सनातन बीज

🙏 सुप्रभात, आज कार्तिक शुक्ल तृतीया शनिवार दिनांक १०.११.२०१८  🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   

#सनातन_बीज
श्रीमद्भगवगिता में दैवी संपदा एवं विभूतिदर्शन में प्रभु ने कहा है :
#बीजं_मां_सर्वभूतानां_विद्धि_पार्थ_सनातनम्।
#बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि_तेजस्तेजस्विनामहम्॥ (भ ग ७/१०)
(अतः हे पार्थ मुझे तू सब भूतोंका सनातन पुरातन बीज अर्थात् उनकी उत्पत्तिका मूल कारण जान। तथा मैं ही बुद्धिमानोंकी बुद्धि अर्थात् विवेकशक्ति और तेजस्वियों अर्थात् प्रभावशाली पुरुषोंका तेज प्रभाव हूँ।)

#सनातन_बीज #बीज अर्थात् : बीज - Seed याने बीज, वंश, मूल, संतान, वीर्य, संतति, उत्पत्ति, स्रोत, व्युत्पत्ति, मूल देश, सूत्र

★ ऐसी रचना जो साधारणतया गर्भाधान के बाद भ्रूण से विकसित होती है बीज कहलाती है।
★ ऐसा परिपक्व भ्रूण जिसमें एक पौधा छिपा होता है। और पौधों के आरंभिक पोषण के लिए खाद्य सामग्री हो तथा यह बीज कवच से ढका हो और अनुकूल परिस्थितियों में एक स्वस्थ पौधा देने में समर्थ हो, बीज कहलाता है।

यहाँ बीज कहने का तात्पर्य संपूर्ण चराचर सृष्टि की निर्मिति, उत्पत्ति, मूल स्तोत्र भगवान स्वयं है।  #सृष्टि_उत्पत्ति समजने का नम्र प्रयास करेंगे।

विश्व ब्रह्मांड का रहस्य गहन और कौतूहल का विषय है। आज का विज्ञान इन रहस्यों को उजागर करने में सतत प्रयत्नशील है। सृष्टि का प्रादुर्भाव अण्ड विस्फोट से होने की जानकारी आज के वैज्ञानिकों को सन १९२६-२७ में हुई, जिसे #बिगबैग की संज्ञा देकर उन्होंने माना कि उन्हें सृष्टि के प्रारंभ का रहस्य ज्ञात हो चुका है। वे इस विस्फोट के पश्चात की कालयात्रा के निर्धारण का अपना शोध चिंतन समय-समय पर प्रस्तुत करते हैं।

आधुनिक विज्ञान का ' बिगबैग ' हमारे आकाशगंगा ब्रह्माण्ड के #हिरण्यगर्भ का अंतिम विस्फोट का वर्णन है जो पाश्चात्य बहुमत के अनुसार १० से १५ अरब वर्ष पहले हुआ है। भारतीय गणित के अनुसार यह विस्फोट आज से लगभग १० अरब ६७ करोड़ २५ लाख वर्ष पहले हुआ था। विस्फोट के पश्चात #आकाशगंगा का निर्माण और विकास हुआ है।

सृष्टि उत्पत्ति और विकास में क्रमविकास और कार्य-कारण का सिद्धांत कार्य करता है। वेदों में सृष्टि रचना को वैज्ञानिक तरीके से समझाया गया है। वेदों में ब्रह्मांड उत्पत्ति का जो सिद्धांत है विज्ञान आज उसके नजदिक पहुंच गया है। अब लोगों को कहानी से ज्यादा तथ्य पर विश्वास होता है। यहां वेद-गीता के उत्पत्ति के सिद्धांत को समझने का प्रयास करते हैं।

 ब्रह्म और ब्रह्मांड और आत्मा- तीनों ही आज भी मौजूद हैं। सर्वप्रथम ब्रह्म था आज भी ब्रह्म है और अनंत काल तक ब्रह्म ही रहेगा। यह ब्रह्म कौन है ? ईश्वर है, परमेश्वर है या परमात्मा ? यह तीनों नहीं है और तीनों ही है। यह ब्रह्म संपूर्ण विश्‍व के भीतर परिपूर्ण हैं तथा इस विश्‍व के बाहर भी है।

उत्पत्ति और विकास् की दृष्टि से ग्रह या जड़ जगत की रचना सबसे अंतिम रचना है। जो भी दिखाई दे रहा है वह सब जड़ जगत है। नर और मादा सृष्टि की सबसे अंतिम रचना है। यह सब चराचर सृष्टि का बीज स्वयं भगवान है। यह सनातन सत्य इस श्लोक के माध्यम से समजाया है।

#ब्रह्मा_मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी_भानुः_शशी_भूमिसुतो_बुधश्च।
#गुरुश्च_शुक्रः_शनिराहुकेतवः_कुर्वन्तु_सर्वे_मम-सुप्रभातम्॥
परमपिता परमात्मा सृष्टि की उत्पति स्थिति और प्रलय के संचालक ब्रह्मा-विष्णु-महेश।त्रिदेव, सूर्य, चंद्रमा, भूमि सुत यानी मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु आदि नवग्रह देवता शांति प्रदान करें यह शुभकामनाएं युक्त सुप्रभात।

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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