नरक चतुर्दशी २०७४
🙏 सुप्रभात, आज अश्विन कृष्णपक्ष नरक चतुर्दशी दिनांक ६.११.२०१८ मंगलवार 🙏
#नरक चतुर्दशी या #कालीचौदस यह पांच पर्वों की श्रृंखला दीपावली का द्वितीय त्यौहार है। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज।
#वसुदेव_सुत_देवं_नरकासुर_मर्दनमः।
#देवकी_परमानन्दं_कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम्॥
महाभारत कालमें के आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीयों की बारत सजायी जाती है।
प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नामक दैत्य था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया। वह संतों को भी त्रास देने लगा। महिलाओं पर अत्याचार करने लगा। उसने संतों आदि की १६१०० स्त्रीयों को भी बंदी बना लिया। जब उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नराकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान दिया। लेकिन नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया तथा उन्हीं की सहायता से नरकासुर का वध कर दिया।
इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। उसी की खुशी में दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीए जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा।
यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर नहाने के पानी में चिचड़ी (अपामार्ग) के पत्ते डाले जाते है। इस स्नान को अभ्यंग स्नान कहते है। इस दिन महाकाली की पूजा का महत्व है। तंत्र पूजा के साधक इस रात माँ काली की विधि विधान से आराधना कर तंत्रसिद्धि की साधना करते है।
॥🕉 ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:॥
॥🕉 जयंति मंगला काली भद्रकाली कपालिनी॥
दीपावली महापर्व के द्वितीय पर्व नरक चतुर्दशी, कालीचौदस, छोटी दिवाली पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏
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🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
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#वसुदेव_सुत_देवं_नरकासुर_मर्दनमः।
#देवकी_परमानन्दं_कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम्॥
महाभारत कालमें के आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीयों की बारत सजायी जाती है।
प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नामक दैत्य था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया। वह संतों को भी त्रास देने लगा। महिलाओं पर अत्याचार करने लगा। उसने संतों आदि की १६१०० स्त्रीयों को भी बंदी बना लिया। जब उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नराकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान दिया। लेकिन नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया तथा उन्हीं की सहायता से नरकासुर का वध कर दिया।
इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। उसी की खुशी में दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीए जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा।
यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर नहाने के पानी में चिचड़ी (अपामार्ग) के पत्ते डाले जाते है। इस स्नान को अभ्यंग स्नान कहते है। इस दिन महाकाली की पूजा का महत्व है। तंत्र पूजा के साधक इस रात माँ काली की विधि विधान से आराधना कर तंत्रसिद्धि की साधना करते है।
॥🕉 ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:॥
॥🕉 जयंति मंगला काली भद्रकाली कपालिनी॥
दीपावली महापर्व के द्वितीय पर्व नरक चतुर्दशी, कालीचौदस, छोटी दिवाली पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
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