ऐरावत गजेंद्रनाम्
🙏 सुप्रभात, आज कार्तिक कृष्ण द्वादशी मंगलवार दिनांक ४.१२.२०१८ 🙏
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#उच्चैःश्रवसमश्वानां_विद्धि_माममृतोद्भवम्।
#ऐरावतं_गजेन्द्राणां_नराणां_च_नराधिपम्॥ (भ ग १०/२७)
अर्थात् : अश्वों में अमृतके साथ समुद्रमंथन से प्रकट होनेवाले उच्चैःश्रवा नामक घोड़ेको श्रेष्ठ, हाथियोंमें ऐरावत नामक हाथीको और मनुष्योंमें राजाको मेरी विभूति मानो।
श्रीमद्भगवगिता में भगवान कहते है कि #ऐरावतं_गजेन्द्राणां हाथियोंमें ऐरावत नामक हाथी मैं हुँ।
#ऐरावत
ऐरावत इस नाम को सुनकर ही ऐश्वर्य और सौभाग्य का अनुभव होता है। ऐरावत देवताओं के राजा इन्द्र के हाथी का नाम है। यह हाथी देवताओं और असुरों द्वारा किये गए #समुद्र_मंथन के दौरान निकले चौदह मूल्यवान रत्नों में से एक था। मंथन से प्राप्त रत्नों के बँटवारे के समय ' ऐरावत ' को इन्द्र को दे दिया गया था।
ऐरावत को शुक्लवर्ण और चार दाँतों वाला बताया गया है। इसका रंग श्वेत और चार दांत माने गए हैं। इसकी सूंड की संख्या भी पांच बताई गई है। अन्य सामान्य हाथियों मुकाबले दांतों व सूंडों की संख्या अधिक बताने का अर्थ इसकी शक्ति आैर सामर्थ्य को बढ़ाकर दर्शाना है। रत्नों के बँटवारे के समय इन्द्र ने इस दिव्य गुणयुक्त हाथी को अपनी सवारी के लिए ले लिया था। इसलिए इसका #इंद्रहस्ति अथवा #इंद्रकुंजर नाम भी पड़ा। ऐरावत के और भी कई अन्य नाम हैं, जैसे- #अभ्रमातंग, #ऐरावण, #अभ्रभूवल्लभ, #श्वेतहस्ति, #मल्लनाग, #हस्तिमल्ल, #सदादान, #सुदामा #श्वेतकुंजर, #गजाग्रणी तथा.#नागमल्ल।
महाभारत, भीष्मपर्व के अष्ट्म अध्याय में भारतवर्ष से उत्तर के भू-भाग को उत्तर कुरु के बदले 'ऐरावत' कहा गया है। जैन साहित्य में भी यही नाम आया है। धृतराष्ट्र नामक एक नाग का पैतृक नाम भी ऐरावत था। कद्रुपुत्र नागों को भी ऐरावत नाम से पुकारा गया है। 'इरा' का अर्थ जल है, अत: #इरावत (समुद्र) से उत्पन्न हाथी को ऐरावत नाम दिया गया है।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏
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🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
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#उच्चैःश्रवसमश्वानां_विद्धि_माममृतोद्भवम्।
#ऐरावतं_गजेन्द्राणां_नराणां_च_नराधिपम्॥ (भ ग १०/२७)
अर्थात् : अश्वों में अमृतके साथ समुद्रमंथन से प्रकट होनेवाले उच्चैःश्रवा नामक घोड़ेको श्रेष्ठ, हाथियोंमें ऐरावत नामक हाथीको और मनुष्योंमें राजाको मेरी विभूति मानो।
श्रीमद्भगवगिता में भगवान कहते है कि #ऐरावतं_गजेन्द्राणां हाथियोंमें ऐरावत नामक हाथी मैं हुँ।
#ऐरावत
ऐरावत इस नाम को सुनकर ही ऐश्वर्य और सौभाग्य का अनुभव होता है। ऐरावत देवताओं के राजा इन्द्र के हाथी का नाम है। यह हाथी देवताओं और असुरों द्वारा किये गए #समुद्र_मंथन के दौरान निकले चौदह मूल्यवान रत्नों में से एक था। मंथन से प्राप्त रत्नों के बँटवारे के समय ' ऐरावत ' को इन्द्र को दे दिया गया था।
ऐरावत को शुक्लवर्ण और चार दाँतों वाला बताया गया है। इसका रंग श्वेत और चार दांत माने गए हैं। इसकी सूंड की संख्या भी पांच बताई गई है। अन्य सामान्य हाथियों मुकाबले दांतों व सूंडों की संख्या अधिक बताने का अर्थ इसकी शक्ति आैर सामर्थ्य को बढ़ाकर दर्शाना है। रत्नों के बँटवारे के समय इन्द्र ने इस दिव्य गुणयुक्त हाथी को अपनी सवारी के लिए ले लिया था। इसलिए इसका #इंद्रहस्ति अथवा #इंद्रकुंजर नाम भी पड़ा। ऐरावत के और भी कई अन्य नाम हैं, जैसे- #अभ्रमातंग, #ऐरावण, #अभ्रभूवल्लभ, #श्वेतहस्ति, #मल्लनाग, #हस्तिमल्ल, #सदादान, #सुदामा #श्वेतकुंजर, #गजाग्रणी तथा.#नागमल्ल।
महाभारत, भीष्मपर्व के अष्ट्म अध्याय में भारतवर्ष से उत्तर के भू-भाग को उत्तर कुरु के बदले 'ऐरावत' कहा गया है। जैन साहित्य में भी यही नाम आया है। धृतराष्ट्र नामक एक नाग का पैतृक नाम भी ऐरावत था। कद्रुपुत्र नागों को भी ऐरावत नाम से पुकारा गया है। 'इरा' का अर्थ जल है, अत: #इरावत (समुद्र) से उत्पन्न हाथी को ऐरावत नाम दिया गया है।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
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