यता होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में उचित समय पर उचित निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। आज की दुनिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं यदि एक उद्यमी में समयानुसार निर्णय लेने की योग्यता नहीं होती है, तो वह आये हुए अवसर को खो देगा और उसे हानि उठानी पड़ सकती है।
#भारत_कि_अर्थव्यवस्था : व्यपार वाणिज्य
भारत वर्तमान में व्यापार वाणिज्य के क्षेत्रमे तेजी से बढ़ने वाली वैश्विक शक्ति बन रहा है। हमारा सकल घरेलू उत्पादन ८.२% विश्व का सबसे अधिक है। आज हम विश्व की 5 सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था में से एक बन गये है। यह रफ्तार अभी आगे औऱ भी गतिशील हो सकती है। आज online Payment system में हमारा #RUPAY_CARD वैश्विक MASTER और VISA CARD को चुनोतियाँ देकर सर्वोच्च सिस्टम बनने कि दिशा में अग्रसर है। वर्तमान सरकार की क्रंतिकारी स्वच्छ कार्यप्रणाली से वैश्विक Easy to do Business में भारत ने २३ पादान चढ़कर ७७ वे नम्बर पर स्थान पाया है। जो २०१० में १३९ वे स्थान पर था। आनेवाले 5 वर्षो में ३० वे पायदान से ऊपर लाने का सरकार का।लक्षयंक है।
यह सारे लक्षयंक केवल सरकारी प्रयासों से संभव नही है इसमें हमारा भी सहयोग चाहिए। जो मिल भी रहा है। पिछले १ माह में GST टैक्स की वसूली १ लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा है। यह बढ़ते व्यापार का परिणाम है। आनेवाले दिनों में हमारा व्यपार धंधा उद्योग बढ़ता रहे चारों तरफ खुशहाली बनी रहे यही माँ लक्ष्मी से प्राथना और शुभकामनाएं।
ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में मनुज नहीं लाया है,
अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।
- रामधारीसिंह दिनकर
दीपावली महापर्व के आरंभिक वाक् द्वादशी पर्व पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏
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#वाक्_द्वादशी वाक् याने वाणी, आज का दिन वाणी की देवी सरस्वती का आराधना करने का दिन। दिपावली महोत्सव का प्रारंभ सरस्वती आराधना याने ज्ञान की आराधना से होता है। यदि विवेक रूपी ज्ञान होतो प्रतिकूलता में भी प्रसन्न रह सकते है। यदि समज का अभाव होतो अनुकूलता मे भी आंनद की अनुभूति नही होती।
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूतिदर्शन में प्रभु ने कहा है:
#द्यूतं_छलयतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्।
#जयोऽस्मि_व्यवसायोऽस्मि_सत्त्वं_सत्त्ववतामहम्॥ (भ ग १०/३६)
भावार्थ : छल करनेवालोंमें जो पासोंसे खेलना आदि द्यूत और तेजस्वियोंका मैं तेज हूँ। जीतनेवालोंका मैं विजय हूँ। निश्चय करनेवालोंका निश्चय (उद्यमशीलोंका उद्यम) हूँ और सत्त्वयुक्त पुरुषोंका अर्थात् सात्त्विक पुरुषोंका मैं सत्त्वगुण हूँ।
अभीतक हमने उपरोक्त श्लोक में धृत, तेजस्विता, जय-विजय पर चिंतन किया आगे प्रभु ने कहा है #व्यवसायोऽस्मि मैं उद्यमशीलों का उद्यम हूं।
व्यवसाय, उद्योग का दुसरा नाम ही साहस है। साहसी व्यक्ति ही उद्योग कर सकते हैं। उद्योग में नुकसान सहने की शक्ति जिसमें होती हैं वहीं उसका फायदा उठा सकते हैं। उद्यम को सफलतापूर्वक चलाने के लिए बहुत से गुणों की आवश्यकता पड़ सकती है।
★ व्यवसाय की दुनिया में अवसर आते जाते रहते हैं। एक उद्यमी कार्य करने वाला व्यक्ति होना चाहिए। उसे आगे बढ़ाकर काम शुरू कर अवसर का लाभ उठाना चाहिए। एक बार अवसर खो देने पर दुबारा नहीं आता। अतः उद्यमी के लिए पहल करना आवश्यक है।
★ जोखिम उठाने की इच्छाशक्ति : प्रत्येक व्यवसाय में जोखिम रहता है। इसका अर्थ यह है कि व्यवसायी सफल भी हो सकता है और असफल भी। दूसरे शब्दों में यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक व्यवसाय में लाभ ही हो। यह तत्व व्यक्ति को व्यवसाय करने से रोकता है। तथापि, एक उद्यमी को सदैव जोखिम उठाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए और व्यवसाय चलाकर उसमें सफलता प्राप्त करनी चाहिए।
★ अनुभव से सीखने की योग्यता : एक उद्यमी गलती कर सकता है, किन्तु एक बार गलती हो जाने पर फिर वह दोहराई न जाय। क्योंकि ऐसा होने पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अतः अपनी गलतियों से सबक लेना चाहिए। एक उद्यमी में भी अनुभव से सीखने की योग्यता होनी चाहिए।
★ अभिप्रेरणा : अभिप्रेरणा सफलता की कुंजी है। जीवन के हर कदम पर इसकी आवश्यकता पड़ती है। एक बार जब आप किसी कार्य को करने के लिए अभिप्रेरित हो जाते हैं तो उस कार्य को समाप्त करने के बाद ही दम लेते हैं। उदाहरण के लिए, कभी-कभी आप किसी कहानी अथवा उपन्यास को पढ़ने में इतने खो जाते हैं कि उसे खत्म करने से पहले सो नहीं पाते। इस प्रकार की रूचि अभिप्रेरणा से ही उत्पन्न होती है। एक सफल उद्यमी का यह एक आवश्यक गुण है।
★ आत्मविश्वास : जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने आप में आत्मविश्वास उत्पन्न करना चाहिए। एक व्यक्ति जिसमें आत्मविश्वास की कमी होती है वह न तो अपने आप कोई कार्य कर सकता है और न ही किसी अन्य को कार्य करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
★ निर्णय लेने की योग्यता : व्यवसाय चलाने में उद्यमी को बहुत से निर्णय लेने पड़ते हैं। अतः उसमें समय रहते हुए उपयुक्त निर्णय लेने की योग्यता होनी चाहिए। दूसरे शब्दों में उचित समय पर उचित निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। आज की दुनिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं यदि एक उद्यमी में समयानुसार निर्णय लेने की योग्यता नहीं होती है, तो वह आये हुए अवसर को खो देगा और उसे हानि उठानी पड़ सकती है।
#भारत_कि_अर्थव्यवस्था : व्यपार वाणिज्य
भारत वर्तमान में व्यापार वाणिज्य के क्षेत्रमे तेजी से बढ़ने वाली वैश्विक शक्ति बन रहा है। हमारा सकल घरेलू उत्पादन ८.२% विश्व का सबसे अधिक है। आज हम विश्व की 5 सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था में से एक बन गये है। यह रफ्तार अभी आगे औऱ भी गतिशील हो सकती है। आज online Payment system में हमारा #RUPAY_CARD वैश्विक MASTER और VISA CARD को चुनोतियाँ देकर सर्वोच्च सिस्टम बनने कि दिशा में अग्रसर है। वर्तमान सरकार की क्रंतिकारी स्वच्छ कार्यप्रणाली से वैश्विक Easy to do Business में भारत ने २३ पादान चढ़कर ७७ वे नम्बर पर स्थान पाया है। जो २०१० में १३९ वे स्थान पर था। आनेवाले 5 वर्षो में ३० वे पायदान से ऊपर लाने का सरकार का।लक्षयंक है।
यह सारे लक्षयंक केवल सरकारी प्रयासों से संभव नही है इसमें हमारा भी सहयोग चाहिए। जो मिल भी रहा है। पिछले १ माह में GST टैक्स की वसूली १ लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा है। यह बढ़ते व्यापार का परिणाम है। आनेवाले दिनों में हमारा व्यपार धंधा उद्योग बढ़ता रहे चारों तरफ खुशहाली बनी रहे यही माँ लक्ष्मी से प्राथना और शुभकामनाएं।
ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में मनुज नहीं लाया है,
अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।
- रामधारीसिंह दिनकर
दीपावली महापर्व के आरंभिक वाक् द्वादशी पर्व पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
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