नारदमुनि

🙏 सुप्रभात, आज कार्तिक कृष्ण अष्टमी शुक्रवार दिनांक ३०.११.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉 

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#अश्वत्थः_सर्ववृक्षाणां_देवर्षीणां_च_नारदः।
#गन्धर्वाणां_चित्ररथः_सिद्धानां_कपिलो_मुनिः॥ (भ ग १०/२६)
अर्थात् :  समस्त वृक्षोंमें पीपलका वृक्ष; और देवर्षियोंमें अर्थात् जो देव होकर मन्त्रोंके द्रष्टा होनेके कारण ऋषि भावको प्राप्त हुए हैं उनमें मैं नारद हूँ। गन्धर्वोंमें मैं चित्ररथ नामक गन्धर्व हूँ; सिद्धोंमें अर्थात् जन्मसे ही अतिशय धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्यको प्राप्त हुए पुरुषोंमें मैं कपिलमुनि हूँ।

श्रीमद्भगवगिता में भगवान कहते है कि #देवर्षीणां_च_नारदः देवर्षियोंमें अर्थात् जो देव होकर मन्त्रोंके द्रष्टा होनेके कारण ऋषि भावको प्राप्त हुए हैं उनमें मैं नारद हूँ।

#नारद_मुनि : शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा  और माता सरस्वती के छः पुत्रों में से छठे पुत्र है। उन्होने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है। वे भगवान विष्णु  के अनन्य भक्तों में से एक माने जाते है। देवर्षि नारद केवल मानव नही एक परंपरा है। नारद यानी देवताओं के संवाददाता, देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान  का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सभी लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। मात्र देवताओं ने ही नहीं, वरन् दानवों ने भी उन्हें सदैव आदर किया है। समय-समय पर सभी ने उनसे परामर्श लिया है।

नारद मुनि को देवर्षि कहा गया है। देवर्षि नारद केवल मानव नही एक परंपरा है। विभिन्न धर्मग्रन्थों में इनका उल्लेख आता है। कुछ उल्लेख निम्न हैं:

•अथर्ववेद  के अनुसार नारद नाम के एक ऋषि हुए हैं।
•ऐतरेय ब्राह्मण के कथन के अनुसार हरिशचंद्र के पुरोहित सोमक, साहदेव्य के शिक्षक तथा आग्वष्टय एवं युधाश्रौष्ठि को अभिशप्त करने वाले भी नारद थे।
•मैत्रायणी संहिता  में नारद नाम के एक आचार्य हुए हैं।
•सामविधान ब्राह्मण में बृहस्पति  के शिष्य के रूप में नारद का वर्णन मिलता है।•छान्दोग्यपनिषद्  में नारद का नाम सनत्कुमारों के साथ लिखा गया है।
•महाभारत  में मोक्ष धर्म के नारायणी आख्यान में नारद की उत्तरदेशीय यात्रा का विवरण मिलता है। इसके अनुसार उन्होंने नर-नारायण ऋषियों की तपश्चर्या देखकर उनसे प्रश्न किया और बाद में उन्होंने नारद को पांचरात्र धर्म का श्रवण कराया।
•नारद पंचरात्र  के नाम से एक प्रसिद्ध वैष्णव ग्रन्थ भी है जिसमें दस महाविद्याओं की कथा विस्तार से कही गई है। इस कथा के अनुसार हरी का भजन ही मुक्ति का परम कारण माना गया है।
•नारद पुराण के नाम से एक ग्रन्थ मिलता है। इस ग्रन्थ के पूर्वखंड में १२५ अघ्याय और उत्तरखण्ड में १८२ अघ्याय हैं।
•कुछ स्मृतिकारों ने नारद का नाम सर्वप्रथम स्मृतिकार के रूप में माना है।
इसी कारण सभी युगों में, सभी लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। प्रत्येक युग मे यह परंपरा चलाने वालों को नारद नाम से विभूषित किया गया है।

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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