कपिलमुनि का सांख्यदर्शन
🙏 सुप्रभात, आज कार्तिक कृष्ण दशमी रविवार दिनांक २.१२.२०१८ 🙏
🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#अश्वत्थः_सर्ववृक्षाणां_देवर्षीणां_च_नारदः।
#गन्धर्वाणां_चित्ररथः_सिद्धानां_कपिलो_मुनिः॥ (भ ग १०/२६)
अर्थात् : समस्त वृक्षोंमें पीपलका वृक्ष; और देवर्षियोंमें अर्थात् जो देव होकर मन्त्रोंके द्रष्टा होनेके कारण ऋषि भावको प्राप्त हुए हैं उनमें मैं नारद हूँ। गन्धर्वोंमें मैं चित्ररथ नामक गन्धर्व हूँ; सिद्धोंमें अर्थात् जन्मसे ही अतिशय धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्यको प्राप्त हुए पुरुषोंमें मैं कपिलमुनि हूँ।
श्रीमद्भगवगिता में भगवान कहते है कि #सिद्धानां_कपिलो_मुनिः सिद्धोंमें अर्थात् जन्मसे ही अतिशय धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्यको प्राप्त हुए पुरुषोंमें मैं कपिलमुनि हूँ।
कपिल प्राचीन भारत के एक प्रभावशाली मुनि थे। इन्हें सांख्यशास्त्र (यानि तत्व पर आधारित ज्ञान) के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है जिसके मान्य अर्थों के अनुसार विश्व का उद्भव विकासवादी प्रक्रिया से हुआ है। कई लोग इन्हें अनीश्वरवादी मानते हैं लेकिन गीता में इन्हें श्रेष्ठ मुनि कहा गया है। कपिल ने सर्वप्रथम विकासवाद का प्रतिपादन किया और संसार को एक क्रम के रूप में देखा।
श्रीमद्भगवत के अनुसार कपिलमुनि विष्णु के पंचम अवतार माने गए हैं। कर्दम और देवहूति से इनकी उत्पत्ति मानी गई है। बाद में इन्होंने अपनी माता देवहूति को सांख्यज्ञान का उपदेश दिया जिसका विशद वर्णन श्रीमद्भगवत के तीसरे स्कंध में मिलता है। कपिलमुनि के जन्म के विषय मे इतिहास में मतमतांतर है। हम इनके जन्म संबंधित जानकारी की ऐतिहासिक सत्यता के बारे में उलझे बगर उनके ज्ञान पर आधारित भारतीय षड्दर्शन में के एक ' सांख्य दर्शन ' के विषय में चिंतन करेंगे।
#सांख्य_दर्शन के विषय मे भगवान ने श्रीमद्भगवद्गीता में विविधता से ज्ञानयोग कहकर महत्ता बढ़ाई है:
#एषा_तेSभिहिता_सांख्ये_बुद्धिर्योगे_त्विमां_श्रुणु।
#बुद्धया_युक्तो_यथा_पार्थ_कर्मबन्धं_प्रहास्यसि।। (भ ग २/३९)
अर्थात् : हे अर्जुन! यह बुध्दि (ज्ञान) जो सांख्य के अनुसार मैंने तुझे कही है, अब यही बुध्दि मैं तुझे योग के अनुसार कहू¡गा, जिसके ज्ञान से तू कर्म-बन्धन को नष्ट कर सकेगा।
#लोकेऽस्मिन्द्विविधा_निष्ठा_पुरा_प्रोक्ता_मयानघ।
#ज्ञानयोगेन_सांख्यानां_कर्मयोगेन_योगिनाम्॥ (भ ग ३/३)
अर्थात् : श्रीभगवान् बोले हे निष्पाप अर्जुन इस मनुष्यलोकमें दो प्रकारसे होनेवाली निष्ठा मेरे द्वारा पहले कही गयी है। उनमें ज्ञानियोंकी निष्ठा ज्ञानयोगसे और योगियोंकी निष्ठा कर्मयोगसे होती है।
षड्दर्शन उन भारतीय दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के मंथन का परिपक्व परिणाम है जो हजारों वर्षो के चिन्तन से उतरा और हिन्दू (वैदिक) दर्शन के नाम से प्रचलित हुआ। इन्हें आस्तिक दर्शन भी कहा जाता है। दर्शन और उनके प्रणेता निम्नलिखित है।
१ #पूर्व_मीमांसा: #महिर्ष_जैमिनी
२ #वेदान्त (उत्तर मीमांसा): #महिर्ष_बादरायण_वेदव्यास
३ #सांख्य: #महिर्ष_कपिल
४ #वैशेषिक: #महिर्ष_कणाद
५ #न्याय: #महिर्ष_गौतम
६ #योग: #महिर्ष_पतंजलि
भारतीय दर्शन के उपरनिर्दिश छः प्रकारों में से सांख्य भी एक है जो प्राचीनकाल में अत्यंत लोकप्रिय तथा प्रथित हुआ था। यह #अद्वैत_ वेदान्त से सर्वथा विपरीत मान्यताएँ रखने वाला दर्शन है। इसकी स्थापना करने वाले मूल व्यक्ति कपिल कहे जाते हैं। 'सांख्य' का शाब्दिक अर्थ है - 'संख्या सम्बंधी' या विश्लेषण, सम्यक ज्ञान। इसकी सबसे प्रमुख धारणा सृष्टि के प्रकृति-पुरुष से बनी होने की है, यहाँ प्रकृति (यानि पंच महाभूतों से बनी) जड़ है और पुरुष (यानि जीवात्मा) चेतन। योग शास्त्रों के ऊर्जा स्रोत (ईडा पिंगला), शाक्तों के शिव-शक्ति के सिद्धांत इसके समानान्तर दीखते हैं। ज्ञानमार्ग का यह प्रवर्तन भारतीय संस्कृति को कपिल की देन है। यदि बुद्ध, महावीर जैसे, नास्तिक दार्शनिक कपिल से प्रभावित हों तो आश्चर्य नहीं। आस्तिक दार्शनिकों में से वेदान्त, योग दर्शन और पौराणिक स्पष्ट रूप में सांख्य के त्रिगुणवाद और विकासवाद को अपनाते हैं। इस प्रकार कपिल प्रवर्तित सांख्य का प्रभाव प्राय: सभी दर्शनों पर पड़ा है।
सांख्य दर्शन अनुशार २५ तत्व है:
•#आत्मा (पुरुष)
•#अंतःकरण (४) : मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार
•#ज्ञानेन्द्रियाँ (५) : नासिका, जिह्वा, नेत्र, त्वचा, कर्ण
•#कर्मेन्द्रियाँ (५) : पाद, हस्त, उपस्थ, पायु, वाक
•#तन्मात्रायें (५) : गन्ध, रस, रूप, स्पर्श, शब्द
•#महाभूत (५) : पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
भारतिय सनातन वैदिक तत्वज्ञान और संस्कृति की यह महत्ता है कि सांख्य दर्शन के रूप में #अनीश्वरवादी #Anarchist नास्तिक कपिलमुनि को भी ईश्वरीय अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी विभूति मानी है। ऐसे कपिलमुनि को भाववंदना।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
🔆 इदं न मम 🔆
🙏🙏🙏🙏🙏
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🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉
श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#अश्वत्थः_सर्ववृक्षाणां_देवर्षीणां_च_नारदः।
#गन्धर्वाणां_चित्ररथः_सिद्धानां_कपिलो_मुनिः॥ (भ ग १०/२६)
अर्थात् : समस्त वृक्षोंमें पीपलका वृक्ष; और देवर्षियोंमें अर्थात् जो देव होकर मन्त्रोंके द्रष्टा होनेके कारण ऋषि भावको प्राप्त हुए हैं उनमें मैं नारद हूँ। गन्धर्वोंमें मैं चित्ररथ नामक गन्धर्व हूँ; सिद्धोंमें अर्थात् जन्मसे ही अतिशय धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्यको प्राप्त हुए पुरुषोंमें मैं कपिलमुनि हूँ।
श्रीमद्भगवगिता में भगवान कहते है कि #सिद्धानां_कपिलो_मुनिः सिद्धोंमें अर्थात् जन्मसे ही अतिशय धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्यको प्राप्त हुए पुरुषोंमें मैं कपिलमुनि हूँ।
कपिल प्राचीन भारत के एक प्रभावशाली मुनि थे। इन्हें सांख्यशास्त्र (यानि तत्व पर आधारित ज्ञान) के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है जिसके मान्य अर्थों के अनुसार विश्व का उद्भव विकासवादी प्रक्रिया से हुआ है। कई लोग इन्हें अनीश्वरवादी मानते हैं लेकिन गीता में इन्हें श्रेष्ठ मुनि कहा गया है। कपिल ने सर्वप्रथम विकासवाद का प्रतिपादन किया और संसार को एक क्रम के रूप में देखा।
श्रीमद्भगवत के अनुसार कपिलमुनि विष्णु के पंचम अवतार माने गए हैं। कर्दम और देवहूति से इनकी उत्पत्ति मानी गई है। बाद में इन्होंने अपनी माता देवहूति को सांख्यज्ञान का उपदेश दिया जिसका विशद वर्णन श्रीमद्भगवत के तीसरे स्कंध में मिलता है। कपिलमुनि के जन्म के विषय मे इतिहास में मतमतांतर है। हम इनके जन्म संबंधित जानकारी की ऐतिहासिक सत्यता के बारे में उलझे बगर उनके ज्ञान पर आधारित भारतीय षड्दर्शन में के एक ' सांख्य दर्शन ' के विषय में चिंतन करेंगे।
#सांख्य_दर्शन के विषय मे भगवान ने श्रीमद्भगवद्गीता में विविधता से ज्ञानयोग कहकर महत्ता बढ़ाई है:
#एषा_तेSभिहिता_सांख्ये_बुद्धिर्योगे_त्विमां_श्रुणु।
#बुद्धया_युक्तो_यथा_पार्थ_कर्मबन्धं_प्रहास्यसि।। (भ ग २/३९)
अर्थात् : हे अर्जुन! यह बुध्दि (ज्ञान) जो सांख्य के अनुसार मैंने तुझे कही है, अब यही बुध्दि मैं तुझे योग के अनुसार कहू¡गा, जिसके ज्ञान से तू कर्म-बन्धन को नष्ट कर सकेगा।
#लोकेऽस्मिन्द्विविधा_निष्ठा_पुरा_प्रोक्ता_मयानघ।
#ज्ञानयोगेन_सांख्यानां_कर्मयोगेन_योगिनाम्॥ (भ ग ३/३)
अर्थात् : श्रीभगवान् बोले हे निष्पाप अर्जुन इस मनुष्यलोकमें दो प्रकारसे होनेवाली निष्ठा मेरे द्वारा पहले कही गयी है। उनमें ज्ञानियोंकी निष्ठा ज्ञानयोगसे और योगियोंकी निष्ठा कर्मयोगसे होती है।
षड्दर्शन उन भारतीय दार्शनिक एवं धार्मिक विचारों के मंथन का परिपक्व परिणाम है जो हजारों वर्षो के चिन्तन से उतरा और हिन्दू (वैदिक) दर्शन के नाम से प्रचलित हुआ। इन्हें आस्तिक दर्शन भी कहा जाता है। दर्शन और उनके प्रणेता निम्नलिखित है।
१ #पूर्व_मीमांसा: #महिर्ष_जैमिनी
२ #वेदान्त (उत्तर मीमांसा): #महिर्ष_बादरायण_वेदव्यास
३ #सांख्य: #महिर्ष_कपिल
४ #वैशेषिक: #महिर्ष_कणाद
५ #न्याय: #महिर्ष_गौतम
६ #योग: #महिर्ष_पतंजलि
भारतीय दर्शन के उपरनिर्दिश छः प्रकारों में से सांख्य भी एक है जो प्राचीनकाल में अत्यंत लोकप्रिय तथा प्रथित हुआ था। यह #अद्वैत_ वेदान्त से सर्वथा विपरीत मान्यताएँ रखने वाला दर्शन है। इसकी स्थापना करने वाले मूल व्यक्ति कपिल कहे जाते हैं। 'सांख्य' का शाब्दिक अर्थ है - 'संख्या सम्बंधी' या विश्लेषण, सम्यक ज्ञान। इसकी सबसे प्रमुख धारणा सृष्टि के प्रकृति-पुरुष से बनी होने की है, यहाँ प्रकृति (यानि पंच महाभूतों से बनी) जड़ है और पुरुष (यानि जीवात्मा) चेतन। योग शास्त्रों के ऊर्जा स्रोत (ईडा पिंगला), शाक्तों के शिव-शक्ति के सिद्धांत इसके समानान्तर दीखते हैं। ज्ञानमार्ग का यह प्रवर्तन भारतीय संस्कृति को कपिल की देन है। यदि बुद्ध, महावीर जैसे, नास्तिक दार्शनिक कपिल से प्रभावित हों तो आश्चर्य नहीं। आस्तिक दार्शनिकों में से वेदान्त, योग दर्शन और पौराणिक स्पष्ट रूप में सांख्य के त्रिगुणवाद और विकासवाद को अपनाते हैं। इस प्रकार कपिल प्रवर्तित सांख्य का प्रभाव प्राय: सभी दर्शनों पर पड़ा है।
सांख्य दर्शन अनुशार २५ तत्व है:
•#आत्मा (पुरुष)
•#अंतःकरण (४) : मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार
•#ज्ञानेन्द्रियाँ (५) : नासिका, जिह्वा, नेत्र, त्वचा, कर्ण
•#कर्मेन्द्रियाँ (५) : पाद, हस्त, उपस्थ, पायु, वाक
•#तन्मात्रायें (५) : गन्ध, रस, रूप, स्पर्श, शब्द
•#महाभूत (५) : पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
भारतिय सनातन वैदिक तत्वज्ञान और संस्कृति की यह महत्ता है कि सांख्य दर्शन के रूप में #अनीश्वरवादी #Anarchist नास्तिक कपिलमुनि को भी ईश्वरीय अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी विभूति मानी है। ऐसे कपिलमुनि को भाववंदना।
॥हरि: 🕉 तत्सत्॥
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