धनत्रयोदशी २०७४
🙏 सुप्रभात, आज अश्विन कृष्णपक्ष वसुबारस-धनत्रयोदशी दिनांक २५.१०.२०१९ शुक्रवार 🙏
#धनत्रयोदशी या #धनतेरस यह पांच पर्वों की श्रृंखला दीपावली का प्रथम त्यौहार है। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज। अश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को ' धनतेरस ' या ' धनत्रयोदशी ' के नाम से जाना जाता है। आज ही के दिन आयुर्वेद, आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देव #धनवंतरी का अवतरण हुआ था। भारत सरकार ने धनतेरस को #राष्ट्रीय_आयुर्वेद_दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है।
धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की मान्यता और परम्परा है। इस अवसर पर लोग धनिया के बीज खरीद कर भी घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।
धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है; जिसके सम्भव न हो पाने पर लोग चांदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि चांदी यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है।
धनतेरस के दिन दीप जलाककर भगवान धन्वन्तरि की पूजा करें। भगवान धन्वन्तरी से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने हेतु प्रार्थना करें। दीपावली महापर्व के आरंभिक धनत्रयोदशी पर्व पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏
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🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
#धनत्रयोदशी या #धनतेरस यह पांच पर्वों की श्रृंखला दीपावली का प्रथम त्यौहार है। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज। अश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को ' धनतेरस ' या ' धनत्रयोदशी ' के नाम से जाना जाता है। आज ही के दिन आयुर्वेद, आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देव #धनवंतरी का अवतरण हुआ था। भारत सरकार ने धनतेरस को #राष्ट्रीय_आयुर्वेद_दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
#ॐ_धन्वंतराये_नमः॥
#ॐ_नमो_भगवते_महासुदर्शनाय_वासुदेवाय_धन्वंतराये:।
#अमृतकलश_हस्ताय_सर्व_भयविनाशाय_सर्व_रोगनिवारणाय॥
#त्रिलोकपथाय_त्रिलोकनाथाय_श्री_महाविष्णुस्वरूप।
#श्रीधनवंतरी_स्वरूप_श्री_श्री_श्री_औषधचक्र_नारायणाय_नमः॥
(अर्थात् परम भगवन को, जिन्हें सुदर्शन वासुदेव धन्वंतरि कहते हैं, जो अमृत कलश लिए हैं, सर्व भयनाशक हैं, सर्व रोग नाश करते हैं, तीनों लोकों के स्वामी हैं और उनका निर्वाह करने वाले हैं; उन विष्णु स्वरूप धन्वंतरि को सादर नमन है।)धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है।
धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की मान्यता और परम्परा है। इस अवसर पर लोग धनिया के बीज खरीद कर भी घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।
धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है; जिसके सम्भव न हो पाने पर लोग चांदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि चांदी यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है।
धनतेरस के दिन दीप जलाककर भगवान धन्वन्तरि की पूजा करें। भगवान धन्वन्तरी से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने हेतु प्रार्थना करें। दीपावली महापर्व के आरंभिक धनत्रयोदशी पर्व पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
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