नर 'सिंह' अवतार

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी शनिवार दिनांक १५.१२.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉  

 💮॥ नरसिंह अवतार ॥💮

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#प्रह्लादश्चास्मि_दैत्यानां_कालः_कलयतामहम्।
#मृगाणां_च_मृगेन्द्रोऽहं_वैनतेयश्च_पक्षिणाम्॥ (भ ग १०/३०)
अर्थात् :  दैत्योंमें अर्थात् दितिके वंशजोंमें मैं प्रह्लाद नामक दैत्य हूँ, और गणना करनेवालोंमें मैं काल हूँ। पशुओंमें पशुओंका राजा सिंह या व्याघ्र और पक्षियोंमें विनतापुत्र -गरुड़ मैं हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #मृगाणां_च_मृगेन्द्रोऽहं। पशुओंमें पशुओंका राजा सिंह या व्याघ्र मैं हूं।

#सिंह_Lion
जीव वैज्ञानिकों ने सिंह Mammalia मेमेलिया के बिल्ली परिवार के तहत वर्गीकृत किया है। सिंह (Panthera Leo)  पेन्थेरा वंश  की चार बड़ी बिल्लियों  में से एक है। और Felidae फेलिडे  परिवार का सदस्य है। यह बाघ  के बाद दूसरी सबसे बड़ी सजीव बिल्ली है, जिसके कुछ नरों का वजन २५० किलोग्राम से अधिक होता है। जंगली सिंह वर्तमान में उप सहारा, अफ्रीका  और एशिया  में पाए जाते हैं। इसकी तेजी से विलुप्त होती  बची खुची जनसंख्या उत्तर पश्चिमी भारत  में पाई जाती है, ये ऐतिहासिक समय में उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व  और पश्चिमी एशिया  से गायब हो गए थे।

सिंह मानव के बाद सबसे अधिक व्यापक रूप से फैला हुआ बड़ा स्तनधारी, भूमि पर रहने वाला जानवर है। वे अफ्रीका  के अधिकांश भाग में, पश्चिमी यूरोप से भारत तक अधिकांश यूरेशिया  में और युकोन  से पेरू  तक अमेरिका में पाए जाते थे। काल क्रम में सिंह की प्रजाति किन्हीं कारण वश लुप्त होती गई। सिंह जंगल में १०-१४ वर्ष तक जीवित रहते हैं, जबकि वे कैद मे २० वर्ष से भी अधिक जीवित रह सकते हैं। जंगल में, नर कभी-कभी ही दस वर्ष से अधिक जीवित रह पाते हैं, क्योंकि प्रतिद्वंद्वियों के साथ झगड़े में अक्सर उन्हें चोट पहुंचती है। सिंह आम तौर पर सवाना  और चारागाह  में रहते हैं, हालांकि वे झाड़ी या जंगल  में भी रह सकते हैं। अन्य बिल्लियों की तुलना में सिंह आम तौर पर सामाजिक नहीं होते हैं।

सिंह आमतौर पर चयनात्मक (Selective) रूप से मानव का शिकार नहीं करते हैं, फिर भी कुछ सिंहों को नर-भक्षी बनते हुए देखा गया है, जो मानव शिकार का भक्षण करना चाहते हैं। सिंह एक संवेदनशील प्रजाति  है, इसकी अफ्रीकी रेंज में पिछले दो दशकों में इसकी आबादी में संभवतः ३० से ५० प्रतिशत की गिरावट देखी गयी है।

सिंहों की संख्या Nominated Reserve सरंक्षित क्षेत्रों और राष्ट्रीय उद्यानों के बहार अस्थिर है। हालांकि इस गिरावट का कारण पूरी तरह से समझा नहीं गया है, आवास की क्षति और मानव के साथ संघर्ष इसके सबसे बड़े कारण हैं। सिंहों को रोमन युग  से पिंजरे  में रखा जाता रहा है, यह एक मुख्य प्रजाति रही है जिसे अठारहवीं शताब्दी के अंत से पूरी दुनिया में चिडिया घर  Zoo में प्रदर्शन के लिए रखा जाता रहा है। खतरे में आ गयी एशियाई उप प्रजातियों  के लिए पूरी दुनिया के चिड़ियाघर प्रजनन कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं।

देखने मे, एक नर सिंह अति विशिष्ट होता है और सरलता से अपने अयाल  (गले पर बाल) द्वारा पहचाना जा सकता है। सिंह, विशेष रूप से नर सिंह का चेहरा, मानव संस्कृति  में सबसे व्यापक ज्ञात प्रजाति में से एक है सभी प्राचीन और मध्य युगीन संस्कृतियों में इनके प्रमाण मिलते हैं, जहां ये ऐतिहासिक रूप से पाए गए। राष्ट्रीय ध्वजों पर, समकालीन फिल्मों , साहित्य ,  चित्रकला,  और मूर्तिकला  में इसका व्यापक वर्णन पाया जाता है। शेर को बलवान, पराक्रमी, शक्तिशाली, गौरवपूर्ण ओजस्वी जानवर माना गया है।

शेर जंगल का अघोषित राजा है। हाथी के अलावा किसी ने भी आज तक शेर की बादशाहत को चुनौती नहीं दी है। हमारे धर्म मे प्रायः सभी देवीदेवताओं और भगवान के वाहन पशु पक्षी या जानवर दिखाई देते है। भगवान शंकर हमेशा बाघंबर धारण करते हैं। शेर, #जगद्जननी_भगवती_माँ_दुर्गा की सवारी है। पौराणिक कथानुसार हिरण्यकश्यप को शिवजी से मिले विशिष्ट अभयदान के कारण अपने प्रिय भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिये और असुरराज हिरण्यकश्यप का वध करने के लिये विष्णु भगवान ने ' न मानव न पशु ' ऐसा खंभ से प्रकट #नरसिंह_अवतार धारण किया था।

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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