कालो के काल महाकाल

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी शुक्रवार दिनांक १४.१२.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   
महाकाल ज्योतिर्लिंग उज्जैन
सूर्यमंडल पर आधारित कालचक्र

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#प्रह्लादश्चास्मि_दैत्यानां_कालः_कलयतामहम्।
#मृगाणां_च_मृगेन्द्रोऽहं_वैनतेयश्च_पक्षिणाम्॥ (भ ग १०/२९)
अर्थात् :  दैत्योंमें अर्थात् दितिके वंशजोंमें मैं प्रह्लाद नामक दैत्य हूँ, और गणना करनेवालोंमें मैं काल हूँ। पशुओंमें पशुओंका राजा सिंह या व्याघ्र और पक्षियोंमें विनतापुत्र -गरुड़ मैं हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #कालः_कलयतामहम् गणना करनेवालोंमें मैं काल हूँ।

#काल क्या होता है :-
काल का अर्थ होता है – समय, अवसर, अवधि। क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय का पता चले उसे काल कहते हैं। अथार्त कार्य – व्यापार के समय और उसकी पूर्ण और अपूर्ण अवस्था के ज्ञान के रूपांतरण को काल कहते हैं।

काल एक अभिव्यक्ति के घटनाक्रम के साथ सामयिक सन्दर्भों का विपर्यास व्यतिरेक दर्शाते हैं। सभी भाषाएं समान काल इस्तेमाल करती हैं - वर्तमान, भूत और भविष्य, हालांकि हमेशा इन कालों की अभिव्यक्ति का अनुवाद स्पष्ट रूप से एक भाषा से दूसरी भाषा में नहीं किया जा सकता. जबकि सभी भाषाओं में क्रिया के ठेठ रूप होते हैं जिसके द्वारा वे शब्दकोशों में पहचाने जाते हैं और क्रमबद्ध किये जाते हैं, साधारणतः सबसे आम वर्तमान काल या एक साधारण रूप, उनके काल अभिव्यक्त करने के तरीकों का इस्तेमाल, भाषाओं के बीच भिन्न है।

काल मोटे तौर पर वर्तमान, भूत, या भविष्य के रूप में वर्गीकृत किये गए हैं। इन व्यापक वर्गीकरणों के भीतर कई संभावित काल मौजूद हैं। इन कालों के बीच अंतर मुख्य रूप से कथन के समय से सामयिक दूरी की डिग्री का है। उदाहरण के लिए, भूत काल (past tenses) की सामान्य श्रेणी के भीतर, तत्काल अतीत, सुदूर अतीत, दूर सुदूर अतीत और दूरवर्ती अतीत मौजूद हो सकते हैं, इनमें अंतर केवल कथन के घटनाक्रम के साथ कथन के समय से दूरी में बढ़ोत्तरी का है।

#काल_के_भेद :
•भूतकाल
•वर्तमान काल
•भविष्य कल

#भूतकाल :
भूतकाल का अर्थ होता है बिता हुआ। क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं। अथार्त जिस क्रिया से कार्य के समाप्त होने का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान वाक्यों के अंत में था , थे , थी आदि से होती है।
#वर्तमानकाल :
क्रिया के जिस रूप से यह पता चले की काम अभी हो रहा है उसे वर्तमान काल कहते हैं। अथार्त क्रिया के जिस रूप से समय का पता चले और क्रिया व्यापर का वर्तमान समय में पता चले उसे वर्तमान काल कहते हैं।
#भविष्यकाल :
क्रिया के जिस रूप से क्रिया के आने वाले समय में पूरा होने का पता चले उसे भविष्य काल कहते हैं। इससे आगे आने वाले समय का पता चलता है।

कालों के काल #महाकाल_का_उज्जैन_में_वैज्ञानिक_महत्व :
खगोलीय शास्त्रीय शोध अनुसार और भारतीय ज्योतिष के विद्वान यह जानते हैं कि उज्जैन का सूर्योदय काल देशभर के पंचांगों के लिए प्रामाणिक उदय काल माना जाता रहा है। भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार दक्षिण में लंका, भारत के मध्य में उज्जैन और (संभवत: वर्तमान) रोहतक नगरों के मध्य से जाने वाली देशांतर रेखा का सूर्योदय काल प्रामाणिक सूर्योदय काल है। परिवर्तित ज्योतिष ग्रंथों में उसका नाम 'लंकोदय' काल रहा है। लंकोदय की देशांतर रेखा से पूर्व में तथा पश्चिम में स्थित स्थानों के सूर्योदय का काल ज्ञात करने की विधियां निर्धारित की हुई हैं।

इस प्रकार उज्जयिनी का सूर्योदय काल देशभर के लिए प्रामाणिक सूर्योदय काल था और आधुनिक भाषा में उसे भारत का.#स्टैंडर्ड_टाइम कहा जा सकता है। ईसा पूर्व के ज्योतिष संभवतया इसी को महाकाल कहते थे। विविध शास्त्रीय तथ्यों को देव रूप से स्वीकार करने की हमारे यहां परंपरा रही है। इसी परंपरा के अंतर्गत महाकाल स्टैंडर्ड टाइम को देव रूप में दिया गया और उसके मंदिर की स्थापना उज्जयिनी में की गई। उज्जयिनी को क्यों चुना गया, यह भी एक ज्वलंत प्रश्न है। जब एक ही देशांतर रेखा देश के इतने लंबे-चौड़े भाग से निकलती है तो उज्जैन को ही क्यों महत्व दिया जाए। उत्तर यह है कि उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है, जहां तक उत्तरायण सूर्य आता है और लौटकर मकर रेखा का दक्षिण भाग में होता है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण भारतीय ज्योतिर्विदों ने उज्जैन को महाकाल की नगरी माना।

#ॐ_तत्पुरुषाय_विद्महे।
               #महादेवाय_धीमहि।
                             #तन्नो_रुद्रः_प्रचोदयात्॥

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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