यमराज

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल पँचमी बुधवार दिनांक १२.१२.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉 
 ॥ यमराज ॥
 धर्मेश्वर महादेव धर्मराज चौराशी मंदिर, भरमौर, 
जिला चंबा, हिमाचल प्रदेश
धर्मेश्वर महादेव धर्मराज चौराशी मंदिर, भरमौर,
 जिला चंबा, हिमाचल प्रदेश

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#अनन्तश्चास्मि_नागानां_वरुणो_यादसामहम्।
#पितृ़णामर्यमा_चास्मि_यमः_संयमतामहम्॥ (भ ग १०/२९)
अर्थात् :  नागोंके नाना भेदोंमें मैं अनन्त हूँ अर्थात् नागराज शेष हूँ और जलसम्बन्धी देवोंमें उनका राजा वरुण मैं हूँ। मैं पितरोंमें अर्यमा नामक पितृराज हूँ और शासन करनेवालोंमें यमराज हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #यमः_संयमतामहम् शासन करनेवालोंमें यमराज हूँ।

#यमराज
यमराज मृत्यु  के देवता हैं। पौराणिक कथाओं में मृत्यु के देवता को कहा गया है। यमराज, महिषवाहन (भैंसे पर सवार) दण्डधर हैं। विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से भगवान सूर्य के पुत्र यमराज, श्राद्धदेव मनु और पुत्री यमुना हुईं। यमराज परम भागवत, द्वादश भागवताचार्यों में हैं। यमराज जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। दक्षिण दिशा के इस लोकपाल (दिक् पाल) की संयमनीपुरी समस्त प्राणियों के लिये, जो अशुभकर्मा है, बड़ी भयप्रद है।

दीपावली से पूर्व दिन यमदीप देकर तथा दूसरे पर्वो पर यमराज की आराधना करके मनुष्य उनकी कृपा का सम्पादन करता है। यमदेव जीवों के शुभाशुभ कर्म का न्याय करके हम से सदा शुभकर्म की आशा करते हैं। दण्ड के द्वारा जीव को शुद्ध करना ही इनका मुख्य कार्य है।

हिंदु धर्म शास्त्रों अनुसार यह मान्यता है कि मनुष्य मरने पर सब से पहले यमलोक में जाता है और वहाँ यमराज के सामने उपस्थित किया जाता है। वही उसकी शुभ और अशुभ कृत्यों का विचार करके उसे स्वर्ग या नरक में भेजते हैं। ये धर्मपूर्वक विचार करते हैं, इसीलिये #धर्मराज भी कहलाते हैं। यह भी माना जाता है कि मृत्यु के समय यम के दूत ही आत्मा को लेने के लिये आते हैं।

यम राज  से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें (Facts of Yamraj)
यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है। इनके शस्त्र पाश और गदा है। इनका वाहन भैंस है। यह लोगों के प्राण हर कर उन्हें उनके कर्मों का दंड देते हैं। मान्यता है कि जो लोग कार्तिक महीने में दीपदान करते हैं, उन्हें यमराज कभी परेशान नहीं करते। स्मृतियों में चौदह यमों के नाम आए हैं, जो इस प्रकार हैं :
•यम
•धर्मराज
•मृत्यु
•अंतक
•वैवस्वत
•काल
•सर्वभूत
•क्षय
•उदुंबर
•दघ्न
•नील
•परमेष्ठी
•वृकोदर
•चित्र
•चित्रगुप्त
तर्पण में इनमें से प्रत्यक के नाम से तीन-तीन अंजलि जल दिया जाता है।

#यमराज_का_विश्वमे_एकमात्र_प्रसिद्ध_मंदिर :
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर चौराशी में मृत्यु के देव धर्मराज का प्राचीन मंदिर विद्यमान है। भरमौर में साक्षात धर्मराज विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां उनकी कचहरी लगती है और जीव आत्माओं के कर्मोँ का पूरा हिसाब होता है। जी हां, बताया जाता है कि भरमौर क्षेत्र में स्थापित धर्म राज के इस मंदिर को विश्व में इकलौता होने का भी गौरव हासिल है।

#मणिमहेश_कैलाशयात्रा में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र मंदिर के दर्शन करते हैं। कई सिद्ध पुरुष इस बात का दावा भी कर चुके हैं कि उन्होंने धर्मराज की कचहरी में होने वाले सवाल-जवाब खुद सुने हैं। हालांकि इसके फिलहाल प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

#चौरासी_मंदिर, भरमौर, हिमाचल प्रदेश 176315
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चौरासी मंदिर परिसर में बने इस मंदिर के ठीक सामने चित्रगुप्त का आसन बनाया गया है। जबकि मंदिर से पहले सीढ़ियां और एक गुप्त यंत्र स्थापित है। बताया जाता है कि इसी गुप्त यंत्र से धर्मराज सबके जीवन का हिसाब लेते हैं। साथ ही मंदिर के बगल में ढाई सीढ़ियां लगी हैं जिन्हें स्वर्ग के दरवाजे के रूप में भी देखा जाता है।

#यमराज_के_मंत्र :
मृत्यु और अन्य संबंधित भय को दूर करने, समय को अनुकूल बनाने और आलस को दूर भगाने के लिए यम के इस मंत्र का जाप करना चाहिए :
#ॐ_सूर्यपुत्राय_विद्महे
#महाकालाय_धीमहि
#तन्नो_यमः_प्रचोदयात्।

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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