द्वन्द्वः_सामासिकस्य

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष पंचमी गुरुवार दिनांक २७.१२.२०१८ 🙏 

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉 
  राधेश्याम

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है: 
#अक्षराणामकारोऽस्मि_द्वन्द्वः_सामासिकस्य च।
#अहमेवाक्षयः_कालो_धाताऽहं_विश्वतोमुखः॥ (भ ग १०/३३)
अर्थात्।: मैं अक्षरों (वर्णमाला) में अकार और समासों में द्वन्द्व (नामक समास) हूँ मैं अक्षय काल अर्थात् कालका भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला विश्वतोमुख (विराट् स्वरूप) धाता हूँ भी मैं हूँ। 

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की :#द्वन्द्वः_सामासिकस्य च अर्थात समासों में द्वन्द्व नामक समास मैं हूँ।

समास का तात्पर्य है #संक्षिप्तीकरण। दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं। जैसे #राधा_कृष्ण, #सीता_राम #नील_कंठ, #पाप_पुण्य, #अन्न_जल, #ऊँच_नीच इत्यादि। व्यवहारिक रूप से समजे तो जैसे ' रसोई के लिए घर’ इसे हम #रसोई_घर भी कह सकते हैं। 

#द्वंद्व_समास (अंग्रेज़ी: Copulative Compound) जिस समास के दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' लगता हो, वह 'द्वंद्व समास' कहलाता है। जैसे - 
•ठण्डा-गरम - ठण्डा या गरम 
•नर-नारी - नर और नारी 
•खरा-खोटा - खरा या खोटा 
•राधा-कृष्ण - राधा और कृष्ण 
•राजा-प्रजा - राजा एवं प्रजा 
•भाई-बहन - भाई और बहन 
•गुण-दोष - गुण और दोष 
•सीता-राम - सीता और राम
•राधा-कृष्ण - राधा औऱ कृष्ण

द्वंद्व समास में दोनों शब्दों को समान रूप से महत्व दिया जाता है। अन्य समासो में एक शब्द प्रमुख रहता है और दुसरा शब्द गौण (Less Important) होता है। संस्कृत  एवं अन्य भारतीय भाषाओं में समास का बहुतायत में प्रयोग होता है। जर्मन आदि भाषाओं में भी समास का बहुत अधिक प्रयोग होता है।                           

द्वंद्व समास में दोनों शब्दों को समान रूप से महत्व देने से प्रभु हमें #समत्व का ज्ञान देते हैं।                        

भगवान के लिए उनके परम भक्त अपने समान ही महत्वपूर्ण है। इसलिए हनुमानजी का नाम प्रभु श्रीराम के नाम के साथ जुड़ गया। 

#समास याने समत्व ! इसे हम द्रष्टांत के माध्यम से समजने का प्रयास करेँगे :

किसी भी गांव में राम का मंदिर हो न हो परंतु मारुति मंदिर अवश्य होता है। गणेशजी के साथ उनके परम भक्त मोरेश्वर का नाम जुड़ गया है, इसलिए हम 'गणपति बप्पा मोरीया' कहते हैं। 

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆 

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