गीताजयंति

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल #मोक्षदा_एकादशी_गीताजयंति मंगलवार दिनांक १८.१२.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   

गीताजयंति

श्रीमद्भगवगिता के विषय मे स्वयं श्री कृष्ण भगवान ने कहा है: 
#गीता_मे_हृदयं_पार्थ_गीता_मे_सारमुत्तमम्।
#गीता_मे_ज्ञानमत्युग्रं_गीता_मे_ज्ञानमव्ययम्॥
#गीता_मे_चोत्तमं_स्थानं_गीता_मे_परमं_पदम्।
#गीता_मे_परमं_गुह्यं_गीता_मे_परमो_गुरुः॥
गीता मेरा हृदय है। गीता मेरा उत्तम सार है। गीता मेरा अति उग्र ज्ञान है। गीता मेरा अविनाशी ज्ञान है। गीता मेरा श्रेष्ठ निवासस्थान है। गीता मेरा परम पद है। गीता मेरा परम रहस्य है। गीता मेरा परम गुरु है - भगवान श्री कृष्ण

महर्षि वेदव्यास ने गीता महात्म्य कहा है :
#गीता_सुगीता_कर्तव्या_किमन्यैः_शास्त्रविस्तरैः।
#या_स्वयं_पद्मनाभस्य_मुखपद्माद्विनिःसृता॥
जो अपने आप श्रीविष्णु भगवान के मुखकमल से निकली हुई है वह गीता अच्छी तरह कण्ठस्थ करना चाहिए। अन्य शास्त्रों के विस्तार से क्या लाभ ? - महर्षि व्यास 

शौनक ऋषि ने सुतजी से गीता महात्म्य के विषयमें पूछते हुए कहा की :
शौनक उवाच :

#गीतायाश्चैव_माहात्म्यं_यथावत्सूत_मे_वद।
#पुराणमुनिना_प्रोक्तं_व्यासेन_श्रुतिनोदितम्॥
शौनक ऋषि बोलेः हे सूत जी ! अति पूर्वकाल के मुनि श्री व्यासजी के द्वारा कहा हुआ तथा श्रुतियों में वर्णित श्रीगीताजी का माहात्म्य मुझे भली प्रकार कहिए।

जवाब में सूत उवाच :
#यस्माद्धर्ममयी_गीता_सर्वज्ञानप्रयोजिका।
#सर्वशास्त्रमयी_गीता_तस्माद्_गीता_विशिष्यते॥ (गी माह /६)
गीता धर्ममय, सर्वज्ञान की प्रयोजक तथा सर्व शास्त्रमय, अर्थात् सर्वशास्त्र के सार रूप गीता है, अतः गीता श्रेष्ठ है।

गीता अर्थात् योगेश्वर श्रीकृष्ण के मुखारविंद से स्रवित माधुर्य व सौंदर्य का वाङ्ममयी स्वरूप ! भगवान गोपाल कृष्ण की प्रेम-मुरली ने गोकुल में सभी को मंत्रमुग्ध किया तो योगेश्वर श्रीकृष्ण की ज्ञान-मुरली गीता ने कुरुक्षेत्र के रणभूमि पर मोहवश हताशा से विचलित हुए #विषादी_अर्जुन को युद्ध के लिये प्रवृत्त किया। तब से लेकर आज तक अनेक ज्ञानी, विद्वान, भक्त, कर्मयोगी, ऋषि, मुनि, संत, समाजसेवक और चिंतक, चाहे वे किसी भी देश या काल के हों, किसी भी धर्म या जाति के हो, उन सभी को श्रीमद्भगवद्गीता ने मुग्ध किया है। #कृष्णस्तु_भगवान_स्वयं के मुख से प्रवाहित इस वाङ्मय ने मानव को जीवन जीने की हिम्मत दी है।

जीवन एक संग्राम है और इसलिये कुरुक्षेत्र की रणभूमि में गीता का गान एक सुयोग्य पृष्ठभूमि का सर्जन है। भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर, समस्त मानवता को गीता के ज्ञान द्वारा जीवनाभिमुख बनाने का चिरंतन प्रयास किया है। जीवन रोने के लिये नही है, भाग जाने के लिये नही है, हसने के लिये है, खेलने के लिये है, संकटों से हिम्मत से लड़ने के लिये है, वैसे ही अखण्ड आशा और दुर्दम्य श्रद्धा के बल पर विकास करने के लिये है। गीता विश्व के मानवमात्र को जीवन के प्रति क्षण आनेवाले छोटे-बड़े संग्रामों के सामने हिम्मत से खड़े रहने की शक्ति प्रदान करती है।

गीता वैश्विक ग्रँथ है। ऐसा कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं है की ' Gita is not the Bible of Hinduism but it is the Bible of Humanity ' गीता विश्वधर्म ग्रँथ है। गीता केवल हिन्दू सभ्यता को मार्गदर्शन नहीं देती। यह जाति-धर्म के भेद से कही उपर मानवता का ज्ञान देती हैं। गीता के अठारह अध्यायो में मनुष्य के सभी धर्म एवम् कर्म का ब्यौरा हैं। इसमें सत युग से कल युग तक मनुष्य के कर्म एवम धर्म का ज्ञान हैं। गीता के श्लोको में मनुष्य जाति का आधार छिपा हैं। मनुष्य के लिए क्या कर्म हैं उसका क्या धर्म हैं। इसका विस्तार स्वयं कृष्ण ने अपने मुख से कुरुक्षेत्र की उस धरती पर किया था। उसी ज्ञान को गीता के पन्नो में महर्षि वेदव्यास ने ग्रन्थित किया हैं। यह सबसे पवित्र और मानव जाति का उद्धार करने वाला ग्रन्थ हैं।

विश्वका एक मात्र ग्रँथ गीता है जिसकी जन्मजयंती प्रत्येक मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म ही एक ऐसा धर्म हैं जिसमे किसी ग्रन्थ की जयंती मनाई जाती हैं, इसका उद्देश्य मनुष्य में गीता के महत्व को जगाये रखना हैं। कलयुग में गीता ही एक ऐसा ग्रन्थ हैं जो मनुष्य को सही गलत का बोध करा सकता हैं।

कब हुआ था गीता का गान और इसका उद्देश्य क्या था ?

महाभारत काल, कुरुक्षेत्र का वह भयावह युद्ध, जिसमे कौरव-पांडव भाई ही भाई के सामने शस्त्र लिए खडे थे। वह युद्ध धर्म की संस्थापना के लिए था। यह सत्य-असत्य के बीच धर्मयुद्ध था, उस युद्ध के दौरान अर्जुन ने जब अपने ही दादा, भाई, सगे संबंधियों एवम् गुरुओं को सामने दुश्मन के रूप में देखा तो उसका गांडीव (अर्जुन का धनुष) हाथो से छुटने लगा, उसके पैर काँपने लगे. उसने युद्ध करने में अपने आप को असमर्थ पाया। तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश का गान किया। यही गान को संस्कृत में गीता कहा जाता है। इस प्रकार गीता का जन्म हुआ। श्री कृष्ण ने अर्जुन को धर्म की सही परिभाषा समझाई। उसे निभाने की ताकत दी। एक मनुष्य रूप में अर्जुन के मन में उठने वाले सभी प्रश्नों का उत्तर श्री कृष्ण ने स्वयम उसे दिया। उसी का विस्तार भगवत गीता में समाहित है, जो आज मनुष्य जाति को उसका कर्तव्य एवम अधिकार का बोध कराता हैं।

गीता का जन्म मनुष्य को धर्म का सही अर्थ समझाने की दृष्टि से किया गया। जब गीता का वाचन स्वयं प्रभु ने किये उस वक्त कलयुग का प्रारंभ हो चूका था। कलयुग ऐसा दौर हैं जिसमे गुरु एवम ईश्वर स्वयं धरती पर मौजूद नहीं हैं, जो भटकते अर्जुन को सही राह दिखा पायें। ऐसे में गीता के उपदेश मनुष्य जाति को राह प्रशस्त करते हैं। इसी कारण महाभारत काल में गीता की उत्त्पत्ति की गई। काल गणना के अनुसार लगभग 5100 वर्षो के पूर्व मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष एकादशी के दिन (महाभारत युद्ध के प्रथम दिन) गीता का ज्ञान हुआ था। 

कैसे मनाई जाती हैं गीता जयंती ? (Gita Jayanti Celebration)

इस दिन भगवत गीता का पाठ किया जाता हैं। मंदिरों में भगवान कृष्ण एवम् गीता की पूजा की जाती हैं। भजन एवम् आरती की जाती हैं। महाविद्वान इस दिन गीता का सार कहते हैं। कई जगह वक्ततृत्व स्पर्धा, निबंध स्पर्धाओं का आयोजन होता हैं। सामुहिक गीता परायण किया जाता है। जिसके जरिये मनुष्य जाति को इसका ज्ञान मिलता हैं। इस दिन कई लोग उपवास रखते हैं। ।गीता के उपदेश पढ़े एवम् सुने जाते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के विचारों को केंद्र में रखकर कर्मयोगी अर्जुन को आदर्श एवं  योगेश्वर श्रीकृष्ण को जीवन की सभी समस्याओं में मार्गदर्शक मानने वाला परमपूज्य दादा पांडुरंग शास्त्री आठवले प्रेरित विश्व में फैला #स्वाध्याय_परिवार गीताजयंती विशेष रूप से मानता है। गीताजयंति पर विविध स्तर पर लाखों युवाओं द्वारा विश्वभर में विशिष्ट विषय निर्धारित कर वक्ततृत्व स्पर्धा, निबंध प्रतियोगिता। केंद्र स्तर पर सामुहिक पूर्ण गीता परायण का आयोजन किया जाता है।

गीता जयंती मोक्षदा एकादशी के दिन आती है, इस दिन विष्णु भगवान की पूजा की जाती हैं. भगवत गीता का पाठ किया जाता हैं. इससे मनुष्य को मोक्ष का मार्ग मिलता हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में महत्‍वपूर्ण तथ्‍य 

  • श्रीमद्भगवद्गीता गीता का आज सेे लगभग  5155 साल पहले सुनाई थी।
  • श्रीमद्भगवद्गीता गीता को कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाया था।
  • भगवान श्रीकृष्ण ने गीता को रविवार के दिन सुनाया था।
  • जिस दिन गीता सुनाई गई थी उस मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि थी।
  • गीता में कुल 18 अध्याय हैं।
  • गीता तीन हिस्सों में, प्रत्येक में 6 6 अध्याय में विभाजित है।
  • श्रीमद्भगवद्गीता में कुल 700 श्‍लोक हैं।
  • गीता को अर्जुन के अलावा हनुमानजी, बर्बरीक एवं संजय ने भी सुना था।
  • संजय को मिली दिव्य द्रष्टि से अपने राजा धृतराष्ट्र को महल में बैठकर भगवद्गीता एवं महाभारत के युद्धका सीधा अहवाल सुनाया था। यह विश्व का पहला जीवंत प्रसारण था।
  • अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान भगवान सूर्यदेव को मिला था।
  • गीता को उपनिषद माना गया है। 
  • गीता का दूसरा नाम गीतोपनिषद भी है।
  • गीता में सर्व शास्त्रों का सार कहा गया है।
  • गीता को अर्जुन को सुनाने का उद्देश्‍य अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए था।
  • गीता में श्रीकृष्ण जी द्वारा - 574 श्‍लोक कहे गये हैं।
  • अर्जुन द्वारा- 85 श्‍लोक कहे गये हैं।
  • धृतराष्ट्र द्वारा – 1 श्‍लोक कहे गये हैं।
  • संजय द्वारा – 40 श्‍लोक कहे गये हैं।
  • गीता महाग्रंथ महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है
  • गीता का सार प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना है।
  • श्रीमद्भगवद्गीता महर्षि वेदव्यास द्वारा ग्रन्थित की गई है।
  • विश्व का एकमात्र ग्रँथ गीता की जयंति मनाई जाती है।
  • गीता धर्म, जाती, देश औऱ काल के ऊपर वैश्विक ग्रँथ है।
  • भगवद्गीता उपदेश है लेकिन इसे गान के रूप में महर्षि वेदव्यासजी ने अनुष्टुप्छन्दः एवं त्रिस्टुप्छन्द में ग्रन्थित किया है। इसलिये इस गान को संस्कृत में गीता कहा गया है।
  • अनुष्टुप्छन्दः अनुष्टुप छन्द संस्कृत काव्य में सर्वाधिक प्रयुक्त छन्द है, इसका वेदों में भी प्रयोग हुआ है। रामायण, महाभारत तथा गीता के अधिकांश श्लोक अनुष्टुप छन्द में ही हैं। इसमें कुल - ३२ वर्ण होते हैं - आठ वर्णों के चार पाद। 
  • त्रिष्टुप् छन्दः वेदों में प्रयुक्त एक छंद है। इसमें कुल ४४ वर्ण होते हैं जो ११-११-११-११ वर्णों के चार पदों में व्यवस्थित होते हैं। 
  • श्रीमद्भगवद्गीता मूलतः सँस्कृत भाषा मे है। लेकिन विश्व की 175 से भी अधिक भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
  • दुनिया में गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिस पर दुनियाभर की भाषा में सबसे ज्यादा भाष्य, टीका, व्याख्या, टिप्पणी, निबंध, शोधग्रंथ आदि लिखे गए हैं।
  • श्रीमद्भगवद्गीता का पहला अंग्रेजी अनुवाद 1785 में चार्ल्स विल्किन्स ने लंदन में किया था।
  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन की जब मृत्यु होने वाली थी, तो कुछ दिनों पहले से उन्होंने भगवत गीता पढ़ना शुरू किया था। अलबर्ट आइंस्टाइन कहते थे कि अपने प्रारंभिक जीवन से हीं उन्हें भगवत गीता पढ़नी चाहिए थी। इस बात का उन्हें जिंदगी भर मलाल होगा।
  • आमतौर पर फिल्मों में आप देखते होंगे कि कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान गीता की कसम खिलाई जाती है। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा कुछ भी नहीं होता है। कोर्ट में ना तो गीता की कसम खिलाई जाती है। और ना हीं किसी अन्य ग्रंथ की।
  • ये सारी बातें 170 साल पहले हीं खत्म हो चुकी है। लेकिन फिल्मों में ये सिलसिला आज भी जारी है। ये सारी बातें अंग्रेजो के द्वारा कराया जाता था। क्योंकि उनका मानना था कि हिंदू अपने धर्म के प्रति बहुत हीं ज्यादा भावुक होते हैं। इसलिए उन्हें कसम खिलाकर सच्चाई स्वीकार करवाया जा सकता है।
गीता के तथ्य और गीता ज्ञान अंनत है। जैसे हरि अंनत हरि कथा अंनत है। कुछेक यहाँ गीता जयंति पर प्रस्तुत किया है।

आज गीता जयंति के पावनपर्व पर हम सभी संकल्पबद्ध हो कि कर्मयोगी अर्जुन हमारा आदर्श हो और योगेश्वर श्रीकृष्ण हमारे मार्गदर्शक बने। इन दोनों व्यक्तिमत्व को दृष्टि के समक्ष रखकर हम अपने जीवन की योग्य रीति से मोड़ देंने का आरंभ करे यही श्रीमद्भगवद्गीता की फलश्रुति और हमारा गिताजयंति उत्सव पूजन है। 

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆 

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