प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः कामदेव

🙏 सुप्रभात, आज मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष प्रथम शनिवार दिनांक ८.१२.२०१८ 🙏 

🕉 #कृष्णं_वंदे_जगद्गुरूम् 🕉   



श्रीमद्भगवगिता में अपनी दैवीसंपदा एवं विभूति दर्शनमें प्रभु ने कहा है:
#आयुधानामहं_वज्रं_धेनूनामस्मि_कामधुक्।
#प्रजनश्चास्मि_कन्दर्पः_सर्पाणामस्मि_वासुकिः॥ (भ ग १०/२८)
अर्थात् :  शस्त्रोंमें मैं दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे बना हुआ वज्र हूँ। दूध देनेवाली गौओंमें कामधेनु - वसिष्ठको सब कामनारूप दूध देनेवाली अथवा सामान्य भावसे जो भी कामधेनु है वह मैं हूँ। प्रजाको उत्पन्न करनेवाला कामदेव मैं हुँ, और सर्पोंमें अर्थात् सर्पोके विविध प्रकारों में सर्पराज वासुकि मैं हूँ।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते है की : #प्रजनश्चास्मि_कन्दर्पः प्रजाको उत्पन्न करनेवाला कामदेव मैं हुँ।

हमारी सनातन वैदिक संस्कृति ने काम को त्याज्य नही माना है। काम, जीवन के चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में से एक है। हमारी संस्कृति अनुसार काम रूप की वासना स्वयं ईश्वर का रूप है। वह कोई ऐसी विकृति नहीं है जिसे हेय माना जाए।

इस नियम के अनुसार काम प्रजनन के लिए अनिवार्य है और उसका वह छंदोमय मर्यादित रूप अत्यंत पवित्र है। काम वृत्ति की वीभत्स व्याख्या न इष्ट है, न कल्याणकारी। मानवीय शरीर में जिस श्रद्धा, मेधा, क्षुधा, निद्रा, स्मृति आदि अनेक वृत्तियों का समावेश है, उसी प्रकार काम वृत्ति भी देवी की एक कला रूप में यहाँ निवास करती है और वह चेतना का अभिन्न अंग है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं योगेश्वर श्री कृष्ण ने काम को अपनी विभूति माना है :
#बलं_बलवतामस्मि_कामरागविवर्जितम्।
#धर्माविरुद्धो_भूतेषु_कामोऽस्मि_भरतर्षभ॥ (भ ग ७/११)
अर्थात्।: हे भरत श्रेष्ठ मैं बलवानों का कामना तथा आसक्ति से रहित बल हूँ और सब भूतों में धर्म के अविरुद्ध अर्थात् अनुकूल काम हूँ।

#प्रेम_के_देवता_कामदेव :
जिस तरह पश्चिमी देशों में ' क्यूपिड ' और यूनानी देशों में ' इरोस ' को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, उसी तरह हमारे धर्मग्रंथों में कामदेव को प्रेम और आकर्षण का देवता माना जाता है। उनका स्वरूप युवा और आकर्षक है। वे विवाहित हैं और #रति उनकी पत्नी हैं। वे इतने शक्तिशाली हैं कि उनके लिए किसी प्रकार के कवच की कल्पना नहीं की गई है। उनके अन्य नामों में रागवृंत, अनंग, कंदर्प, मनमथ, मनसिजा, मदन, रतिकांत, पुष्पवान, पुष्पधंव आदि प्रसिद्ध हैं। कामदेव, देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु के पुत्र है। कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न, कामदेव का अवतार है। कामदेव के आध्यात्मिक रूप को हिंदू धर्म में वैष्णव अनुयायियों द्वारा कृष्ण भी माना जाता है।

#भगवान_ब्रह्माका_कामदेवको_वरदान :
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय ब्रह्माजी प्रजा वृद्धि की कामना से ध्यानमग्न थे। उसी समय उनके अंश से तेजस्वी पुत्र काम उत्पन्न हुआ और कहने लगा कि मेरे लिए क्या आज्ञा है ? तब ब्रह्माजी बोले कि मैंने सृष्टि उत्पन्न करने के लिए प्रजापतियों को उत्पन्न किया था किंतु वे सृष्टि रचना में समर्थ नहीं हुए इसलिए मैं तुम्हें इस कार्य की आज्ञा देता हूं। यह सुन कामदेव वहां से विदा होकर अदृश्य हो गए।

यह देख ब्रह्माजी क्रोधित हुए और शाप दे दिया कि तुमने मेरा वचन नहीं माना इसलिए तुम्हारा जल्दी ही नाश हो जाएगा। शाप सुनकर कामदेव भयभीत हो गए और हाथ जोड़कर ब्रह्माजी के समक्ष क्षमा मांगने लगे। कामदेव की अनुनय-विनय से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें रहने के लिए 12 स्थान देता हूं- स्त्रियों के कटाक्ष, केश राशि, जंघा, वक्ष, नाभि, जंघमूल, अधर, कोयल की कूक, चांदनी, वर्षाकाल, चैत्र और वैशाख महीना। इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी ने कामदेव को पुष्प का धनुष और 5 बाण देकर विदा कर दिया।

#कामदेव_का_वास :
#यौवनं_स्त्री_च_पुष्पाणि_सुवासानि_महामते:।
#गानं_मधुरश्चैव_मृदुलाण्डजशब्दक:॥
#उद्यानानि_वसन्तश्च_सुवासाश्चन्दनादय:।
#सङ्गो_विषयसक्तानां_नराणां_गुह्यदर्शनम्॥
#वायुर्मद_सुवासश्र्च_वस्त्राण्यपि_नवानि_वै।
#भूषणादिकमेवं_ते_देहा_नाना_कृता_मया॥
मुद्गल पुराण के अनुसार कामदेव का वास यौवन, स्त्री, सुंदर फूल, गीत, पराग कण या फूलों का रस, पक्षियों की मीठी आवाज, सुंदर बाग-बगीचों, वसंत ऋ‍तु, चंदन, काम-वासनाओं में लिप्त मनुष्य की संगति, छुपे अंग, सुहानी और मंद हवा, रहने के सुंदर स्थान, आकर्षक वस्त्र और सुंदर आभूषण धारण किए शरीरों में रहता है। इसके अलावा कामदेव स्त्रियों के शरीर में भी वास करते हैं, खासतौर पर स्त्रियों के कटाक्ष, केश राशि, जंघा, वक्ष, नाभि, जंघमूल, नयन, ललाट, भौंह और होठों पर इनका प्रभाव काफी रहता है।

॥हरि: 🕉 तत्सत्॥

🔆  इदं न मम  🔆

🙏🙏🙏🙏🙏

कृपया नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर👇👇👇॥भगवत् कृपा॥ page Like & Follow करें : https://www.facebook.com/bhagwatkrupa/
Also read @ https://rspngp.blogspot.com

Comments

Popular posts from this blog

नेहरु खानदान का घिनौना चरित्र

षोडश संस्कार एवं विवाह संस्कार

हिमालय दर्शन