मगरमच्छ

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी बुधवार दिनांक १९.१२.२०१८ 🙏 

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉  


श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है: 
#पवनः_पवतामस्मि_रामः_शस्त्रभृतामहम्।
#झषाणां_मकरश्चास्मि_स्रोतसामस्मि_जाह्नवी॥ (भ ग १०/३१)
अर्थात् : पवित्र करनेवालोंमें वायु और शस्त्रधारियोंमें दशरथपुत्र राम मैं हूँ। मछली आदि जलचर प्राणियोंमें मकर नामक जलचरोंकी जातिविशेष म मगरमच्छैं हूँ। स्रोतोंमें - नदियोंमें मैं जाह्नवी - गङ्गा हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #झषाणां_मकरश्चास्मि मछली आदि जलचर प्राणियोंमें मकर नामक जलचरोंकी जाति विशेष में मैं मगरमच्छैं हूँ। 

जिस प्रकार सिंह शक्तिशाली वनचर है, उसी प्रकार मगरमच्छ शक्तिशाली जलचर है। हिंदी भाषा में कहावत है "पानी में रह कर मगरमच्छ से बैर नहीं कर सकते" यही उसकी शक्ति का मापदंड हैं।                   
श्रीमद् भागवत पूराण में #गजेंद्र_मोक्ष की कथा हैं।                             
हाथी और मगर दोनों शक्तिशाली थे। मगर ने पानी में रहकर गजेंद्र हाथी के पैर को अपने जबड़े में दबोच लिया था। दोनों के बीच बहुत लंबे समय तक संघर्ष होते रहा। अंत में थक हार कर गजेंद्र ने श्री हरि विष्णु से आर्त हृदय से प्रार्थना की। तब प्रभु ने उसकी प्रार्थना सुनकर उसे तत्क्षण मुक्त करा दिया।                         

यह कथा हमें समझाती है कि इस संसार में जीव, वासना, कामनाओं के मुख से छुटकारा पाने का अथग प्रयास करता है। परन्तु जब तक अहंकार वश प्रयास करते रहता है, उसके सारे प्रयास विफल हो जाते हैं। जब वह अहंकार छोड़कर दीन भाव से ईश्वर की शरण में जाता है तो प्रभु कृपा से तत्क्षण मुक्त हो जाता है। अकेले गजेन्द्र को ही मोक्ष नहीं मिला अपितु मगर को भी मोक्ष की प्राप्ति हुई। दोनों पूर्व जन्म के पुण्यात्मा थे।      

मगरमच्छ के बारें में रोचक तथ्य :
•मगरमच्छ पानी में रहने वाली सबसे बड़े और खतरनाक सरीसृप प्राणियों में से एक है। 
•एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका खण्ड के कई देशों में यह पाये जाते है। •मगरमच्छ ज्यादातर नदी झील और तालाब में रहते हैं।
•दुनिया में दो तरह के मगरमच्छ पाए जाते हैं। 
•एक हैं मीठे पानी के मगरमच्छ 
•दूसरा है खारे पानी के मगरमच्छ। 
•दुनिया में लगभग 14 से भी ज्यादा प्रजातियों का मगरमच्छ पाया जाता है और इनमें से कई सारी प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है।
•आकार के द्रष्टि से खारे पानी के मगरमच्छ मीठे पानी की मगरमच्छ से ज्यादा बडे होते है। 
•इनकी लंबाई लगभग 5 से 7 मीटर तक होती है और इनकी वजन लगभग 900 kg से लेकर 1200kg तक होता है।
•मगरमच्छ धरती पर लगभग 24 करोड़ साल से रह रहे हैं। 
•डायनासोर जैसे विशाल प्राणियों के प्रजाति के प्राणी है मगरमच्छ बहुत ही शक्तिशाली और ताकतवर सरीसृप प्राणी है।
•मगरमच्छ की देखने की क्षमता बहोत ज्यादा होने के कारण पानी के नीचे भी देख सकते हैं। 
•पानी के अंदर लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैर सकते हैं। 
•यह बहुत ही डरावना और शक्तिशाली जीव है 
•मगरमच्छ एक मांसाहारी प्राणी जो मछली और जलचर जीव का भोजन करता है •जमीन पर रहने वाले मगरमच्छ पशु और मनुष्य को भी खा जाते हैं।
•इनकी मुंह की आकार बहुत ही बड़ी होती है और इनकी बड़े-बड़े मजबूत दांत से अपने शिकार को पकड़ लेती है। मगरमच्छ अपने शिकार को सीधे निकल जाती है।
•इनकी शरीर की चमडा बेहद मोटा होता है और मगरमच्छ की लंबी दुम बहुत मजबूत होता है। 
•अपनी दुम का इस्तेमाल करके वह पानी में तेजी से तेरे पाते हैं।
•शिकार के वख्त वह अपनी धुन से शिकार को घसीट कर पानी में लाते हैं। 
•मगरमच्छ अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए पानी के अंदर रहते हैं और अपनी मुंह को पानी के बाहर खुलकर राखते है।
•यह बरसात के मौसम में प्रजनन करते हैं और बच्चे पैदा करते हैं। 
•मादा मगरमच्छ एक साथ 20 से 50 अंडे देती है और अगले 3 महीने तक इन अंडों का देखभाल करती है। 
•लेकिन 99% मगरमच्छ के बच्चे बड़ी होने से पहले ही मर जाते हैं या फिर कोई और जानवर शिकार कर लेते हैं। इसीलिए कई सारे मगरमच्छ के प्रजाति विलुप्त होने के कगार में है।
•मगरमच्छ की देखने की और सुनने की क्षमता अधिक होने के कारण वह बहुत ही आसानी से अपने शिकार को पकड़ लेते हैं। 
•मगरमच्छ की देखने की क्षमता दिन के मुकाबले रात को और भी ज्यादा हो जाती है। 
•मगरमच्छ की सुनने की क्षमता इतना ज्यादा होती है कि वे अंडे की अंदर अपने बच्चे की रोने की आवाज भी सुन सकते हैं।
•जंगल में रहने वाले मगरमच्छ की जीवनकाल 50 से 70 वर्ष के होते हैं और पानी में रहने वाले मगरमच्छ 80 साल से भी ज्यादा वर्ष तक जीवित रहते हैं।

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆 

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