RIP
RIP (Rest In Peace) श्रद्धांजलि यह सेमेटिक Semitic विचारधारा वाले इस्लाम और क्रिश्चन धर्मके तत्वज्ञान पर आधारित है। जिसके अनुशार कयामत के दिन तक जीव कब्र में आराम करता है। कयामत की रात को जीव को #अल्लाह #ईशु न्याय कर उनके कर्मो के अनुशार #जन्नत या #दोजख के रूपमे स्वर्ग-नरक की गति पर्दान करते है ऎसी उनकी मान्यता है।
इस मान्यतानुसार क्रिश्चन संस्कृति में जीव को इंसाफ मिलने तक कब्र में शांति मिले याने #Rest_In_Peace #RIP इस प्रकार की श्रद्धांजलि अर्पित दी जाती है।
जबकि हम हमारी सनातन वैदिक संस्कृति को तत्वतः समजे बगैर अंग्रेजों का अंधानुकरण कर हमारे सनातनी धर्मविलंबियो को 'RIP' लिखकर श्रद्धांजलि देकर हम अपने आपको आधुनिक समज कर समाधान मानते है।
लेकिन "RIP" यह हमारी सनातन वैदिक संस्कृति का तत्वज्ञान नही है। हमारी संस्कृति अनुशार हम पुनर्जन्म के शाश्वत सिद्धांत को मानते है। जिसके अनुशार :
#जातस्य_हि_ध्रुवो_मृत्युर्ध्रुवं_जन्म_मृतस्य_च।
#तस्मादपरिहार्येऽर्थे_न_त्वं_शोचितुमर्हसि॥ (भ गी २/२७)
(भावार्थ : जिसने जन्म लिया है उसका मरण (ध्रुव) निश्चित है और जो मर गया है उसका जन्म (ध्रुव) निश्चित है इसलिये यह जन्ममरणरूप भाव अपरिहार्य है अर्थात् किसी प्रकार भी इसका प्रतिकार नहीं किया जा सकता इस अपरिहार्य विषयके निमित्त तुझे शोक करना उचित नहीं।)
याने हमारे वैदिक सनातन संस्कृति अनुशार जीव शाश्वत और सनातन है
#वासांसि_जीर्णानि_यथा_विहाय_नवानि_गृह्णाति_नरोऽपराणि।
#तथा_शरीराणि_विहाय_जीर्णा_न्यन्यानि_संयाति_नवानि_देही॥ (भ ग २/२२)
(भावार्थ : जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है।) जीव के मृत्यु के पश्चात उसके कर्मानुसार 84 लक्ष योनि मे किसी एक मे जन्म लेता है।
इसलिए हमारी संस्कृति अनुशार श्रद्धांजलि में भगवान से मृतात्मा को सद्गति प्रदान करने की श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
सोचिये हम RIP लिखकर जाने अनजाने में Semitic विचारधारा के तत्वज्ञान को महत्व देते है।

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