सत्त्वं_सत्त्ववतामहम्
🙏सुप्रभात, कार्तिकशुक्ल षष्टी मंगलवार दिनांक १३.११.२०१🙏
#सूर्योपासनाके_महापर्व_छठपूजा पर तेजस्वि जीवन की शुभकामनाएं एवं अभिनंदन
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#द्यूतं_छलयतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्।
#जयोऽस्मि_व्यवसायोऽस्मि_सत्त्वं_सत्त्ववतामहम्॥ (भ ग १०/३६)
भावार्थ : छल करनेवालोंमें जो पासोंसे खेलना आदि द्यूत और तेजस्वियोंका मैं तेज हूँ। जीतनेवालोंका मैं विजय हूँ। निश्चय करनेवालोंका निश्चय (उद्यमशीलोंका उद्यम) हूँ और सत्त्वयुक्त पुरुषोंका अर्थात् सात्त्विक पुरुषोंका मैं सत्त्वगुण हूँ।
श्रीमद् भगवद्गीता मे प्रभु ने कहा है #सत्त्वं_सत्त्ववतामहम् मैं सात्विक पुरुषों का सात्विक भाव हुं।
मानव मात्र के स्वभाव में तीन गुण होते हैं। सत्व गुण, रजो गुण और तमो गुण।
★ जिसमें #सत्वगुण की प्रबलता होती हैं, वह सदैव सबके कल्याण के विषय में सोचते रहता है।
★ जिसमें #रजोगुण की प्रबलता होती हैं वह अपने बारे में ही सोचते रहता है
★ और जिसमें #तमोगुण की प्रबलता होती हैं उसमें आलस्य, प्रमाद, की प्रबलता होती हैं।
◆ यदि कोई व्यक्ति अपने बिमार के लिए डोक्टर के पास जाकर बिनती करता है कि वह स्वयं उसके घर आकर, बिमार मां की जांच कर दवा दे। यदि डॉक्टर सात्विक स्वभाव का होगा तो तुरंत चलने के लिए तैयार हो जाएगा।
◆ यदि रजो गुणी होगा तो वह कहेगा कि मैं 500 रुपये विजिट फीस लुंगा।
◆ और यदि वह तमो गुणी होंगा तो कहेगा कि पहले 500 रुपये दो तो ही आउंगा।
गीताकार ने कहा है
#सर्वद्वारेषु_देहेऽस्मिन्प्रकाश_उपजायते।
#ज्ञानं_यदा_तदा_विद्याद्विवृद्धं_सत्त्वमित्युत॥
अर्थात् : जब इस मनुष्यशरीरमें सब द्वारों (इन्द्रियों और अन्तःकरण) में प्रकाश (स्वच्छता) और ज्ञान (विवेक) प्रकट हो जाता है तब जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा हुआ है।
महात्मा गांधी, श्रीमद् राज चंद्र को अपना गुरु मानते थे। श्रीमद् राज चंद्र अपने परिवार के दबाव में परिवार के पारंपरिक हीरो का व्यापार करते थे। एक बार एक हीरो के व्यापारी ने उनके साथ लिखित में एक करार किया। जिसके अनुसार उस व्यापारी को, श्रीमद् राज चंद्र को लाखों रुपये के हीरे देने थे। लेकिन जब देने का समय आ गया तो हीरो के भाव अत्यधिक बढ़ गये। करार के अनुसार यदि वह हीरे देता तो उसका दिवाला निकल जाता। उस की परिस्थिति बहुत दयनीय हो गई। यह समाचार श्रीमद् राज चंद्र को मिले। उन्होंने तुरंत ही व्यापारी को बुलाया और कहा कि जिस करार के कारण किसी के प्राण संकट में आ जाए और उसका परिवार रस्ते पर आ जाए, ऐसा धन मुझे नहीं चाहिए। उन्होंने उस करारनामे को उसके सामने फाड़ डाला। और व्यापारी को करार से मुक्त कर दिया।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏
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#सूर्योपासनाके_महापर्व_छठपूजा पर तेजस्वि जीवन की शुभकामनाएं एवं अभिनंदन
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शन में प्रभु ने कहा है :
#द्यूतं_छलयतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्।
#जयोऽस्मि_व्यवसायोऽस्मि_सत्त्वं_सत्त्ववतामहम्॥ (भ ग १०/३६)
भावार्थ : छल करनेवालोंमें जो पासोंसे खेलना आदि द्यूत और तेजस्वियोंका मैं तेज हूँ। जीतनेवालोंका मैं विजय हूँ। निश्चय करनेवालोंका निश्चय (उद्यमशीलोंका उद्यम) हूँ और सत्त्वयुक्त पुरुषोंका अर्थात् सात्त्विक पुरुषोंका मैं सत्त्वगुण हूँ।
श्रीमद् भगवद्गीता मे प्रभु ने कहा है #सत्त्वं_सत्त्ववतामहम् मैं सात्विक पुरुषों का सात्विक भाव हुं।
मानव मात्र के स्वभाव में तीन गुण होते हैं। सत्व गुण, रजो गुण और तमो गुण।
★ जिसमें #सत्वगुण की प्रबलता होती हैं, वह सदैव सबके कल्याण के विषय में सोचते रहता है।
★ जिसमें #रजोगुण की प्रबलता होती हैं वह अपने बारे में ही सोचते रहता है
★ और जिसमें #तमोगुण की प्रबलता होती हैं उसमें आलस्य, प्रमाद, की प्रबलता होती हैं।
◆ यदि कोई व्यक्ति अपने बिमार के लिए डोक्टर के पास जाकर बिनती करता है कि वह स्वयं उसके घर आकर, बिमार मां की जांच कर दवा दे। यदि डॉक्टर सात्विक स्वभाव का होगा तो तुरंत चलने के लिए तैयार हो जाएगा।
◆ यदि रजो गुणी होगा तो वह कहेगा कि मैं 500 रुपये विजिट फीस लुंगा।
◆ और यदि वह तमो गुणी होंगा तो कहेगा कि पहले 500 रुपये दो तो ही आउंगा।
गीताकार ने कहा है
#सर्वद्वारेषु_देहेऽस्मिन्प्रकाश_उपजायते।
#ज्ञानं_यदा_तदा_विद्याद्विवृद्धं_सत्त्वमित्युत॥
अर्थात् : जब इस मनुष्यशरीरमें सब द्वारों (इन्द्रियों और अन्तःकरण) में प्रकाश (स्वच्छता) और ज्ञान (विवेक) प्रकट हो जाता है तब जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा हुआ है।
महात्मा गांधी, श्रीमद् राज चंद्र को अपना गुरु मानते थे। श्रीमद् राज चंद्र अपने परिवार के दबाव में परिवार के पारंपरिक हीरो का व्यापार करते थे। एक बार एक हीरो के व्यापारी ने उनके साथ लिखित में एक करार किया। जिसके अनुसार उस व्यापारी को, श्रीमद् राज चंद्र को लाखों रुपये के हीरे देने थे। लेकिन जब देने का समय आ गया तो हीरो के भाव अत्यधिक बढ़ गये। करार के अनुसार यदि वह हीरे देता तो उसका दिवाला निकल जाता। उस की परिस्थिति बहुत दयनीय हो गई। यह समाचार श्रीमद् राज चंद्र को मिले। उन्होंने तुरंत ही व्यापारी को बुलाया और कहा कि जिस करार के कारण किसी के प्राण संकट में आ जाए और उसका परिवार रस्ते पर आ जाए, ऐसा धन मुझे नहीं चाहिए। उन्होंने उस करारनामे को उसके सामने फाड़ डाला। और व्यापारी को करार से मुक्त कर दिया।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
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