गङ्गा मैया

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी गुरुवार दिनांक २०.१२.२०१८ 🙏 

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉 
  गङ्गा मैया

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है: 
#पवनः_पवतामस्मि_रामः_शस्त्रभृतामहम्।
#झषाणां_मकरश्चास्मि_स्रोतसामस्मि_जाह्नवी॥ (भ ग १०/३१)
अर्थात् : पवित्र करनेवालोंमें वायु और शस्त्रधारियोंमें दशरथपुत्र राम मैं हूँ? मछली आदि जलचर प्राणियोंमें मकर नामक जलचरोंकी जातिविशेष मैं हूँ। स्रोतोंमें - नदियोंमें मैं जाह्नवी - गङ्गा हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #स्रोतसामस्मि_जाह्नवी स्रोतोंमें - नदियोंमें मैं जाह्नवी - गङ्गा हूँ।

प्रकृति को देवीस्वरूप पूजने वाली हमारी संस्कृति में नदियों का महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें भी माँ गङ्गा का अतिविशिष्ट स्थान है।
#गंगा_सिंधु_सरस्वती_च_यमुना_गोदावरी_नर्मदा
#कावेरी_सरयू_महेन्द्रतनया_चर्मण्यवती_वेदिका।
#क्षिप्रा_वेत्रवती_महासुरनदी_ख्याता_जया_गण्डकी
#पूर्णाः_पूर्णजलैः_समुद्रसहिताः_कुर्वन्तु_मे_मंगलम्॥
अर्थात् : उपर्युक्त सभी जल से परिपूर्ण नदियां, समुद्र सहित मेरा कल्याण करें। गंगा की महिमा तो वर्णनातीत है। उसे प्रणाम कर अपना जीवन सार्थक करने की परंपरा अति प्राचीन है।

#नमामि_गंगे_तव_पादपंकजं_सुरसुरैर्वन्दितदिव्यरूपम् ।
#भुक्तिं_च_मुक्तिं_च_ददासि_नित्यम्_भावानुसारेण_सदा_नराणाम् ।।
अर्थात् हे गंगाजी ! मैं देव व दैत्यों द्वारा पूजित आपके दिव्य पादपद्मों को प्रणाम करता हूँ। आप मनुष्यों को सदा उनके भावानुसार भोग एवं मोक्ष प्रदान करती हैं। 

पौराणिक कथाओं अनुसार गंगा जी के तीन नाम : #त्रिपथगा, #जाह्नवी और #भागीरथी 

गंगा, जाह्नवी और भागीरथी कहलानी वाली ‘गंगा नदी’ भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह मात्र एक जल स्रोत नहीं है, बल्कि भारतीय मान्यताओं में यह नदी पूजनीय है जिसे ‘गंगा मां’ अथवा ‘गंगा देवी’' भागीरथी ' ' जाह्नवी ' के नाम से सम्मानित किया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री गंगा पृथ्वी पर आने से पहले सुरलोक में रहती थी। 

#भगीरथ_से_भागीरथी  :
#गंगावतरण से तात्पर्य है कि 'गंगा का पृथ्वी पर अवतरण'। संक्षिप्त में अयोध्या के इक्ष्वाकु वंशीय राजा भगीरथ के कठिन प्रयत्नों और घोर तपस्या से ही गंगा का पृथ्वी पर अवतरण सम्भव हुआ था। इसलिए गङ्गा का नाम ' भागीरथी ' पड़ा है। राजा भगीरथ के पूर्वज राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र कपिल मुनि के तेज से भस्म हो जाने के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए थे। उनके भस्म हो जाने से उस स्थान पर साठ हज़ार राख की ढेरियाँ लग गईं। अपने पूर्वजों की शांति के लिए ही भगीरथ ने घोर तप किया और गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने में सफल हुए। पूर्वजों की भस्म के गंगा के पवित्र जल में डूबते ही वे सब शांति को प्राप्त हुए। 

#जह्नु_से_जाह्नवी:
एक दिन गलती से चलते-चलते गंगा जी उस स्थान पर पहुंचीं जहां ऋषि जह्नु यज्ञ कर रहे थे। गंगा जी बहते हुए अनजाने में उनके यज्ञ की सारी सामग्री को अपने साथ बहाकर ले गईं, जिस से ऋषि जह्नु को बहुत क्रोध आया और उन्होंने क्रुद्ध होकर गंगा का सारा जल पी लिया। यह देख कर समस्त ऋषि मुनियों को बड़ा विस्मय हुआ और वे गंगा जी को मुक्त करने के लिये उनकी स्तुति करने लगे। अंत में ऋषि जह्नु ने अपने कानों से गंगा जी को बहा दिया और उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया। तब से गंगा जी का नाम जाह्नवी भी पड़ा। इसके पश्चात् वे #भगीरथ के पीछे चलते-चलते उस स्थान पर पहुंचीं, जहां उसके चाचाओं की राख पड़ी थी। उस राख का गंगा के पवित्र जल से मिलन होते ही #सगर के सभी पुत्रों की आत्मा स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गई।

गंगा नदी को हमारी सनातन वैदिक संस्कृति में माँ एवं देवी के रूप में पवित्र मानते हैं। हिंदुओं  द्वारा देवी  रूपी इस नदी  की पूजा की जाती है क्योंकि हमारा विश्वास है कि इसमें स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। तीर्थयात्री  गंगा के पानी में अपने परिजनों की अस्थियों का विसर्जन करने के लिए लंबी दूरी की यात्रा करते हैं ताकि उनके प्रियजन सीधे स्वर्ग  में स्थान प्राप्त कर सकें।

#त्रिपथगा : गङ्गा नदी के विषय मे हमारी सांस्कृतिक मान्यता है कि गङ्गा स्वर्ग, मर्त्य (पृथ्वी) और पाताल इन तीनों लोकों में गंगा बहती हैं, इसीलिये इसे त्रिपथगा कहते हैं। इतनाही नही आध्यात्मिक दृष्टि से कुंडलिनी जागरण और नाड़ी शास्त्र की मान्यतानुसार #इड़ा_गंगा, #पिंगला_यमुना और #सुषुम्ना_सरस्वती है। आज्ञाचक्र में त्रिकुटी है। यही संगम है, त्रिवेणी है। 

#भौतिक_रूपसे_भागीरथी_नदी :  
भारत  की एक  पवित्र पावन नदी  है। यह उत्तराखंड  में से बहती है और देवप्रयाग  में अलकनंदा  से मिलकर गंगा  नदी का निर्माण करती है।
•उद्गम_स्थल - गौमुख, (गंगोत्री ग्लेशियर) गंगोत्री उत्तरकाशी उत्तराखंड
•सहायक नदियाँ - रुद्रागंगा, केदारगंगा, जाडगंगा, जाह्नवी,।सियागंगा, असीगंगा, भिलंगंगा, अलकनंदा।
•भागीरथी गोमुख स्थान से 25 कि॰मी॰ लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। यह स्थान उत्तराखण्ड राज्य में उत्तरकाशी जिले में है। यह समुद्रतल से 618 मीटर की ऊँचाई पर, ऋषिकेश से 70 किमी दूरी पर स्थित हैं। भागीरथी व अलकनन्दा देव प्रयाग में संगम करती है जिसके पश्चात वह गंगा के रूप में पहचानी जाती है।

#भौतिक_रूपसे_गङ्गा_नदी_तंत्र  : 
गङ्गा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर २,५१० किलोमीटर की दूरी तय करती हुई उत्तराखण्ड में हिमालय के गंगोत्री हिमनद से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुन्दरवन तक विशाल भू-भाग को सींचती है। देश की प्राकृतिक सम्पदा ही नहीं, जन-जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है।
•स्रोत: गंगोत्री हिमनद,  नंदा कोट,  नन्दा देवी पर्वत,  सतोपंथ हिमनद।
•भारत में सबसे बड़ा नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र है। 
•एक मुख्य नदी है तथा उसकी अनेक सहायक नदियां मिलकर नदी तंत्र का निर्माण करती हैं।
•भारत में सबसे बड़ा जल ग्रहण क्षेत्र गंगा नदी का है।
•गंगा नदी भारत और बांग्लादेश से होकर बहती है।
•गंगा नदी का निर्माण उत्तराखंड में दो धाराओं भागीरथी एवं अलकनंदा के मिलने से होता है।
•भागीरथी नदी उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और अलकनंदा नदी सतोपंथ ग्लेशियर से निकलती है।
•भागीरथी एवं अलकनंदा नदी देवप्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है।
•अलकनंदा नदी: अलकनंदा नदी का निर्माण दो धाराओं के मिलने से होता है।
•धौली गंगा नदी
•विष्णु गंगा नदी
•धौली गंगा नदी तथा विष्णु गंगा नदी सतोपंथ हिमानी से निकलती है तथा विष्णु प्रयाग में एक दूसरे से मिल जाती है और अलकनंदा नदी का निर्माण करती है।
•अलकनंदा नदी से आगे कर्णप्रयाग में पिंडार नदी आकार मिलती है तथा कर्णप्रयाग के आगे रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी से मंदाकिनी नदी आकर मिलती है तथा रुद्रप्रयाग से आगे देवप्रयाग में अलकनंदा नदी से भागीरथी नदी आकर मिलती है तथा भागीरथी एवं अलकनंदा की सयुंक्त धारा गंगा कहलाती है।
•गंगा नदी भारत में पांच राज्यों से >और बंगलादेश से होकर गुजरती है।
•उत्तराखण्ड, उतर प्रदेश, बिहार, झारखंड, प० बंगाल और बांग्लादेश।
•गंगा नदी की सर्वाधिक लंबाई उत्तर प्रदेश में तथा सबसे कम लंबाई झारखंड में है।
•गंगा नदी हिमालय से निकलकर हरिद्वार में मैदानी भाग में प्रवेश करती है।
•पश्चिम बंगाल में गंगा नदी दो वितरिकाओं में विभाजित हो जाती है-  हुगली एवं भागीरथी।
•कलकत्ता हुगली नदी के तट पर स्थित है।
•भागीरथी अर्थात गंगा बांग्लादेश में प्रवेश कर जाती है और हुगली नदी पश्चिम बंगाल में दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए बंगाल की खाड़ी में अपना जल गिराती है।
•कोलकाता हुगली नदी के तट पर है।
•छोटा नागपुर पठार के बीचों बीच भ्रंस घाटी में बहने वाली दामोदर नदी पूर्व में बहते हुए हुगली नदी से मिल जाती हैं।
•गंगा की मुख्यधारा भागीरथी अर्थात गंगा बांग्लादेश में पहुंचकर पदमा नदी कहलाती है बांग्लादेश में पदमा नदी से ब्रम्हपुत्र नदी आकर मिलती है तथा इन दोनों की संयुक्त धारा पदमा नदी ही कहलाती है आगे चलकर पदमा नदी में बराक या मेघना नदी आकर मिलती हैं तथा दोनों की संयुक्त धारा मेघना नदी कहलाती है तथा मेघना नदी बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
•गंगा नदी का अंतिम नाम मेघना नदी है।
•बराक या मेघना नदी मणिपुर से निकलती हैं।
•बांग्लादेश में ब्रहमपुत्र को जमुना कहते है अर्थात पदमा और जमुना की सयुंक्त धारा को पदमा नदी कहते है।

#गंगा_की_सहायक_नदियां
•सुविधा की दृष्टि से गंगा की सहायक नदियों को दो भागों में बांटा जाता है।
•1 - बायें तट पर आकर मिलने वाली नदियां
•2 - दायें तट पर आकर मिलने वाली नदियां
•गंगा के दाएं तट पर मिलने वाली नदियां
•गंगा के दाहिने तट पर आकर मिलने वाली नदियां मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय पठार की नदियां हैं।
•यमुना, चंबल, सिंध, बेतवा, केन, टोंस, सोन – पश्चिम से पूर्व की ओर
•यमुना गंगा की एकमात्र हिमालय सहायक नदी है जो गंगा के दाहिने तट पर आकर मिलती है तथा गंगा की अन्य हिमालय सहायक नदियां बाय तट पर मिलती हैं।
•यमुना नदी गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है।
•यमुना नदी उत्तराखंड में बंदरपूंछ चोटी पर यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है और प्रयाग में गंगा नदी से मिल जाती है।
•यमुना नदी की लंबाई – 1365 km
•यद्यपि चंबल, सिंध, बेतवा, केन नदियां गंगा नदी तंत्र का ही हिस्सा है लेकिन यह नदियां सीधे अपना जल गंगा नदी में ना गिराकर यमुना नदी में गिराती हैं।
•चंबल, सिंध, बेतवा की नदियां प्रायद्वीपीय पठार के अंतर्गत मालवा के पठार से निकलती हैं।
•टोंस और सोन नदी
•टोंस और सोन नदी प्रायद्वीपीय पठार से निकल कर सीधे अपना जल गंगा नदी में गिराती हैं।
•टोंस नदी इलाहाबाद जिले में गंगा नदी से मिलती हैं
•सोन नदी मैकाल पहाड़ी पर अमरकंटक चोटी से निकलकर पटना के समीप गंगा नदी से मिलती है।
•बायाँ तट पर आकर मिलने वाली सहायक नदियां
•यमुना को छोड़कर गंगा के अन्य हिमालय सहायक नदियां गंगा के बायां तट पर आकर मिलती हैं।
•पश्चिम से पूर्व की ओर – रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोशी, महानदी
•रामगंगा, गोमती, घाघरा उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होती है।
•गंडक एवं कोसी नदी बिहार में प्रवाहित होती है।
•महानंदा नदी बिहार एवं पश्चिम बंगाल की सीमा पर प्रवाहित होती है।
•गोमती नदी गंगा की एकमात्र ऐसी सहायक नदी है जो हिमालय पर्वतीय पर्वतीय क्षेत्र से ना निकलकर मैदानी क्षेत्रों से निकलती है।
•गोमती नदी का उद्गम उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में तराई के मैदान में स्थित फुल्हर झील से होता है।
•लखनऊ एवं जौनपुर शहर गोमती नदी के तट पर बसे हैं।
•गंडक नदी को नेपाल में शालिग्राम या नारायणी नदी भी कहते हैं।
•कोसी नदी जो नेपाल से निकलकर बिहार में गंगा नदी से मिलती है इसे बिहार का शोक कहते हैं क्योंकि यह नदी अपना रास्ता बदलने की कुख्यात है।
•कोसी नदी नेपाल में हिमालय पर्वत को काटकर बहुत सारी अवसादों अपने साथ लाती है तथा बिहार में नीक्षेपड़ के फलस्वरुप अपनी रास्ता को अवरुद्ध कर देती है क्योंकि बिहार में कोसी नदी की गति मैदानी भाग होने के कारण धीमी हो जाती है जिसके कारण नदी अपना मार्ग बदल देती है और बाढ़ आ जाती है।
•महानंदा नदी गंगा की सबसे पूर्वी एवं अंतिम सहायक नदी है।
•महानदी का उद्गम पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग के पहाड़ियों से होता  है।

पिता पर्वतराज हिमालय कि गौद से निकली माँ गंगा बिना भेदभाव भारतमाता को सुजलाम्, सुफलाम् कर उनके संतानों को पुष्टिवर्धक बनाती है। इसलिये कृतज्ञता से हमारी संस्कृति ने नदियों को माता समजकर तीर्थरूप माना है। ऐसी पतितपावनी, मुक्तिदायिनी माँ गंगा हमारे आधिदैविक, आदिभौतिक और आध्यात्मिक पापों का क्षय कर हमें मुक्ति प्रदान करे यही उनका स्मरण कर प्राथना।

॥ हर हर गंगे॥

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆 

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