पाण्डवानां_धनंजयः


🙏 सुप्रभात, आज कार्तिक शुक्ल सप्तमी बुधवार दिनांक १४.११.२०१८ 🙏
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉  
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#वृष्णीनां_वासुदेवोऽस्मि_पाण्डवानां_धनंजयः।
#मुनीनामप्यहं_व्यासः_कवीनामुशना_कविः॥ (भ ग १०/३७)
अर्थात् : वृष्णिवंशियोंमें वासुदेव और पाण्डवोंमें धनञ्जय मैं हूँ। मुनियोंमें वेदव्यास और कवियोंमें शुक्राचार्य भी मैं हूँ।
भगवद्गीता में भगवान कहते है #पाण्डवानां_धनंजयः पांडवों में मैं धनञ्जय हुँ।
#धनञ्जय_अर्जुन महाभारत के मुख्य पात्रों में से एक थे। महाराज पांडु एवं रानी कुन्ती के वह तीसरे पुत्र और सबसे अच्छे धर्नुधारी थे। वे द्रोणाचार्य के श्रेष्ठ शिष्य थे।
महाभारत का प्रसंग :
अज्ञातवास के समय जब पांडव विराट नगर में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे, तब दुर्योधन द्वारा विराट नगर पर आक्रमण किया गया। ऐसे में बृहन्नला के वेष में अर्जुन राजकुमार उत्तर के साथ कौरव सेना का सामना करने के लिए गए। पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र एक शमी वृक्ष पर छिपाकर रखे थे। युद्ध से पूर्व अर्जुन अस्त्र-शस्त्र लेने के लिए वृक्ष की ओर गए। कौरवों ने बृहन्नला वेषधारी अर्जुन को रथ पर चढ़कर शमी वृक्ष की ओर जाते हुए देखा तो वे अर्जुन के आने की आशंका से मन ही मन बहुत डरे। तब द्रोणाचार्य ने पितामह भीष्म से कहा- “गंगापुत्र यह जो स्त्रीवेष में दिखाई दे रहा है, वह अर्जुन सा जान पड़ता है।”
उस समय घमंडी राजकुमार उत्तर को मन मे प्रश्न जगा की नृत्य शिखाने वाली बृहन्नला (अर्जुन) युद्ध मे मेर क्या मदद कर सकेंगा ?
तब अर्जुन रथ को शमी वृक्ष के पास ले गए और उत्तर से बोले- “राजकुमार मेरी आज्ञा मानकर तुम जल्दी ही वृक्ष पर से धनुष उतारो।” उत्तर को वहाँ पाँच धनुष दिखाई दिए। उत्तर पांडवों के उन धनुषों को लेकर नीचे उतरे और अर्जुन के आगे रख दिए। जब कपड़े में लपेटे हुए उन धनुषों को खोला तो सब ओर से दिव्य कांति निकली।
•तब अर्जुन ने कहा- “राजकुमार यह अर्जुन का गांडीव धनुष है।”
•राजकुमार उत्तर ने नपुसंक का वेष धरे हुए अर्जुन (बृहन्नला) से कहा- “यदि ये धनुष पांडवों के हैं तो पांडव कहाँ हैं ?”
•तब अर्जुन ने कहा- “मैं स्वयं अर्जुन हूँ।”
•उत्तर ने पूछा कि- “मैंने अर्जुन के कई नाम सुने हैं। यदि तुम मुझे उन नामों का व उन नामों के कारण बता दो तो मुझे तुम्हारी बात पर विश्वास हो सकता है।”
•राजकुमार उत्तर के पूछने पर अर्जुन ने अपने निम्न नाम बताये-
1. #धनञ्जय – राजसूय यज्ञ के समय बहुत-से राजाओं को जीतने के कारण अर्जुन का यह नाम पड़ा।
2. #कपिध्वज – महावीर हनुमान अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान रहते थे, अतः इनका नाम कपिध्वज पड़ा।
3. #गुडाकेश – ‘गुडा’ कहते हैं निद्रा को। अर्जुन ने निद्रा को जीत लिया था, इसी से उनका यह नाम पड़ा था।
4. #पार्थ – अर्जुन की माता कुंती का दूसरा नाम ‘पृथा’ था, इसीलिए वे पार्थ कहलाये।
5. #परन्तप – जो अपने शत्रुओं को ताप पहुँचाने वाला हो, उसे परन्तप कहते हैं।
6. #कौन्तेय – कुंती के नाम पर ही अर्जुन कौन्तेय कहे जाते हैं।
7. #पुरुषर्षभ – ‘ऋषभ’ श्रेष्ठता का वाचक है। पुरुषों में जो श्रेष्ठ हो, उसे पुरुषर्षभ कहते हैं।
8. #भारत – भरतवंश में जन्म लेने के कारण ही अर्जुन का भारत नाम हुआ।
9. #किरीटी – प्राचीन काल में दानवों पर विजय प्राप्त करने पर इन्द्र ने इन्हें किरीट (मुकुट) पहनाया था, इसीलिए अर्जुन किरीटी कहे गये।
10. #महाबाहो – आजानुबाहु होने के कारण अर्जुन महाबाहो कहलाये।
11. #फाल्गुन – फाल्गुन का महीना एवं फल्गुनः इन्द्रका नामान्तर भी है। अर्जुन इन्द्र के पुत्र हैं। अतः उन्हें फाल्गुन भी कहा जाता है।
12. #सव्यसाची – महाभारत में अर्जुन के इस नाम की व्याख्या इस प्रकार है-
#उभौ_ये_दक्षिणौ_पाणी_गांडीवस्य_विकर्षणे।
#तेन_देव_मनुष्येषु_सव्यसाचीति_मां_विदु:॥
अर्थात् : जो दोनों हाथों से धनुष का संधान कर सके, वह देव मनुष्य सव्यसाची कहा जाता है।
योगेश्वर श्री कृष्ण के #श्रीमद्भगवगिता के जीवनलक्षी विचारों का सार्थित्व स्वीकार कर, महापराक्रमी अर्जुन से प्रेरणा लेकर हम भी कर्मयोगी बन जीवनसंग्राम में यशस्वी बनें ऎसा भावसंकल्प।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆  इदं न मम  🔆
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