प्रह्लाद

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी गुरूवार दिनांक १३.१२.२०१८ 🙏

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   
नरसिंह अवतार

श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#प्रह्लादश्चास्मि_दैत्यानां_कालः_कलयतामहम्।
#मृगाणां_च_मृगेन्द्रोऽहं_वैनतेयश्च_पक्षिणाम्॥ (भ ग १०/२९)
अर्थात् :  दैत्योंमें अर्थात् दितिके वंशजोंमें मैं प्रह्लाद नामक दैत्य हूँ, और गणना करनेवालोंमें मैं काल हूँ। पशुओंमें पशुओंका राजा सिंह या व्याघ्र और पक्षियोंमें विनतापुत्र -गरुड़ मैं हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की :#प्रह्लादश्चास्मि_दैत्यानां दैत्योंमें अर्थात् दितिके वंशजोंमें मैं प्रह्लाद नामक दैत्य हूँ।

#प्रह्लाद :
विष्णुपुराण  की कथानुसार प्राचीन काल में अत्याचारी राक्षसराज हिरण्यकश्यप ने तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान पा लिया कि संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे न मार सके। न ही वह रात में मरे, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न बाहर। यहां तक कि कोई शस्त्र भी उसे न मार पाए।

ऐसा वरदान पाकर वह अत्यंत निरंकुश बन बैठा। हिरण्यकश्यप के यहां प्रहलाद जैसा परमात्मा में अटूट विश्वास करने वाला भक्त पुत्र पैदा हुआ। प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और उस पर भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि थी।

हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे। प्रह्लाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया। उसने प्रह्लाद को मारने के अनेक उपाय किए लेकिन व प्रभु-कृपा से बचता रहा।

हिरण्यकश्यप की बहन #होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था। उसको वरदान में एक ऐसी चादर मिली हुई थी जो आग में नहीं जलती थी। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रहलाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई। होलिका बालक प्रहलाद को गोद में उठा जलाकर मारने के उद्देश्य से वरदान वाली चादर ओढ़ धूं-धू करती आग में जा बैठी। प्रभु-कृपा से वह चादर वायु के वेग से उड़कर बालक प्रह्लाद पर जा पड़ी और चादर न होने पर होलिका जल कर वहीं भस्म हो गई। इस प्रकार प्रह्लाद को मारने के प्रयास में होलिका की मृत्यु हो गई।

तत्पश्चात् हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु #नरंसिंह_अवतार में खंभे से निकल कर गोधूली समय (सुबह और शाम के समय का संधिकाल) में दरवाजे की चौखट पर बैठकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप को मार डाला। तभी से होली का त्योहार मनाया जाने लगा।

इस कथा से प्रत्येक व्यक्ति को यह प्ररेणा लेनी चाहिए, कि प्रह्लाद प्रेम, स्नेह, अपने भगवान के प्रति संपूर्ण आस्था, द्र्ढ निश्चय और ईश्वर पर अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। वहीं, हिरण्यकश्यप व होलिका ईर्ष्या, द्वेष, विकार और अधर्म के प्रतीक है।

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

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