महाकाल
🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी शुक्रवार दिनांक २८.१२.२०१८ 🙏
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#अक्षराणामकारोऽस्मि_द्वन्द्वः_सामासिकस्य_च।
#अहमेवाक्षयः_कालो_धाताऽहं_विश्वतोमुखः॥ (भ ग १०/३३)
अर्थात्।: मैं अक्षरों (वर्णमाला) में अकार और समासों में द्वन्द्व (नामक समास) हूँ मैं अक्षय काल अर्थात् कालका भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला विश्वतोमुख (विराट् स्वरूप) धाता हूँ भी मैं हूँ।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #अहमेवाक्षयः_कालो
मैं #कालो_में_महाकाल हुँ। मैं #अविनाशी_काल हुं। मैं #सनातन, #शाश्वत, #अनादि, #अनंत और #नित्य काल अर्थात् समय हुं।
#काल अनादि (UNKNOWN BEGINNING) और अनंत (ENDLESS, INFINITE) है। सृष्टि के आरंभ से भी पहले था और विनाश के बाद भी रहेगा।
काल क्या होता है :-
काल का अर्थ होता है – समय, अवसर, अवधि। क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय का पता चले उसे काल कहते हैं। समय कीमती है और हर किसी के लिए अमूल्य है, इसलिए हमें कभी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। हमें सकारात्मक ढंग से सही तरीके से समय का उपयोग करना चाहिए। हमें अपने बच्चों को बचपन से ही समय के महत्व या मूल्य के बारे में बताना चाहिए।
#कालों_के_काल_महाकाल :
#फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो_महानिशि।
#शिवलिंगतयोद्भूत_कोटिसूर्यसमप्रभ:॥
अर्थात् : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि में चन्द्रमा सूर्य के समीप होता है। अत: इसी समय जीवन रूपी चन्द्रमा का शिवरूपी सूर्य के साथ योग मिलन होता है। अत: इस चतुर्दशी को शिवपूजा करने से जीव को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। यही शिवरात्रि का महत्त्व है। महाशिवरात्रि का पर्व परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का मंगल सूचक पर्व है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर आदि विकारों से मुक्त करके परमसुख, शान्ति एवं ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
महाकाल को सदाशिव का ही दूसरा रूप कहा गया है। एक मत के अनुसार सृष्टि रचना के सबसे पहले योनि रूपा आद्याकाली उत्पन्न होती है। इनकी आवेशीय क्षुधा को शांत करने के लिए इन्ही की एक प्रतिकृति उल्टी और विपरीत आवेश से युक्त उत्पन्न होती है। इन दोनों के मिलन से एक प्रचंड शक्ति स्त्रोत बनता है (महाविस्फोट) और कुछ निश्चित नियमों से क्रिया करते हुए अपना विस्तार करता हुआ ब्रह्माण्ड के रूप में विकसित होता है। यही सृष्टि रचना है। और उसी काल-समय को #महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
सभी मार्ग में सभी आचार्यों, ऋषियों ने इस संरचना को अलग-अलग ढंग से कहा है।आध्यात्मिक मार्गभेद मतभेद से इस उत्पत्ति और इस महाशक्ति को अनेक नामों से पुकारा गया है। किसी ने इसे आद्य महामाया कहा, किसी ने आद्या भैरवी, वेद में इसे ' पुरुष’कहा गया है। गीता में भगवान श्री कृष्णा ने अर्जुन को जिस ' #विश्वरूप ' को दिखाया था, वह यही महाशक्ति है। अर्थात यह प्रकृति ही यह स्त्रोत है और इसके अंदर उत्पन्न होने वाली सभी इकाइयाँ इसी सृष्टि में है; एक ही प्रकार के शाश्वत नियमों से उत्पन्न होकर, एक ही संरचना में, एक ही प्रकार के नियमों से क्रिया करते हुए एक ही प्रकार के नियमों से नष्ट हो जाते है। इसलिए हम सब इस प्रकृति की सभी इकाइयाँ इस महाकाल की ही प्रतिकृति हैं।
महाकाल के भक्त इसे एक विशाल शिवलिंग मानते है यानी यह प्रकृति एक विशाल शिवलिंग है और हम सभी इसकी प्रतिलिपि हैं। हम अपना अध्ययन करके इस महाकाल की समस्त शक्तियों का ज्ञान कर सकते हैं। यह महाकाल एक अदभुत रोमांचक और आश्चर्यजनक उत्पत्ति है और चूँकि सभी शक्तियाँ, देवता-असुर-देवी से लेकर समस्त लोक-परलोक, जीव-जंतु इसी में स्थित है; इसलिए ये सर्वेश्वर है। ये सभी की उत्पत्ति, सभी का पालन करने वाले, सभी का विनाश करनेवाले सदाशिव से उत्पन्न महासर्वेश्वर हैं।
इनकी उत्पत्ति योनि रूपा आद्या महाकाली से होती है; और इनके अंदर जो शक्ति धाराएं चलती है; उन्हें ' महाकाली ' कहा जाता है। इन उत्पत्तियों और शक्तियों का क्रम सापेक्ष होता है। ' काल ' का अस्तित्त्व इनमें है, इससे है और वह इनमें ही संचरण करता है।
#काल_का_अन्य_अर्थ_मृत्यु :
कालों के काल महाकाल के विषय मे विश्वरूप दर्शन कराते वख्त भगवान ने कहा है :
#कालोऽस्मि_लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो_लोकान्समाहर्तुमिह_प्रवृत्तः।
#ऋतेऽपि_त्वां_न_भविष्यन्ति_सर्वे_येऽवस्थिताः_प्रत्यनीकेषु_योधाः॥ (भ ग ११/३२)
अर्थात् : यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि, मै समय का देवता हूँ, मै महाकाल हूँ। मैने इस संसार से सारी अनैतिकता को समाप्त करने का प्रण किया है। जो प्रतिपक्षियों की सेना में स्थित योद्धा लोग हैं, वे सब तेरे बिना भी नहीं रहेंगे अर्थात तेरे युद्ध न करने पर भी इन सबका नाश हो जाएगा। मै सारे लोकों को नष्ट करने आया हूँ।
इस अर्थ में सृष्टि का लय करने वाले कालो का काल महाकाल भगवान है। ऐसे मृत्यु की भीति हर्ता देवों के महादेव महामृत्युंजय के प्रति हमारा श्रद्धापूर्वक नमन।
#ॐ_त्र्यम्बकं_यजामहे_सुगन्धिं_पुष्टिवर्धनम्।
#उर्वारुकमिव_बन्धनान्_मृत्योर्मुक्षीय_मामृतात्॥
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
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